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शराब दुकान की लॉटरी खुलने के बाद भी पड़ी रह गई ये दुकानें…

खरीदार नहीं मिला तो हाथ खड़े कर दिए, रिजर्व भी भागे
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Liquer lottery

Excise department jalore

जीतेश रावल
जालोर. शराब के ठेकों को बेच कर मोटा मुनाफा कमाने की चाह में गांठ के पैसे भी गंवाने पड़ गए। इन लोगों ने ठेकों के लिए आवेदन ही इसलिए किया था कि दुकान आवंटित हो गई तो किसी दूसरे को सौंपकर लाखों रुपए कमा लेंगे, लेकिन दुकान आवंटित होने के बाद खरीदार ही नहीं मिला। इस तरह के मामले एक नहीं बल्कि शराब के दो समूहों के लिए सामने आए हंै। निर्धारित समय पर राशि जमा नहीं होने पर आवेदकों की आवेदन राशि जब्त कर ली गई। सफल आवेदक के हाथ खड़े करने पर रिजर्व के रूप में रखे गए दो जनों से सम्पर्क किया गया, लेकिन इन दोनों ने भी दुकान रखने में असमर्थता जताई। ऐसे में इन दोनों समूहों को पड़त मान लिया गया। इसमें जालोर आबकारी सर्किल का नारणावास व भीनमाल सर्किल का धामसीन समूह शामिल है। प्रावधान के तहत आवंटित शराब के ठेकों की खरीद-फरोख्त करना गलत है, लेकिन लॉटरी से आवंटित होने वाली दुकानों व समूहों के लिए कई लोग आवेदन ही इसीलिए करते हैं कि ठेका आवंटित होगा तो किसी को बेच कर मोटा मुनाफा कमा लेंगे। हालांकि कम मुनाफे की दुकानें होने से अधिकतर लोग इसमें रुचि ही नहीं लेते, लेकिन कमाई के लालच में कुछ लोग इस तरह के समूहों में भी आवेदन जमा करवा देते हैं।
इसलिए निकालते हैं तीन पर्चियां
आबकारी में बंदोबस्त के तहत लॉटरी प्रक्रिया से समूहों का आवंटन किया जाता है। इसके तहत पहली पर्ची खुलने वाले को सफल आवेदक माना जाता है। उसे वह समूह आवंटित किया जाता है। इसके बाद अन्य दो जनों का रिजर्व प्रथम व रिजर्व द्वितीय के तौर पर चयन करते हैं, ताकि सफल आवेदक के नहीं आने पर रिजर्व रहने वाले आवेदकों को समूह आवंटित किया जा सके।
आवेदन में दिखाई रुचि पर दुकान में नहीं
नारणावास का समूह पहले भी पड़त रहा था। गत वर्ष दुकानों का आवंटन नवीनीकरण प्रक्रिया से किया गया था। इसके तहत दुकान संचालित करने वाले ठेकेदार ने इस दुकान में रुचि नहीं ली थी। इससे लॉटरी प्रक्रिया करनी पड़ी, लेकिन आवेदन चाहे जाने पर एक ही आवेदन आया। इस पर समूह स्वत: ही आवंटित मान लिया गया। इस बार आवेदकों ने रुचि लेते हुए आवेदन भी लगाए, लेकिन लॉटरी के बाद लेने में रुचि नहीं दिखाई।
छह में से एक भी आगे नहीं आया
नारणावास समूह के लिए कुल छह जनों ने आवेदन जमा कराए थे। इसी तरह धामसीन के लिए पांच जनों ने आवेदन जमा करवाए। दोनों समूहों के लिए लॉटरी से कुल छह पर्चियां निकाली गई, लेकिन इन सभी ने समूह लेने से इनकार कर दिया। धामसीन के तीनों सफल आवेदकों ने तो स्पष्ट रूप से कहा कि उनके पास कोई खरीदार नहीं आया है और पैसे नहीं है इसलिए समूह के लिए रुपए जमा कराने से असमर्थ है। नारणावास के सफल आवेदकों की भी कुछ ऐसी ही स्थिति सामने आई।
नहीं हो पाया रुपयों का इंतजाम
लॉटरी के बाद अगले तीन दिनों में सफल आवेदक को आठ फीसदी राशि जमा करवानी होती है, लेकिन इन आवेदकों के पास कोई खरीदार ही नहीं आया। इससे वे राशि जमा नहीं करवा पाए। इसके बाद रिजर्व चयनित आवेदकों से सम्पर्क किया गया, लेकिन इन आवेदकों ने भी हाथ खड़े कर दिए। बताया कि रुपयों का इंतजाम नहीं हो पाया। समय निकल जाने से इन समूहों का बंदोबस्त होने से रह गया।
सौदेबाजी में ठेका निरस्त करने के प्रावधान
शराब के ठेकों को बेचना या खरीदना नियमों के तहत गलत है। यमानुसार जिस आवेदक को ठेका आवंटित होता है वहीं इसका संचालन कर सकता है। किसी दूसरे को हस्तांतरित करने पर ठेका निरस्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
राशि जमा नहीं हुई...
धामसीन व नारणावास के समूह आवंटित हो गए थे, लेकिन सफल आवेदकों ने राशि जमा कराने में असमर्थता जताई। रिजर्व रहे आवेदकों ने भी मना कर दिया। अब इन समूहों के लिए वापस आवेदन मांगे जाएंगे।
- विनोद वैष्णव, जिला आबकारी अधिकारी, जालोर