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सब्जी विक्रेताओं की लापरवाही ने बढ़ाई समस्या, यह शहर की गड़ीसर प्रोल है या गोशाला ?

जैसलमेर शहर के ऐतिहासिक गड़ीसर प्रोल क्षेत्र और उसके आसपास की गलियों में इन दिनों रात्रि के समय बेसहारा पशुओं का जमावड़ा लोगों के लिए भारी मुसीबत का कारण बन गया है।

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जैसलमेर शहर के ऐतिहासिक गड़ीसर प्रोल क्षेत्र और उसके आसपास की गलियों में इन दिनों रात्रि के समय बेसहारा पशुओं का जमावड़ा लोगों के लिए भारी मुसीबत का कारण बन गया है। यहां बेसहारा पशु सडक़ों पर बेधडक़ व स्वछंद विचरण करते हैं और कई बार तो बीच सडक़ पर ही बैठ जाते हैं, जिससे आवागमन में बाधा आती है। वाहन चालकों को रुकना पड़ता है, कई बार जाम की स्थिति बनती है और टक्कर की नौबत आ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या अचानक नहीं आई है, बल्कि यह सब्जी विक्रेताओं की पुरानी लापरवाही का नतीजा है। शाम ढलते ही सब्जी के ठेले वाले दिनभर की बची-खुची व खराब सब्जियां आसपास की सडक़ों पर फेंक देते हैं। इन सड़ी-गली सब्जियों की गंध और मौजूदगी से बड़ी संख्या में पशु वहां खिंचे चले आते हैं और फिर रातभर वहीं डेरा डाल लेते हैं।

वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी

स्थानीय निवासी रामेश्वर सिंह, जो प्रतिदिन इसी मार्ग से अपने घर लौटते हैं, ने बताया, रात को स्कूटर चलाना जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है। कई बार अचानक पशु सडक़ के बीच आ जाते हैं। क्षेत्र के व्यापारी अब्दुल खां ने चिंता जाहिर करते हुए कहा, हम दुकानदार भी परेशान हैं। ग्राहक रात को आना टालते हैं। बदबू और जानवरों की भरमार से व्यापार प्रभावित हो रहा है। नगरपरिषद को सख्ती से व्यवस्था करनी चाहिए। स्थानीय नागरिकों ने नगरपरिषद और प्रशासन से मांग की है कि वे इस ओर शीघ्र ध्यान दें। पशुओं की नियमित पकड़धकड़ की जाए और सब्जी विक्रेताओं पर सडक़ों पर कचरा फेंकने पर जुर्माना लगाया जाए। इसके अलावा, क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि जिम्मेदारों की पहचान हो सके और उन्हें कार्रवाई के दायरे में लाया जा सके। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है, जिससे न केवल आमजन की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी, बल्कि शहर की स्वच्छता व छवि भी प्रभावित होगी।