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28 किमी घंटा की रफ्तार से चली हवाओं ने जन-जीवन को झकझोरा,मरु महोत्सव में दर्शक दीर्घा का पांडाल हुआ क्षतिग्रस्त

जिले में मौसम ने पलटा खाते हुए जन-जीवन को झकझोर दिया। सोमवार को जैसलमेर मुख्यालय पर 28 किलो मीटर प्रतिघंटा की गति से चली आंधी ने देखते ही देखते चारों तरफ रेत की चादर बिछा दी। इसका सबसे ज्यादा असर जैसलमेर के डेडानसर मैदान में आयोजित मरु महोत्सव के दूसरे दिन के प्रात:कालीन सत्र पर दिखाई दिया। वहां अंधड़ का प्रभाव इतना ज्यादा था कि दर्शकों की बैठक के लिए बनाए गए पांडाल का टेंट क्षतिग्रस्त हो गया और आखिर में कुछपोल भी टेढ़े हो गए।
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28 किमी घंटा की रफ्तार से चली हवाओं ने जन-जीवन को झकझोरा,मरु महोत्सव में दर्शक दीर्घा का पांडाल हुआ क्षतिग्रस्त

जैसलमेर. जिले में मौसम ने पलटा खाते हुए जन-जीवन को झकझोर दिया। सोमवार को जैसलमेर मुख्यालय पर 28 किलो मीटर प्रतिघंटा की गति से चली आंधी ने देखते ही देखते चारों तरफ रेत की चादर बिछा दी। इसका सबसे ज्यादा असर जैसलमेर के डेडानसर मैदान में आयोजित मरु महोत्सव के दूसरे दिन के प्रात:कालीन सत्र पर दिखाई दिया। वहां अंधड़ का प्रभाव इतना ज्यादा था कि दर्शकों की बैठक के लिए बनाए गए पांडाल का टेंट क्षतिग्रस्त हो गया और आखिर में कुछपोल भी टेढ़े हो गए। हालांकि इससे किसी तरह की दुर्घटना घटित नहीं हुई, लेकिन मरु महोत्सव के रंग में भंग अवश्य पड़ गया। जिले के अन्य कस्बों व ग्रामीण अंचलों में भी तेज रफ्तार हवाओं ने सामान्य जन-जीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया। शाम को हवा की गति में कमी आई और रेत भी उडऩा बंद हो गई जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली।
उड़ती धूल ने हैरान किया
डेडानसर मैदान में मरु महोत्सव के अंतर्गत दूसरे दिन आयोजित प्रतियोगिताओं के प्रतिभागियों के साथ रेगिस्तान का जहाज कहलाने वाले ऊंटों तक को परेशान कर दिया। दर्शक दीर्घाओं में बैठे देसी-विदेशी सैलानियों के साथ अतिथियों को भी सिर तथा मुंह को कई बार छिपाने की नौबत आ गई, जबकि मैदान में आयोजन स्थल के इर्द-गिर्द खड़े लोगों व कैमरामैनों का तो वहां टिके रहना मुश्किल हो गया। मैदान में रह-रहकर रेत का बवंडर उठता नजर आया, जिसके चलते वहां प्रतियोगिताएं करवाना कठिन हो गया। केमल पोलो मैच को निर्धारित समय से पहले खत्म करवा दिया गया क्योंकि हवा के दबाव से गेंद अपनी दिशा बदल रही थी। ऐसे ही जल्दी के प्रयास में दंगल के साथ कबड्डी के मैच भी करवाए गए।
फतेहगढ़. उपखंड मुख्यालय सहित आसपास के विभिन्न गांवों व ढाणियों में सोमवार को दिन-भर तेज आंधी चलने से जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। सोमवार को सुबह से आंधी शुरू होने से ग्रामीणों को परेशान होना पड़ा। आंधी से घरों व दुकानों में रेत की परतें जमा होने लगी, ऐसे में गृहणियों व दुकानदारों को मशक्कत करनी पड़ी। दिन भर तेज धूल भरी आंधी के कारण कृृषि नलकूपों में खड़ी जीरे व इसबगोल की फसलें खराब होने की चिंता किसानों को सताए जा रही हैं। सोमवार को दिन भर तेज आंधी के कारण वाहन चालकों को परेशान होना पड़ा।
मोहनगढ़. क्षेत्र में रविवार को दिन भर बादलों के छाए रहने के बाद सायं काल के समय सर्दी में इजाफा हो गया, वहीं सोमवार सुबह हल्की ठंड का दौर जारी रहा। इसके साथ ही सबह 9 बजे के करीब धूप के खेलने से सर्दी का असर कम हो गया। सुबह 10 बजे के बाद से ही मोहनगढ़ क्षेत्र में तेज हवाएं चलनी शुरू हो गई, वहीं दोपहर तक तेज हवाओं के साथ रेत उड़ती नजर आई। रेत की वजह से काफी दूरी तक कुछ दिखाई भी नहीं दे रहा था। तेज हवाओं के साथ रेत के उडऩे से ग्रामीण जन-जीवन प्रभावित नजर आया। घरों एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रेत की चादर जमी नजर आई, वहीं नहरी क्षेत्र में खड़ी फसलों को नुकसान होने की चिंता किसानों को सताने लगी है। तेज हवाओं की वजह से खेत में खड़ी फसलों के फूल झडऩे लगे है, जो किसानों के लिए काफी परेशानी का सबब बने हुए है।
डाबला. क्षेत्र में सोमवार को भी आंधी का दौर जारी रहाद्य किसानों की मुह आया निवाला छीनने की कगार पर हैद्य एकाएक हुए मौसम परिवर्तन में ग्रामीणों क्षेत्रोमें धूल भरी ऑन्धी चलने से फसलो को काफी नुकसान की संभावना जताई जा रही हैद्य वहीं शाम के समय डाबला सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रो मे विद्युत व्यवस्था भी लडखड़़ा गईद्य जो सुबह 10रू00 बजे के बाद बहाल हुई द्य बडोडागांव निवासी तनसिंह भाटी वह आशायच निवासी कवराज सिंह भाटी ने बताया कि किसानों को अभी तक फसली ऋण माफी का फायदा भी नहीं मिला ऊपर से आंधियों के कारण मुंह आया निवाला छिनने को है जीरे की फसल में नुकसान की संभावना जताई जा रही है वहीं केंद्रीय विद्यालय में खड़े वाहनो के पास रात भर आंधी चलने से रेत ही रेत जमा हो गई।