ठेकेदारों की दगाबाजी में आबकारी बंदोबस्त को लगा झटका

शराब व्यवसाय में मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद में आए ठेकेदारों की किस्मत दगा दे गई। इनकी किस्मत के कनेक्शन ने आबकारी बंदोबस्त को भी एक तरह से झटका दे दिया। जिले में सौ फीसदी बंदोबस्त होने के बावजूद नए वित्तीय वर्ष में पांच समूह बंद ही रह गए

By: Jitesh kumar Rawal

Published: 04 Apr 2019, 02:55 PM IST

जीतेश रावल @ जालोर. शराब व्यवसाय में मोटा मुनाफा कमाने की उम्मीद में आए ठेकेदारों की किस्मत दगा दे गई। इनकी किस्मत के कनेक्शन ने आबकारी बंदोबस्त को भी एक तरह से झटका दे दिया। जिले में सौ फीसदी बंदोबस्त होने के बावजूद नए वित्तीय वर्ष में पांच समूह बंद ही रह गए। ठेकेदारों ने लॉटरी में अपना नाम आते ही कुछ राशि भी जमा करवा रखी थी, लेकिन बाद में हाथ खड़े कर दिए। माना जा रहा है कि इन समूहों की कम्पोजिट फीस भारी-भरकम है तथा इस राशि का चुकारा इन ठेकेदारों के बस का नहीं था। ऐसे में कम्पोजिट फीस जमा कराने के नाम पर भाग खड़े हुए। इन समूहों को संचालित करने के लिए आबकारी को अब वापस बंदोबस्त करना पड़ेगा। ठेकेदारों को लुभाने के लिए लगभग पंद्रह फीसदी तक रियायत भी दी जा रही है। यह छूट शहरी क्षेत्र से सटे एक समूह के अलावा अन्य चार पर लागू रहेगी।
धामसीन ने दो बार दगा दिया
नारणावास व धामसीन के लिए बंदोबस्त के बाद वापस एक प्रक्रिया की गई। इसके तहत वापस आवेदन जमा हुए। नारणावास के लिए एक ही आवेदन आया, जिसे आवंटित कर दिया। धामसीन के लिए आवेदन जमा कराने वाले आवेदक ने समूह आवंटित होते ही वार्षिक फीस का कुछ हिस्सा भी जमा करवा दिया, लेकिन कम्पोजिट फीस का आंकड़ा सुनकर हाथ खड़े कर दिए। नए वित्तीय वर्ष में दुकानों का संचालन करना शुरू किया तो पता चला इस तरह के कुल पांच समूह है, जिनके लिए कोई आवेदन फीस जमा करवाने नहीं आया।
वापस करना होगा बंदोबस्त
नए वित्तीय वर्ष में सभी ठेके शुरू होने हैं, लेकिन कुछ समूह रह गए। इनको जल्द ही आवंटित करना होगा। विभागीय स्तर पर इसकी कवायद शुरू हो चुकी है। इसी सप्ताह में इनके लिए आवेदन जमा करने एवं लॉटरी निकालने की प्रक्रिया की जाएगी, ताकि राजस्व अर्जित किया जा सके। आवेदनों की संख्या एक ही होने पर समूह स्वत: ही आवंटित माना जाएगा, लेकिन एक से अधिक आवेदन जमा होने पर लॉटरी की जाएगी।
रियायत से उठाव की उम्मीद
वार्षिक राशि में करीब पंद्रह फीसदी तक रियायत देने से ठेकेदारों में रुचि बढ़ेगी। प्रावधान के तहत इन समूहों के लिए कम्पोजिट फीस में पंद्रह फीसदी व देसी शराब की गारंटी में भी पंद्रह फीसदी तक छूट दी जा रही है। रियायत को देखते हुए इन समूहों का उठाव होने की उम्मीद है। हालांकि शहरी क्षेत्र से सटे रेवत के लिए कम्पोजिट फीस में कोई रियायत नहीं दी है, लेकिन गारंटी में यहां भी छूट दी है।
हिस्सा चाहते थे पर कोई आया नहीं
पहले ही पायदान पर दो समूहों ने आबकारी विभाग को झटका दिया था। नारणावास व धामसीन में सफल रहे आवेदकों ने राशि जमा कराने में रुचि नहीं ली। इसके बाद रिजर्व रखे गए आवेदकों को आमंत्रित किया, लेकिन वे भी नहीं आए। उनका कहना रहा कि वे अपना हिस्सा लेकर किसी अन्य को चलाने के लिए दुकान देना चाहते थे, लेकिन उनके पास कोई आया ही नहीं। नए वित्तीय वर्ष में पड़त रह गए समूहों के लिए भी कमोबेश यही स्थिति सामने आई।

यह है स्थिति
जालोर सर्किल के रेवत, भीनमाल में धामसीन, रतनपुर-मारूवाड़ा, कुडा व सांचौर सर्किल के गोलासन समूह का उठाव नहीं हो पाया। पड़त रह जाने से आबकारी महकमा वापस इनका बंदोबस्त करने में जुट गया है।
पहले भी रह गए थे
गत वर्ष सोलह प्रतिशत आवेदन शुल्क जमा कर दुकानों व समूहों का नवीनीकरण किया गया था, लेकिन उस समय भी तीन समूह पड़त रह गए थे। इसमें नारणावास, रतनपुर व करडा शामिल थे। बाद में इनका वापस बंदोबस्त किया गया।
आवेदन लिए जाएंगे...
बंदोबस्त सौ फीसदी हुआ था, लेकिन नए वर्ष में इन समूहों का उठाव नहीं हो पाया। ऐसे में अब वापस आवेदन लिए जाएंगे। इन समूहों के लिए गारंटी व कम्पोजिट फीस में रियायत दी जा रही हैै।
- विनोद वैष्णव, जिला आबकारी अधिकारी, जालोर
पूर्ववत रहेगी प्रक्रिया...
आवेदन जमा करने की प्रक्रिया पूर्ववत ही रहेगी। इसके लिए ऑनलाइन ही आवेदन जमा होंगे तथा एक से अधिक आवेदन जमा होने पर समूहों का आवंटन लॉटरी से किया जाएगा।
- ईश्वरसिंह चौहान, आबकारी निरीक्षक, जालोर

Jitesh kumar Rawal
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