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यहां है राजस्थान की सबसे बड़ी लाईब्रेरी: जमीन के नीचे बनी, 8 लाख किताबें मौजूद, 5000 लोग एक साथ बैठ सकते

World Book Day Special : किताबों का यह संसार आपको अलग ही दुनिया में ले जाता है, हर साल यहां करीब पचास लाख से ज्यादा लोग पढ़ने आते हैं।

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Bhadaria Underground Library Jaisalmer, pic

Bhadaria Underground Library Jaisalmer pic

Bhadaria Underground Library Jaisalmer: अल्बर्ट आइंस्टीन ने एक बार कहा था… केवल एक चीज जो आपको पता होनी चाहिए, वह है लाइब्रेरी का एड्रेस।… आज विश्व पुस्तक दिवस है और इस मौके पर हम आपको ले चलते हैं राजस्थान के रेतीले इलाके जैसलमेर में, जहां जमीन के 16 फीट नीचे ज्ञान का एक अद्भुत समंदर छिपा है। यह है एशिया की सबसे बड़ी अंडरग्राउंड लाइब्रेरी, नाम है भादरिया लाइब्रेरी। किताबों का यह संसार आपको अलग ही दुनिया में ले जाता है, हर साल यहां करीब पचास लाख से ज्यादा लोग पढ़ने आते हैं।

तपस्या से जन्मा ज्ञान का यह संसार

दरअसल जैसलमेर और पोकरण के बीच स्थित भादरिया राय माता मंदिर के नीचे बनी इस लाइब्रेरी की कहानी किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती है। इसे करीब 45 साल पहले संत हरवंश सिंह निर्मल, जिन्हें लोग भादरिया महाराज के नाम से जानते थे… ने बनवाया था। कहा जाता है कि महाराज ने मंदिर के पास एक कमरे में 9 साल तक कठिन तपस्या की और इस दौरान उन्होंने हजारों किताबें पढ़ीं। उनका सपना था कि इस दूरस्थ इलाके में शिक्षा की ज्योत जले। इसी विजन के साथ 21 अप्रैल 1981 को इसकी नींव रखी गई थी।

8 लाख से ज्यादा किताबों का अनमोल खजाना

इस लाइब्रेरी में वर्तमान में करीब 8 लाख से ज्यादा किताबों का संग्रह है, जिनकी अनुमानित कीमत 16 करोड़ रुपये से अधिक है। यहाँ सिर्फ किताबें नहीं, बल्कि दुनिया भर से लाए गए दुर्लभ ग्रंथ, हजारों साल पुरानी पांडुलिपियां और देश के हर प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के ऐतिहासिक भाषणों का संकलन मौजूद है। लाइब्रेरी में 7 धर्मों का संपूर्ण साहित्य, वेद, पुराण, स्मृतियां, उपनिषद और आयुर्वेद जैसे विषयों का विशाल भंडार है।

5000 लोगों के बैठने की क्षमता

इस लाइब्रेरी की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ एक साथ 5,000 से ज्यादा लोग बैठकर अध्ययन कर सकते हैं। कुल 562 विशाल अलमारियों में किताबों को विषयवार सजाया गया है। रेगिस्तान की भीषण गर्मी का असर यहाँ बिल्कुल नहीं होता, क्योंकि जमीन के नीचे होने के कारण यहाँ का तापमान प्राकृतिक रूप से स्थिर और सुखद रहता है। देखभाल करने के लिए करीब एक सौ पचास लोगों का स्टाफ यहां रखा गया है।

विशेष लेप से संरक्षण

इतनी बड़ी संख्या में किताबों को सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है। इसके लिए जगदंबा सेवा समिति के सदस्य हर 5 से 6 महीने में किताबों और अलमारियों की सफाई करते हैं। किताबों को दीमक और नमी से बचाने के लिए एक विशेष प्रकार के लेप और पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। आज के डिजिटल दौर में जहाँ लोग मोबाइल और किंडल की ओर भाग रहे हैं… भादरिया की यह लाइब्रेरी उन लोगों के लिए जन्नत है जो आज भी पन्नों को पलटकर ज्ञान हासिल करने की अहमियत समझते हैं।