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आबकारी के थानेदार: लक्ष्य पूर्ति में हीरो, बड़ी उपलब्धियों में जीरो

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आबकारी के थानेदार: लक्ष्य पूर्ति में हीरो, बड़ी उपलब्धियों में जीरो

थाना, नफरी और वाहन भी पर कार्रवाई में खाली हाथ, जिम्मेदारों की बेपरवाही में उद्देश्य से भटकी इपीएफ


जालोर. मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए गठित आबकारी निरोधक दल (इपीएफ) अपने उद्देश्यों में कामयाब नहीं हो पा रहा है। तस्करों की धरपकड़ के लिए खासतौर से गठित यह विंग जिम्मेदारों की बेपरवाही में नाकामी की भेंट चढ़ रही है। कहने को इस विंग को थाने, नफरी और अलग से वाहन तक मुहैया करवा रखे हैं, लेकिन नतीजा शून्य ही आ रहा है। लक्ष्यों की पूर्ति के लिए जरूर कुछ पव्वे या हथकढ़ी शराब बरामद कर ली जाती है, लेकिन भारी मात्रा में मादक पदार्थों की बरामदगी जैसी उपलब्धि इनके खाते में दर्ज नहीं है। आबकारी निरोधक दल में तैनात थानेदार और अन्य अधिकारी लक्ष्यों की पूर्ति में हीरो बने हुए हैं, लेकिन इनके खाते में बड़ी उपलब्धियां जीरो नजर आती है।


... फिर अस्थायी चौकियों से क्या उम्मीद
वैसे चुनाव के मद्देनजर आबकारी ने गुजरात सीमा पर चौकसी बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन यह कागजों में ही चल रहा है। वैसे आबकारी के थाने ही जब ताले में बंद रहते हैं तो अस्थायी चौकियों से कितनी उम्मीद लगा सकते हैं। बताया जा रहा है कि जालोर आबकारी थाने के कुछ सिपाहियों को बडग़ांव में चौकी के लिए प्रतिनियुक्त कर रखा है। सांचौर क्षेत्र में भी कुछ ऐसे ही आदेश हैं, लेकिन तस्करों को रोकने की इनके पास ठोस प्लानिंग तक नहीं है। यहां तक कि राउण्ड द क्लॉक गश्त करने में भी कोताही बरत रहे हैं।


फील्ड में दिखाने को दौड़ रहे वाहन
जालोर, सांचौर व भीनमाल क्षेत्र में निगरानी एवं कार्रवाई के लिए आबकारी निरोधक दल के थाने संचालित है। इन थानों की कमान संभालने के लिए एक-एक प्रहराधिकारी तक नियुक्त हैं, लेकिन इनकी कार्रवाई कुछ पव्वे या बोतलें पकडऩे तक ही सीमित है। कार्रवाई दिखाने के लिए विभागीय वाहन भी दौड़ रहे हैं। पूछने पर हर बार यहीं जवाब मिलता है कि टीम फील्ड में है, लेकिन आंकड़ों की खानपूर्ति के अलावा कोई बड़ी सफलता नहीं दिखा पाते।


इनके हाथ नहीं लगती बड़ी खेप
उधर, अन्य प्रदेशों में बेचने के लिए निर्मित शराब और अन्य मादक पदार्थ भी बेरोकटोक जालोर होते हुए गुजरात जा रहे हैं। पुलिस कार्रवाई में हरियाणा, अरुणाचलप्रदेश व पंजाब के लिए निर्मित शराब की खेप जालोर में कई बार पकड़ी जा चुकी है। हालांकि पुलिस इस तरह का माल पकड़ रही है, लेकिन ऐसी उपलब्धि के लिहाज से भी आबकारी के हाथ खाली ही नजर आ रहे हैं।


आंकड़ों की खानापूर्ति में जुटी इपीएफ
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए गठित आबकारी निरोधक दल लम्बे अर्से से महज आंकड़ों की खानापूर्ति में जुटा हुआ है। लिहाजा मादक पदार्थों की खेप बेरोकटोक गुजरात तक दस्तक दे रही है। अवैध कारोबार को रोकने या धरपकड़ करने की दिशा में इपीएफ कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। इसलिए न तो कोई बड़ा हाथ मारा जा रहा है और न ही तस्कर पकड़ में आ रहे हैं।