5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

catch_icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आपसी प्रेम व इंसानियत की शिक्षा देकर राष्ट्रभक्त इंसान बनाना ही सबसे बड़ी तालीम- शौकतअली

पोकरण. जमीअत उलमा-ए-हिन्द की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य व जामिया एजाजुल उलूम वैट गाजियाबाद के कुलपति मौलाना कारी शौकतअली ने कहा कि व्यक्ति को इंसानियत, प्रेम, मोहब्बत व भाईचारे की शिक्षा देकर उसे एक राष्ट्रभक्त इंसान बनाना ही सबसे बड़ी तालीम है। उन्होंने शनिवार रात्रि में क्षेत्र के बड़ली मांडा गांव में अर्रशीद फाउण्डेशन की […]

2 min read
Google source verification
pokaran

pokaran


पोकरण. जमीअत उलमा-ए-हिन्द की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य व जामिया एजाजुल उलूम वैट गाजियाबाद के कुलपति मौलाना कारी शौकतअली ने कहा कि व्यक्ति को इंसानियत, प्रेम, मोहब्बत व भाईचारे की शिक्षा देकर उसे एक राष्ट्रभक्त इंसान बनाना ही सबसे बड़ी तालीम है।

उन्होंने शनिवार रात्रि में क्षेत्र के बड़ली मांडा गांव में अर्रशीद फाउण्डेशन की ओर से आयोजित तालीमी बेदारी कॉन्फ्रैंस में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि सही मायने में तालीम वह है, जिसमें दीन के साथ हुनर, प्रेम, मोहब्बत व आपसी भाईचारे की भावना का संगम हो। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दीनी तालीम हासिल करने के बाद भी अपने मजहब के बताए मार्गों पर नहीं चलता है, तो उसकी तालीम का कोई मायने नहीं है। दूसरी तरफ यदि कोई अंग्रेजी जुबान के साथ तालीम हासिल करने के बाद भी अपने दीन व ईमान को नहीं छोड़ता है, वही उसकी सच्ची तालीम है। उन्होंंने कहा कि इस्लाम में तालीम का बहुत बड़ा महत्व बताया गया है तथा व्यक्ति तालीम के बिना इंसानियत नहीं सीख सकता।

इसीलिए प्रत्येक व्यक्ति को तालीम हासिल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तालीम वह है, जिसमें दीन, हुनर व इंसानियत की शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश की आवाम को बिना किसी धर्म व राजनीतिक भेदभाव के तालीम देने की जिम्मेवारी हुकूमत की है। जबकि भारतवर्ष में संचालित किए जा रहे मदरसों में अपने खर्चे से गरीब व जरुरतमंद लोगों को सभी तरह की तालीम दी जाती है। उन्होंने कहा कि नबी का फरमान है कि प्रत्येक व्यक्ति वफादारी के साथ अपने मुल्क से मोहब्बत करे तथा बिना किसी धर्म व जाति के अपने पड़ौसी की मदद करे। उसी व्यक्ति को सच्चा मोमीन कहलाने का हक है, जो अपने हाथ, जुबान, मन से किसी भी व्यक्ति का बुरा नहीं चाहे। उन्होंने देश की शिक्षा को राजनीति से दूर रखने की भी बात कही।

इस अवसर पर जमीअत उलमा-ए-हिन्द के प्रदेश महामंत्री मौलाना अब्दुल वाहिद खत्री, पूर्व मंत्री अमीनखां, पूर्व जिला प्रमुख अब्दुला फकीर, स्थानीय मदरसा इस्लामिया के नायब मोहतमीम हाफिज दीन मोहम्मद, मुफ्ती युसुफ, मौलवी अयूब ऊंटड़ा सहित वक्ताओं ने विचार व्यक्त करते हुए अल्पसंख्यक समाज में शिक्षा की कमी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समय बदल रहा है तथा यदि समय की रफ्तार के साथ समाज में बदलाव नहीं हुआ, तो समाज कई साल पीछे चला जाएगा तथा उनकी तरक्की रुक जाएगी। उन्होंने दीनी व दुनियाई तालीम हासिल कर आगे बढने, राजकीय सेवाओं में आगे बढने व अपने क्षेत्र का नाम रोशन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यही क्षेत्र में आपसी प्रेम, सद्भाव, भाईचारे व राष्ट्रभक्ति के प्रति सदर मौलाना रशीद अहमद कासमी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।


बड़ी खबरें

View All

जालोर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग