सरपट दौड़ती बाल वाहिनियां,कहीं लील न ले मासूमों की जिंदगी

कब जगेंगे जिम्मेदार...
- अवैध गैस किटों से आगजनी का अंदेशा
- पुलिस व परिवहन विभाग नहीं दे रहा है ध्यान

By: Deepak Vyas

Published: 10 Mar 2019, 09:32 AM IST

जैसलमेर/पोकरण. सडक़ों पर सरपट दौड़ते छोटे वाहन, उनमें सवार नौनिहाल, सांसत में जान, अभिभावकों के गले में अटकी सांस और पल-पल किसी अनहोनी का डर। ऐसा ही कुछ नजारा बाल वाहिनियों का है, जो प्रतिदिन विद्यालयो में अध्ययन के लिए मासूमों को विद्यालय लाने व पुन: घर ले जाने का कार्य करती है। मासूम नौनिहालों को घर से स्कूल व स्कूल से घर तक के सफर को सुरक्षित व सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से कई आदेश निकाले गए है, लेकिन विद्यालय प्रशासन, परिवहन विभाग व पुलिस की ओर से इन आदेशों की अनदेखी की जा रही है। जिससे कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। परिवहन विभाग की ओर से समय-समय पर इन बाल वाहिनियों के चालकों के परमिट, लाइसेंस व अन्य कागजातों की न तो कभी जानकारी ली जा रही है, न ही इन वाहनों मे लगे गैस किटों के बारे में जांच की जाती है। इन बाल वाहिनियों में घर के चिराग कितने सुरक्षित है, इस पर स्वयं अभिभावकों की भी पैनी नजर नहीं है। परमाणु नगरी में पिछले दो-तीन वर्षों से विद्यालय तक का सफर कर रही बाल वाहिनियों में तीन आगजनी व गाड़ी के पलटी खाने की वारदातें घटित हो चुकी है। जिससे दो बच्चो के जलने से व दर्जनों बच्चे घायल हो चुके है। गनीमत रही कि इन हादसो में कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई।
बाल वाहिनियों में लगे हैं अवैध गैस किट
परमाणुनगरी में संचालित विद्यालयों की ओर से अपने विद्यालय में छात्रों को लाने-ले जाने के लिए लगाए गए छोटे चार पहिया वाहनों में कई वाहनों में गैस किट भी लगे हुए है तथा वाहन मालिकों की ओर से अपने वाहनों में लगे गैस किट की समय-समय पर न तो जांच करवाई जाती है और न ही परिवहन विभाग की ओर से गैस किट की वैधता की जांच नहीं किए जाने से हर पल आग लगने का अंदेशा बना रहता है। यही नहीं गैस किट में प्रत्येक वर्ष इसको साफ करवाने व मरम्मत करवाने का प्रावधान है, लेकिन बाल वाहिनी संचालकों की ओर से वर्षों से इनकी मरम्मत नहीं करवाई गई है।
क्षमता से अधिक बिठाए जाते है विद्यार्थी
विद्यालय प्रशासन की ओर से बच्चों को विद्यालय लाने-ले जाने के लिए विद्यालयों के स्वयं के वाहन व अनुबंधित किए गए बाल वाहिनियों में क्षमता से भी अधिक सवारियां भरी जाती है। परिवहन विभाग के मापदंडो के अनुसार स्कूली छोटे वाहनो में अधिकतम बारह से ज्यादा सवारियां बिठाना वर्जित है, लेकिन इन बाल वाहिनियों में 20 से 25 विद्यार्थियों को बिठाए देखा जा सकता है। वाहन में विद्यार्थी ओवरलोड भरे जाते है। ऐसे में तेज गति व लापरवाही से कोई हादसा होता है, तो कई जानें लील सकता है।
प्रतिदिन 40 से भी ज्यादा चलती है बाल वाहिनिया
कस्बे में संचालित विद्यालयों की ओर से स्कूली छात्र-छात्राओं को घर से स्कूल लाने व स्कूल से घर पंहुचाने के अलावा उपखंड के ग्रामीण क्षेत्रों खेतोलाई, चाचा, ओढाणिया, नानणियाई, लाठी, ऊजला, लवां, धूड़सर सहित करीब एक दर्जन गांवों से प्रतिदिन विद्यार्थियो को उनके गांव से विद्यालय लाने व वापस गंतव्य तक छोडऩे का प्रावधान कर रखा है। इसके लिए छोटे-मोटे करीब 40 से भी ज्यादा चार पहिया वाहन लगे हुए है। जिनमे आधे से भी अधिक वाहनो के पास परिवहन विभाग से गैस किट प्रमाण पत्र नहीं है। वाहन चालकों की ओर से अपने वाहन मे घरेलू गैस सिलेण्डर लगाकर वाहन संचालित किए जा रहे है।
फैक्ट फाइल:-
- 2 दर्जन निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं पोकरण में
- 40 से अधिक बाल वाहिनियां होती है संचालित
- 800 से अधिक विद्यार्थी करते है बाल वाहिनियों में सफर
- 1 वर्ष में एक बार गैस किट की मरम्मत का है प्रावधान

Deepak Vyas Bureau Incharge
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