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Moringa Cultivation: राजस्थान के जालोर जिले में कृषि अनुसंधान केन्द्र (केवीके) की ओर से दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन के बाद सहजन यानी मोरिंगा की खेती को लेकर किसानों में जागरूकता बढ़ी है।
सायला, जालोर, बागोड़ा व भीनमाल के अलावा बाड़मेर और गुड़ामालानी क्षेत्र के कई गांवों में अब सहजन के बगीचे नजर आने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जालोर की जलवायु और मिट्टी सहजन की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है, जिससे कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव हो रहा है।
कृषि अनुसंधान केन्द्र केशवना जालोर के जोनल डायरेक्टर रिसर्च डॉ. दिलीप कुमार के मार्गदर्शन में किसानों को सहजन की उन्नत किस्मों, रोपाई की विधि, सिंचाई प्रबंधन, पोषक तत्व प्रबंधन और कीट-रोग नियंत्रण की जानकारी दी गई।
इसके बाद किसानों ने परंपरागत फसलों के साथ-साथ सहजन को भी अपनाना शुरू किया। सहजन की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी में भी अच्छी उपज देता है और सूखा सहन करने की क्षमता रखता है, जो जालोर जैसे क्षेत्र के लिए काफी उपयुक्त है।
सहजन की फलियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं और सब्जी के रूप में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। इन फलियों से बनने वाली सब्जी की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं। इसके अलावा सहजन की पत्तियां भी अत्यंत उपयोगी हैं।
पत्तियों को सुखाकर बनाए जाने वाले पाउडर का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं, पोषण आहार और स्वास्थ्य उत्पादों में किया जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे इसकी मांग शहरी बाजारों तक पहुंच रही है।
किसानों का कहना है कि सहजन की खेती से उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला है। एक बार पौधा लगने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है, जिससे बार-बार बुवाई की जरूरत नहीं पड़ती। साथ ही मजदूरी और रखरखाव की लागत भी अपेक्षाकृत कम है। कुछ किसानों ने बताया कि सब्जी मंडी के अलावा स्थानीय स्तर पर भी सहजन की फलियों और पत्तियों की अच्छी खपत हो रही है।
पहले सहजन की खेती को लेकर जागरूकता की कमी थी। अब अन्य किसानों के साथ क्षेत्र में सहजन की खेती कर रहे है। यहां की जलवायु सहजन के लिए उपयुक्त है।
सहजन की खेती से अब अच्छी आय हो रही है। यहां की सहजन प्रदेश के बड़े शहरों के साथ अहमदाबाद, मुम्बई, नासिक, बैंगलोर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंच रही है।
जिले में सहजन की खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आने वाले समय में यदि किसानों को प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन की सुविधाएं मिलें, तो यह फसल जालोर जिले के किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। कृषि अनुसंधान केन्द्र की पहल से शुरू हुई यह जागरूकता अब हरित और पोषक खेती की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो रही है।
Updated on:
04 Jan 2026 05:44 pm
Published on:
04 Jan 2026 05:43 pm
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