
Complaint about the G schedule base working in Jalore
जालोर. नून-नरपुरा के बीच निर्माणाधीन डामर सड़क कार्य में जालोर पीडब्ल्यूडी एईएन निगरानी कर रहे हैं, लेकिन इस पदाधिकारी को जी शैड्यूल के बारे में जानकारी नहीं है। मामला इसलिए खास है कि ग्रामीणों की ओर से जी शैड्यूल के अनुसार काम नहीं होने की शिकायत की थी।
जब एईएन अनिल माथुर से जी शैड्यूल के बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने इस बारे में इनकार कर दिया। खास बात यह है कि यही अधिकारी इस कार्य की निगरानी कर रहा है और ग्रामीणों का आरोप है कि नून-नरपड़ा के बीच बन रही 3 किमी सड़क निर्माण कार्य में विभागीय अधिकारी ठेकेदार के बचाव का कार्य कर रहा हैं।साथ ही ग्रामीणों की ओर से निर्माण कार्य की क्वालिटी को लेकर की गई शिकायतों को दरकिनार करते हुए इस कार्य को संतोषजनक बताया जा रहा हैं।
तर्क समझ से परे
मार्ग में कई स्थानों पर दीवारों का निर्माण कार्य चल रहा है और इसमें सीमेंट में मिट्टी मिलाने की बात स्वयं अधिकारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे क्वालिटी पर कोई असर नहीं पड़ता। अब सवाल यह उठता है कि यदि मिट्टी मिलाने से सीमेंट में मजबूती कायम रहती है तो अब तक के पुराने निर्माण कार्यों में केवल बजरी का उपयोग ही क्यों किया गया।
ये है जी शैड्यूल
ठेकेदार द्वारा किसी निर्माण कार्य का कांट्रेक्ट करने पर एक एस्टीमेट तैयार होता है, जिसमें पूरे कार्य का विवरण और उसमें उपयोग में आने वाली सामग्री का विस्तृत विवरण होता है। जिसके बाद इसी एस्टीमेट के अनुसार पूरे कार्य को करना और उसी के अनुसार कार्य की गुणवत्ता को बनाए रखना होता है।साथ ही उसमें दर्ज क्वालिटी वाली सामग्री का उपयोग किया जाता है। नरपुरा के ग्रामीणों ने ठेकेदार द्वारा जी शैड्यूल के अनुसार कार्य नहीं होने की शिकायत ही दर्ज करवाई थी, लेकिन मामले में अधिकारी ने मौन धारण करते हुए संबंधित ठेकेदार का बचाव भी किया है।
रामभरोसे काम
यह काम जोधपुर की एजेंसी ने लिया है और कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने संपर्क पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज करवाई। मामले में खास बात यह है कि एक तरफ अधिकारी लगातार निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संबंधित ठेकेदार भी जोधपुर बैठा है, जिसके कारण निर्माण कार्य की निगरानी तक नहीं हो पा रही है।
ये सवाल अहम
- मिट्टी से मजबूती मिल रही है तो पूर्व के सभी निर्माण कार्यों में बजरी की उपयोगिता क्यों थी
- कंकरीट पर मुरड़ बिछा कर पानी के छिड़काव के बाद रोलर घुमाया जाता है, लेकिन यहां मुरड़ नहीं के बराबर क्यों बिछा
- कुछ हिस्से को छोड़कर मुरड़ के स्थान पर झीकरा बिछाया गया भविष्य में सड़क निर्माण के बाद मजबूती पर सवाल
- बजरी के स्थान पर मिट्टी का उपयोग, क्वालिटी पर सवालिया निशान
इनका कहना
नून-नरपड़ा के बीच काम सही तरीके से चल रहा है। मैंने इसका अवलोकन किया है। जी-शैड्यूल क्या है अभी मैं नहीं बता सकता।
- अनिल माथुर, एईएन, पीडब्ल्यूडी, जालोर
Published on:
12 Aug 2018 11:50 am
