सूटकेस में चल रहा भवातड़ा सोसायटी का कार्यालय

सूटकेस में चल रहा भवातड़ा सोसायटी का कार्यालय
सूटकेस में चल रहा भवातड़ा सोसायटी का कार्यालय

Dharmendra Ramawat | Updated: 18 Aug 2018, 11:09:00 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

सहकारी समिति के पास ना कार्यालय ना गोदाम

चितलवाना. सहकारी समिति की ओर से भले ही 'सब एक के लिए, एक सब के लिएÓ का नारा दिया जा रहा है, लेकिन भवातड़ा सोसायटी में सब एक के पास का नारा ही चल रहा है। समिति के पास ना तो खुद का कार्यालय है और ना ही गोदाम। ऐसे में व्यवस्थापक सारे कागजात एक सूटकेस में ही बंद रखता है। जानकारी के अनुसार भवातड़ा सहकारी समिति को बने कई साल बीत चुके हैं। इसके बावजूद प्रबंधन कमेटी किसानों को समय पर ऋण देने की बात तो दूर खुद का कार्यालय तक नहीं खोल सकी है। ऐसे में समिति के जरूरी कागजात व्यवस्थापक के सूटकेस में ही बंद रहते हैं। ऐसे में यहां व्यवस्थापक की मनमर्जी के अनुसार ही काम चल रहा है।
फोन बंद हुआ तो समिति को ताला
भवातड़ा सहकारी समिति का कार्यालय नहीं होने के अलावा यहां कार्यरत व्यवस्थापक की ही मनमर्जी चलती है। वे जहां भी फोन शुरू करते हैं, समिति का काम काज वहीं शुरू हो जाता और फोन बंद हो जाए तो मानो कार्यालय को ताला लग गया है। ऐसे में ग्रामीणों को हर समय व्यवस्थापक के इशारों पर ही कामकाज निपटाने पड़ते हैं।
जिसको मिलना है वो पहले फोन करे
सहकारी समिति भले ही किसानों के लिए बनाई गई है, लेकिन भवातड़ा समिति में किसानों का कोई हित होता नहीं दिख रहा है। किसानों को समिति से ऋण लेना है तो पहले व्यवस्थापक से फोन पर सम्पर्क करना पड़ता है।इसके बाद ही ऋण की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
इनका कहना...
भवातड़ा सहकारी समिति का कोई कार्यालय नहीं है। व्यवस्थापक खुद ही अपने पास रिकार्ड रखते हैं। रिकॉर्ड व व्यवस्थापक का कोई अता पता नहीं रहता है।
- वागसिंह, अध्यक्ष, भवातड़ा सहकारी समिति

किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी
चितलवाना. भवातड़ा सहकारी समिति के व्यवस्थापक की ओर से मनमर्जी के चलते रिकॉर्ड गायब करने व बीमा क्लेम की राशि का गबन करने के मामले को लेकर जोरादर ग्राम पंचायत व खेजडिय़ाली के किसानों का धरना दूसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। किसानों ने बताया कि व्यवस्थापक गणपतलाल विश्नोई की ओर से वर्ष 2014, 2015 व 2016 की बीमा क्लेम राशि किसानों के खातों से हड़प ली। वहीं किसानों की ऋण माफी भी हड़पने के लिए रिकॉर्ड गायब कर दिया। किसानों की पास बुक व चैक बुक भी अपने पास ही रखकर किसानों के खातों से गबन किया गया है। अब मामला उजागर होने पर किसानों को रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। किसानों ने बताया कि बैंक के प्रबंध निदेशक को भी लिखित में देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर ेवे मजबूरन धरने पर बैठे हैं। किसानों ने मांगें नहीं मानने तक धरना जारी रखने की बात कही।

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