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यूपी चुनाव: बसपा ने आशीष पांडेय को बनाया पहला प्रत्याशी, क्या है इसका राजनीतिक संदेश?

आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बसपा पार्टी ने जिले की माधौगढ़ सीट से अपना कैंडिडेट चुनावी मैदान में उतार दिया है। पार्टी से कैंडिडेट के ऐलान होने के कारण यहां के समीकरण बदलने लगे हैं। 2022 की चुनावी हार को बसपा अब 2027 में जीत में बदलने का प्रयास कर रही है।

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जालौन

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Aman Pandey

Feb 25, 2026

UP news

जालौन की माधौगढ़ सीट से बसपा ने आशीष पांडेय प्रत्याशी घोषित घोषित किया प्रत्याशी किया है।

लगातार ब्राह्मणों के सम्मान की बात कर रही बसपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सबसे पहले ब्राह्मण प्रत्याशी की घोषणा की है। मंगलवार को पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जालौन की माधौगढ़ सीट के लिए आशीष पांडेय को प्रभारी घोषित किया है। सूत्रों के मुताबिक, होली के बाद कानपुर मंडल की पांच और विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की घोषणा करने की तैयारी है।

माधौगढ़ से बसपा का शंखनाद

दरअसल, 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव की तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी कड़ी में मंगलवार को बसपा ने जालौन जिले की माधौगढ़ सीट से अपना कैंडिडेट का ऐलान कर चुनाव का शंखनाद कर दिया है।

चुनावी बढ़त लेने की कोशिश

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बसपा अक्सर उम्मीदवारों की घोषणा में देरी करती रही है, लेकिन इस बार समय से पहले नाम घोषित कर पार्टी जमीनी तैयारी मजबूत करना चाहती है। वहीं, आशीष पांडेय का नाम आगे कर बसपा एक बार फिर “ब्राह्मण + मुस्लिम + दलित” सामाजिक समीकरण को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।

बीजेपी की मजबूत सीट पर बसपा की नजर

अगर बात 2017 के चुनावों की करें तो मुकाबला बेहद रोमांचक रहा था। शुरुआती चुनाव प्रचार में भाजपा के विधायक मूलचंद निरंजन का विरोध देखा गया, लेकिन राजनीति की बाजी इस कदर पलटी मारी कि बसपा की कैंडिडेट फिसलकर दूसरे नंबर पर आ गईं। चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक, माधौगढ़ सीट पर वोटों की गिनती के बाद बीजेपी के मूलचंद्र निरंजन ने 34,974 वोटों से जीत हासिल की थी, जबकि शुरुआती रुझान में आगे रहने वाली बसपा की शीतल कुशवाहा दूसरे स्थान पर रही थीं। मूल चंद्र सिंह को कुल 1,05,231 वोट मिले थे, जबकि शीतल कुशवाहा 70,257 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रही थीं। वहीं, सपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह 63,035 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे।

माधौगढ़ सीट पर दिलचस्प है बसपा का मुकाबला

जिले की माधौगढ़ सीट पर विधानसभा चुनाव हमेशा से दिलचस्प रहा है। यहां की सीट बसपा के लिए खास रही है। यहां पर आजादी के कुछ साल बाद 1962 से 1985 तक कांग्रेस का कब्जा रहा। रियासती घरानों का रसूख कम होने के बाद यहां हाथी ने दौड़ना शुरू कर दिया। 1989 में कांग्रेस प्रत्याशी राजा राजेंद्र शाह को हराकर बसपा से शिवराम कुशवाहा ने जीत दर्ज की। तब से बसपा पार्टी का ऐसा जनाधार बढ़ा कि अन्य पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं। यही वजह रही वर्ष 1989, 1993, 2002, 2007, 2012 में बसपा का विधायक चुना गया।