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जैसलमेर. रेगिस्तानी क्षेत्र होने से हमेशा से सुविधाओं में पिछड़ा होने का दंश यहां के खिलाडिय़ों को लंबे समय से भुगतना पड़ रहा है। यहां के खिलाडिय़ों में शुरू से ही दमदार हौसला रहा है, लेकिन खेलने के लिए खेल मैदान नहीं है। ऐसे में यहां के खिलाड़ी चाहकर भी राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने से पहले ही हांफ रहे है। मैदान के अभाव के बीच भी कईं खिलाडिय़ों ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। कईं युवाओं ने तो खेल के लिए घर छोड़ बड़े शहरों की ओर रुख किया और सफल भी हुए, तो कईं खिलाड़ी परिवार का आर्थिक भार बढऩे से होने वाली दिक्कतों से बचने के लिए अपने सपनो से समझौता कर गए। जिससे देश को बड़े खिलाड़ी बनने से वंचित रहना पड़ा। हॉल ही में सरकार ने खिलाड़ी तैयार करने के लिए योजना तैयार की थी और कईं प्रतियोगिताएं भी करवाई, लेकिन यह प्रतियोगिताएं कागजी पुलिंदा बनकर रह जाने से खिलाडिय़ों को अधिक लाभ नहीं हुआ।
नहीं है खेल मैदान
विद्यार्थी जीवन से खेल की ललक जगाने के लिए सरकार ने महानरेगा के तहत विद्यालयों में खेल मैदान विकसित करने की योजना तैयार की थी, लेकिन इस योजना को बनाए दो साल से अधिक का समय व्यतीत हो गया, लेकिन कहीं पर भी कोई खेल का मैदान तैयार नहीं हो सका। जिससे यहां के खिलाडिय़ों में दमदार हौसला होने के बाद भी वे आगे नहीं बढ़ सके।
अधूरा है पवेलियन का निर्माण कार्य, कैसे तैयार होंगे खिलाड़ी
रामदेवरा. युवाओं में खेल की रुचि बढ़ाने के लिए सरकार समय-समय पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कर खेल प्रतिभाओं का बढ़ावा देने का दावा करती है, लेकिन खेल मैदान के अभाव में खेल में रुचि रखने वाले खिलाड़ी खेल में अपनी प्रतिभा को निखार नहीं पा रहे। जिले के रामदेवरा गांव में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में स्थित पवेलियन का कार्य अधूरा होने से सरकारी धनराशि खर्च करने के बावजूद खेल प्रेमियों व दर्शकों के लिए यह अनुपयोगी साबित हो रहा है।
अधूरा है खेल मैदान
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत की ओर से वर्षों पूर्व विद्यालय के पास स्थित स्टेडियम में पवेलियन निर्माण कार्य शुरू किया गया था, लेकिन ग्राम पंचायत की ओर से स्टेडियम का निर्माण कार्य पूरा नहीं करवाया गया और बीच में ही बंद कर दिया गया। गांव में राष्ट्रीय पर्व के अलावा अन्य कार्यक्रम राउमावि के खेल मैदान स्थित स्टेडियम में आयोजित होते है। कार्य अधूरा पड़ा होने के कारण यहां पवेलियन पर लगाए गए पत्थर भी उखडऩे लगे है तथा लोग उठाकर ले जा रहे है। जिससे सरकार की ओर से अब तक खर्च की गई राशि का भी कोई उपयोग नहीं हो रहा है।
Published on:
23 Jan 2018 12:25 pm
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