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Jaisalmer- भरपूर सीजन में काम-धंधों पर गिर रही ‘बिजली’

-दुकानों से लेकर फैक्ट्रियों तक में मायूसी का आलम-सरकारी दफ्तरों में भी कामकाज ठप
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जैसलमेर .दिवाली जैसे महापर्व से ठीक पहले प्रदेशव्यापी बिजली कटौती के सिलसिले में जैसलमेर मुख्यालय पर प्रतिदिन तीन घंटे बिजली की गैरमौजूदगी से सभी काम-धंधों पर बेजा विपरीत असर पड़ रहा है। दिवाली के सहारे मंदी से उबरने की कोशिश कर रहे व्यापारिक समुदाय के लिए बिजली की यह कटौती परेशानियों का पैगाम लेकर आई है। विद्युत की गैरहाजिरी में रीको की पत्थर इकाइयों से लेकर बाजार की छोटी-बड़ी सभी दुकानों के साथ सरकारी कार्यालयों तक में कामकाज या तो पूरी तरह ठप हो जाता है, अथवा उनमें 50 फीसदी से ज्यादा कमी आ जाती है। इसके अलावा लाइनों में कहीं न कहीं आने वाले ‘फॉल्ट’ के कारण बिजली की अघोषित कटौती से लोगों की समस्या और विकट हो चुकी है।
रीको में मशीनें ठप, श्रमिक बेकार
जैसलमेर के एकमात्र रीको औद्योगिक क्षेत्र में बिजली कटौती का सबसे ज्यादा प्रभाव पत्थर इकाइयों पर पड़ा है। सुबह 11 से दोपहर 2 बजे के दौरान बिजली गुल रहती है और इस दौरान वहां लगे करीब 50 से अधिक कटर और 20 से ज्यादा गैंगसॉ की मशीनें जहां की तहां ठप हो जाती है। दीवाली सीजन के चलते इन दिनों शहर भर में निर्माण कार्य बड़े पैमाने पर चल रहे हैं। ऐसे में पिछले कुछमहीनों से मंदी के आलम में चल रही इन इकाइयों में कामकाज के लिहाज से तेजी आई हुई है। बड़ी तादाद में पत्थर की सेल्फों, टाइल्स आदि के ऑर्डर इकाइयों के संचालकों के पास हैं। बिजली कटौती के चलते उत्पादन में कमी आने से वे परेशान है। दूसरी ओर इन इकाइयों पर काम करने वाले श्रमिक तीन घंटे तक घोषित और उसके बाद अघोषित रूप से बिजली गुल रहने के दौरान बेकार बैठे रहने पर मजबूर हैं।

IMAGE CREDIT: patrika

कामकाज के घंटे घटे
सरकारी कार्यालयों में कामकाज के निर्धारित घंटे पहले ही औसतन कार्मिकों की लेटलतीफी से कम हैं, उस पर पूर्वाह्न 11 से दोपहर 2 बजे तक बिजली गुल रहने से कामकाज लगभग ठप हो जाता है। कार्यालयों में अधिकांश काम अब कम्प्यूटरों के माध्यम से होता है। बिजली नहीं रहने से बिना पंखे व लाइट के भी कार्मिकों से कमरों में नहीं बैठा जाता। ऐसे में कार्यालयों में दोपहर बाद ही थोड़ा काम हो पाता है।
ये काम पूरी तरह ठप
बिजली के अभाव में शहर में फोटो कॉपियर्स, प्रिंटिंग प्रेस, इलेक्ट्रिकल्स व इलेक्ट्रोनिक्स, फोटो स्टूडियो, मशीनों से काम करने वाले मैकेनिक आदि पूरी तरह से तीन घंटों के लिए ‘बेरोजगार’हो रहे हैं। जिन लोगों को इनसे काम होता है, वे भी पीड़ा भोग रहे हैं। इसके अलावा घरों में रंगाई-पुताई से लेकर निर्माण संबंधी कार्यों में कटौती का ‘करंट’ बेहिसाब पहुंचा है। यहां तक कि जैसलमेर भ्रमण पर आए सैलानियों को भी कई बार बिजली कटौती से असुविधा झेलनी पड़ती है तथा वे नियमित कटौती व्यवस्था पर अचरज भी जताते हैं।