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Jalore News: राजकीय स्कूल की हिंदी व्याख्याता उर्मिला कुमारी फरार, गंभीर धाराओं में वांछित, निदेशक ने किया निलंबित

Jalore News: जालौर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेवड़ी (बागोड़ा) में पदस्थापित हिंदी साहित्य की व्याख्याता उर्मिला कुमारी को माध्यमिक शिक्षा के निदेशक ने निलंबित कर दिया है। उर्मिला कुमारी पुलिस थाना सिविल लाइन अजमेर में वांछित होकर फरार चल रही है।

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जालोर

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Arvind Rao

Jul 15, 2025

पंचायत सचिव का निलंबन आदेश जारी (photo source- Patrika)

पंचायत सचिव का निलंबन आदेश जारी (photo source- Patrika)

Jalore News: जालौर जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सेवड़ी (बागोड़ा) में कार्यरत हिंदी साहित्य की व्याख्याता उर्मिला कुमारी को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निदेशालय ने यह कार्रवाई राजस्थान असैनिक सेवाएं (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए की है।


बता दें कि उर्मिला कुमारी के खिलाफ पुलिस थाना सिविल लाइन, अजमेर में प्रकरण संख्या 101/2024 दर्ज है। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 419 (छल करके व्यक्ति को धोखा देना), 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 120बी (आपराधिक साजिश) के अलावा राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2022 की धारा 3(10) के तहत मामला दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उर्मिला कुमारी इस मामले में वांछित हैं और फरार चल रही हैं।


स्वैच्छिक रूप से अनुपस्थित


माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि उर्मिला कुमारी 17 मई 2024 से अपने कर्तव्य से स्वैच्छिक रूप से अनुपस्थित हैं। उन्होंने इसके लिए कोई पूर्व सूचना नहीं दी और न ही अवकाश स्वीकृत कराया। यह आचरण राजकीय सेवा नियमों के विरुद्ध है और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।


इन परिस्थितियों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने उनके विरुद्ध तत्काल प्रभाव से निलंबन का आदेश जारी किया। निलंबन अवधि में उर्मिला कुमारी का मुख्यालय माध्यमिक शिक्षा निदेशक कार्यालय बीकानेर रखा गया है।


शिक्षा विभाग ने क्या कहा


शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवक के विरुद्ध गंभीर आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज होने और उसके फरार रहने की स्थिति में यह कार्रवाई आवश्यक और अनुशासन बनाये रखने के लिए अनिवार्य है। निदेशालय ने यह भी कहा है कि मामले में आगे की विधिक प्रक्रिया पुलिस और न्यायालय के स्तर पर जारी रहेगी।