
Mandi Bhav: मंडार। रेवदर उपखण्ड क्षेत्र में इन दिनों खेतों में आलू, गेहूं, सौंफ व हरी सब्जियों के साथ ही पीला सोना यानी सरसों की फसल लहलहा रही है। पिछले एक सप्ताह से सर्दी बढ़ने से लहलहाती फसल से किसानों को बंपर पैदावार होने की उम्मीदें जागी है। वैसे यह फसल बुवाई के बाद ढाई से तीन में माह तैयार हो जाती है।
पिछले साल किसानों को सरसों के भाव बेहतर मिलने से इस बार उपखण्ड क्षेत्र में छह हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बुवाई की है। बुवाई के बाद समय पर सिंचाई होने तथा मौसम के साथ अनुकूल भूमि होने का फायदा भी किसानों को मिलेगा।
पिछले साल बाजार में सरसों के तेल के भाव पंद्रह किलो के दो हजार रुपए थे, जो बढ़कर साढ़े चौबीस सौ रुपए तक हो गए थे। वैसे वर्तमान में तेल के भाव पंद्रह किलो के 2280 रुपए हैं।
सहायक कृषि अधिकारी पूराराम चौहान ने बताया कि पिछले साल से इस बार अधिक व बंपर बुवाई हुई है। पूरे रेवदर उपखण्ड में लगभग छह हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बुवाई हुई है। जो जनवरी के अंत तथा फरवरी माह के शुरुआत में तैयार होगी।
दाम अच्छा मिलने से यह फसल किसानों की पहली पसंद हो गई है। उपखंड में आज भी किसानों के अलावा ग्रामीण भी सरसों खरीदकर घाणों में जाकर तेल निकलवाते हैं। जिसे वे शुद्ध तेल मानते हैं। बाजार से खरीदना अच्छा नहीं समझते हैं। ऐसे घाणे कई गांवों में लगे है। कई लोग आटा चक्की के साथ घाणे चलाते हैं। जो सरसों के अलावा तिल का तेल भी निकालते हैं।
किसान तथा व्यापारी कांतिलाल माली ने बताया कि पिछले साल सरसों के भाव अच्छा मिलने से किसानों को फायदा हुआ था। बाजार में भी तेल के भाव बढ़े थे। कई किसानों ने आलू की जगह सरसों की बुवाई की है।
किसान दिनेश कुमार चौधरी ने बताया इस बार भी सरसों की बंपर बुवाई की है। पिछले साल की तरह इस बार भी किसानों को मंडियों में अच्छा भाव मिलने के आसार है।
Updated on:
22 Dec 2024 06:55 pm
Published on:
22 Dec 2024 06:46 pm
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