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धीमे जहर की जद में फंस रही जैसलमेर की भावी पीढ़ी,आखिर ऐसा क्यों? जानिए पूरी खबर

-जैसलमेर समेत जिले भर में नाबालिगों को धड़ल्ले से बेचे जा रहे तम्बाकू उत्पाद-शिक्षण संस्थानों के आसपास भी बिक्री पर कोई रोक नहीं-कोटपा अधिनियम की खुले आम हो रही अवहेलना
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Tobacco products being sold to minors In Jaisalmer district

Tobacco products being sold to minors In Jaisalmer district

जैसलमेर/पोकरण. जिस भावी पीढ़ी को देश का कर्णधार माना जाता है, वह तम्बाकू जैसे धीमे जहर की गिरफ्त में आ रहे हैं और उन्हें इस दलदल में धंसने से बचाने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर है, वे अपनी तंद्रा को तजने के लिए मानो तैयार नहीं। जैसलमेर मुख्यालय से लेकर जिले के पोकरण कस्बे तथा तमाम ग्रामीण इलाकों में हालात दुर्भाग्यपूर्ण बने हुए हैं। सभी जगहों पर 18 वर्ष से कम अवयस्कों को तम्बाकू उत्पादों की बिक्री नहीं किए जाने संबंधी कोटपा एक्ट के कानून की अवहेलना की जा रही है। शायद ही कोई दुकानदार किशोर वय के बच्चों को गुटखा अथवा सिगरेट-बीड़ी बेचने से इनकार करता हो। राजकीय और निजी शिक्षण संस्थाओं के 100 गज के दायरे में अनेक दुकानों, केबिनों व ठेलों पर तम्बाकू उत्पाद धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। ऐसा करने से दुकानदारों को रोकने वाला कोई नहीं है।

हालात विकट, रोकने वाला कोई नहीं
जैसलमेर जिला मुख्यालय स्थित हनुमान चौराहा पर सबसे बड़ा राजकीय विद्यालय अमर शहीद सागरमल गोपा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के ठीक बाहर खड़े ठेलों व उसके सामने की दुकानों में तम्बाकू उत्पाद खुलेआम बेचे जा रहे हैं। स्कूली बच्चों को भी उनकी खरीद करते देखा जा सकता है, जबकि बगल में ही जिला कलेक्ट्रेट स्थित है। जहां से जिले का प्रषासन संचालित होता है। यही स्थिति शहर के अन्य अनेक सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों के आसपास बने हुए हैं। शिक्षण संस्थानों पर तम्बाकू मुक्ति संबंधी बोर्ड लगाए जाने का सवाल है, यह भी चंद संस्थानों को छोडकऱ अन्य कहीं नजर नहीं आते। विद्यालय प्रशासन की तरफ से आसपास की दुकानों पर तम्बाकू उत्पादों की बिक्री को रुकवाने के लिए प्रयास नहीं किए जाते।जबकि यह उनका नैतिक दायित्व है।

क्या है कोटपा
-‘द सिगरेट्स एंड अदर टोबेको प्रोडक्ट एक्ट, 2003 (कोटपा) कानून को संसद ने 2003 में बनाया। इसके अंतर्गत इंडोर सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान नहीं किया जा सकता।
-न ही रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालयों, बस स्टेंड, अस्पताल, अन्य सार्वजनिक स्थलों रेस्टोरेंट, होटल, बार एवं कैफे आदि पर सिगरेट अथवा बीड़ी आदि का सेवन किया जा सकता है।
-इस एक्ट के अंतर्गत प्रावधान है कि स्कूल आदि शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तम्बाकू उत्पाद नहीं बेचे जा सकते।
-18 वर्ष से कम आयु के अवयस्कों को तम्बाकू उत्पाद नहीं बेचे जा सकते। खुली सिगरेट या बीड़ी बेचना भी कोटपा के प्रावधानों का उल्लंघन है क्योंकि उन पर चेतावनी अंकित नहीं होती।

यह है हकीकत
धूम्रपान निषेध अधिनियम के तहत सरकारी शिक्ष संस्थाओं की 100 मीटर की परिधि के आसपास नशीले उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक होने के बावजूद भी पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। पुलिस विभाग की ओर से इसकी रोकथाम के कोई उपाय नहीं किए जा रहे है, तो स्कूल प्रशासन भी ऐसी दुकानों को हटाने के लिए कोई शिकायत करने की जरूरत नहीं समझता है। स्कूल की कुछ ही दूरी पर तम्बाकू की बिक्री की लगी दुकानें, केबिन व हाथ ठेलों के जमावड़े के बावजूद भी इनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही।

हर जगह दुकानें
पोकरण कस्बे मे संचालित होने वाली निजी व सरकारी स्कूलों के आस पास तम्बाकू की पुडिय़ा व गुटखे के पाउच की ब्रिकी को बढ़ावा मिलने का सबसे बड़ा कारण यह भी देखा गया कि हर गली मोहल्ले मे निवास करने वाले लोगों ने अपने घरों के आगे व अंदर छोटी मोटी दुकानें खोल रखी है। पोकरण कस्बे में ऐसे कई विद्यालय है, जहां स्कूली बच्चों को विद्यालय से निकलते ही एक-दो कदम की दूरी पर ये सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है। स्थानीय राउमावि, उमावि बीलिया, राउप्रावि संख्या एक, तीन, केकेबास सहित निजी विद्यालयों के पास बहुतायत में दुकानें स्थित है। जिनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।