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पेयजल स्रोतों के आवक क्षेत्रों को भी नहीं छोड़ा-अतिक्रमणों का जला
नाचना(जैसलमेर). क्षेत्र के परंपरागत पेयजल स्त्रोतों की उपेक्षा के चलते इनके आवक क्षेत्र में अतिक्रमण बढते जा रहे है। इसके अलावा झाडिय़ों के कारण पानी की आवक नहीं हो पाएगी। गौरतलब है कि गांव में रावली नाडी, ईंटों वाली नाडी, गणेश नाडी स्थित है। इन्दिरा गांधी नहर आने से पूर्व इन नाडियों के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में लिया जाता था। इसके अलावा मवेशी भी इसी पानी का उपयोग करते थे, तो किसानों की ओर से खेती के लिए भी यह पानी ले जाया जाता था। नहर आने के बाद इन नाडियों की उपेक्षा होने लगी है। इन नाडियों के आवक क्षेत्र में भू-माफियाओं की ओर से पत्थर डालकर, पक्के निर्माण करवाकर अतिक्रमण किए जा रहे है। इसके अलावा यहां बड़ी संख्या में झाडिय़ां लग गई है। गांव की रावली नाडी पर सरकारी योजनाओं के तहत धनराशि भी खर्च की गई, लेकिन अब उपेक्षा के चलते नाडी का अस्तित्व खत्म हो रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने से भूमाफियाओं के हौसले बुलंद है।
Published on:
12 Jun 2018 10:35 pm
