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एक ही घर से उठी एक साथ तीन अर्थियां, गमगीन माहौल में हर आंख नम

कुदरत का खेल भी अजीबो गरीब है। जहां कभी रेत के धोरों में पानी को तरसते थे, वहीं लगातार 12 घंटे तक मूसलाधार बरसात के होने से जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 6 Aug 2024, 10:38 PM IST

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कुदरत का खेल भी अजीबो गरीब है। जहां कभी रेत के धोरों में पानी को तरसते थे, वहीं लगातार 12 घंटे तक मूसलाधार बरसात के होने से जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ। मकानों छतों से पानी टपकना शुरू हो गया, वहीं कच्चे मकान ढहने शुरू हो गए। कुदरत की इसी अजीब गरीब लीला के चलते रहवासी मकान के एक कमरे की छत के ढहने से दादा बागाराम (65), दादी अगरी (60) वर्ष व पोता हरीश (14) मलबे में दब गए। जिन्हें परिवार के अन्य सदस्यों व आसपास के लोगों ने मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया। जहां पर चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोतिष कर दिया। जानकारी मिलने पर जिला कलेक्टर प्रताप सिंह, पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी, उपखण्ड अधिकारी पवन कुमार भी मौके पर पहुंचे। जहां पर िस्थति का जायजा लिया। पीडित परिवार के घर जाकर सांत्वना भी दी। सरकार की ओर से हर संभव आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया। मंगलवार सुबह अस्तपाल में ग्रामीणों की भीड़ लगी रही। हर कोई प्राकृतिक आपदा को लेकर चर्चा करता नजर आया। पुलिस की मौजूदगी में तीनों मृतकों का पोस्ट मार्टक करवाया गया। आवश्यक कागजी कार्यवाही करने के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किया गया। मोहनगढ पुलिस थानाधिकारी प्रेम प्रकाश के निर्देश पर एएसआई खेमा राम ने मौके पर पहुंच कर आवश्यक कार्यवाही की। पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

चहुंओर चीत्कार

मंगलवार सुबह अस्पताल से तीनों के घर शव पहुंचने पर घर में चारों ओर चीखने चिल्लाने की ही आवाज आ रही थी। हर किसी की आंखों में आंसू नजर आ रहे थे। एक ही घर से परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ तीन अर्थियों के उठने से हर किसी की आंखे नम नजर आ रही थी। हर कोई ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था कि किसी के साथ भी ऐसी घटना घटित न करें।