पुरानी सम्भल नहीं रही, वंचित इलाकों में 10 साल से सीवरेज की नई लाइन का इंतजार

पुरानी सम्भल नहीं रही, वंचित इलाकों में 10 साल से सीवरेज की नई लाइन का इंतजार
Sewerage facility in Jalore Nagar parishad

Dharmendra Ramawat | Updated: 07 Jun 2018, 10:19:30 AM (IST) Jalore, Rajasthan, India

आज होने वाली नगरपरिषद की आवश्यक बैठक के एजेंडे में शामिल ही नहीं मुद्दा

फैक्ट फाइल
पहले चरण में बिछी थी 52 किमी लाइन
15 करोड़ रुपए खर्च हुए थे पहले चरण में
- शहर में बिछानी थी कुल 90 किमी सीवरेज लाइन
- वर्ष 2007 में शुरू हुआ था पहले चरण का काम
जालोर. नगरपरिषद क्षेत्र में करीब दस साल पहले बिछाई गई सीवरेज लाइनें नगरपरिषद कार्मिकों से सम्भल ही नहीं पा रही हैं। कहीं छोटे पाइप तो कहीं लीकेज की समस्या के कारण बार-बार ये लाइनें चॉक हो रही हैं। जिससे शहर की मुख्य सड़कों पर आए दिन शहर की गंदगी बहती रहती है। शहर के बीचो बीच स्थित हरिदेव जोशी सर्किल पर हर दूसरे से तीसरे दिन यह नजारा आसानी से देखने को मिल जाता है। ऐसे में पुरानी लाइनों को दुरुस्त करना तो दूर सीवरेज से वंचित शहर की आधी कॉलोनियों में इसके लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। हालांकि सीवरेज की डीपीआर को लेकर नगरपरिषद की ओर से टेंडर जारी किए गए और इसके बाद शहर की आधी कॉलोनियों में सीवरेज के लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक इसकी डीपीआर नहीं बन पाई है। ऐसे में आधे शहरवासियों को आज भी सीवरेज सुविधा का इंतजार है।
बैठक के एजेंडे में शामिल तक नहीं
खास बात तो यह है कि गुरुवार को नगरपरिषद सभागार में आवश्यक बैठक रखी गई है। इस बैठक के आयोजन के लिए सभापति माली ने आयुक्त को यूओ नोट जारी किया और इसके बाद यह बैठक बुलाई गई, लेकिन इस बैठक के एजेंडे में भी शहर की सबसे ज्वलंत समस्या 'सीवरेजÓ का मुद्दा शामिल ही नहीं किया गया है।
ये रखा बैठक का एजेंडा
नगरपरिषद सभापति भंवरलाल माली की अध्यक्षता में रखी गई इस अति आवश्यक बैठक के एजेंडे में कुल 5 बिंदू रखे गए हैं। इनमें सुंदेलाव तालाब के सौंदर्यकरण व विकास के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने, कांजी हाउस के लिए प्रस्ताव, जल स्वावलम्बन के कार्यों की समीक्षा व विचार-विमर्श, नगरपरिषद के विभिन्न पार्कों को गोद देने के प्रस्ताव और अंतिम मुद्दा लेटा ग्राम पंचायत की ओर से जारी पट्टों के नियमन का रखा गया है।
8 करोड़ का बजट, दस साल से इंतजार
शहर के वंचित इलाकों में सीवरेज सुविधा को लेकर नगरपरिषद के पास करीब 8 करोड़ का बजट पहले से ही उपलब्ध है, लेकिन दस साल बाद भी इसका उपयोग नहीं हो पाया है। ऐसे में अब महंगाई के चलते इसका बजट और भी बढ़ जाएगा। पहले चरण में शहर के भीतरी भागों और कुछ कॉलोनियों में करीब 52 किमी सीवरेज पाइपलाइन बिछाई गई और इसके लिए परिषद ने 11 करोड़ का बजट तय किया था। महंगाई के कारण यह बजट बाद में 15 करोड़ तक पहुंचा। ऐसे में अब दूसरे चरण के तहत शहर के वंचित इलाकों व नई बस चुकी कॉलोनियों में इसका बजट कई गुना बढ़ जाएगा।
दूसरे चरण में 50 किमी बिछेगी लाइन
पहले चरण के लिए विभाग की ओर से ठेकेदार को करीब 47 किमी सीवरेज लाइन बिछाने का काम दिया गया था, बजट व एरिया को देखते हुए यह कार्य 52 किमी तक किया गया। अब शुरू हुए सर्वे में वंचित कॉलोनियों और नई बसाई गई कॉलोनियों में करीब 45 से 50 किमी लाइन बिछाई जाएगी।
पहले चरण में छोड़ा था लो-लेवल एरिया
शहर में दोनों चरणों के तहत करीब 90 किमी सीवरेज पाइपलाइन बिछाई जानी थी। पहले चरण में लो-लेवल इलाके को छोड़ा गया था। इसकी मुख्य वजह यह थी कि शहर की कई कॉलोनियां सीवरेज के लेवल से काफी नीचे थी। इस कारण अब दूसरे चरण के तहत इसका सर्वे फिर किया गया है। पहले चरण का काम वर्ष वर्ष 2007 में शुरू किया गया था और 10 साल बाद यानी जून 2018 तक भी दूसरे चरण का काम शुरूनहीं हो पाया है।
दूसरे चरण में ये एरिया होंगे शामिल
पहले चरण में छोड़े गए लो-लेवल एरिया बस स्टैंड के आस पास की कॉलोनियां, गोडीजी क्षेत्र, सैकण्ड फेज, पंचायत समिति के पास का कुछ भाग, गोविंद गढ़ के आस पास व नई बसी कॉलोनियों को शामिल किया जाएगा। जिसके बाद यहां के लोगों को भी सीवरेज सुविधा मुहैया हो पाएगी।

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