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Jalore Granite Industry: अमरीका-ईरान की तनातनी का दिखा असर, जालोर के ग्रेनाइट उद्योग पर मंदी की मार

Jalore News: अमरीका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी का असर अब जालोर के ग्रेनाइट उद्योग पर भी दिखने लगा है। विदेशी ऑर्डर घटने से एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है और उद्योग में मंदी का माहौल बन गया है।
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जालोर

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Rakesh Mishra

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Updated: 28 May 2026, 3:51 PM IST

Jalore Granite Industry

ग्रेनाइट इकाई में मौजूद माल। फोटो- पत्रिका

जालोर। अमरीका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी का असर अब जालोर के ग्रेनाइट उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से फिनिश ग्रेनाइट की मांग में गिरावट आई है। इसका सीधा असर जालोर के ग्रेनाइट कारोबार पर पड़ा है, जहां से होने वाला एक्सपोर्ट लगातार घट रहा है। वर्तमान में 30 से 40 फीसदी फिनिश ग्रेनाइट कारोबार प्रभावित हुआ है। ग्रेनाइट उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि पिछले कुछ समय से विदेशी ऑर्डर कम मिले हैं। विशेष रूप से अमरीका और मध्य-पूर्व के बाजारों में कारोबार प्रभावित हुआ है।

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एक्सपोर्ट घटने से बढ़ी चिंता

उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार जालोर का ग्रेनाइट अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां से बड़ी मात्रा में फिनिश ग्रेनाइट विदेशों में भेजा जाता है, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के चलते खरीदार सतर्क हो गए हैं। नई डील्स कम हो रही हैं और पुराने ऑर्डर्स में भी देरी देखने को मिल रही है।

उद्योग पर मंदी की मार

ग्रेनाइट उद्योग में मंदी का असर श्रमिकों और छोटे कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। कई इकाइयों में उत्पादन कम होने से रोजगार प्रभावित होने लगा है। उद्यमियों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो उद्योग को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। उद्यमियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते परिवहन और व्यापारिक लागत भी प्रभावित हुई है। दूसरी ओर विदेशी बाजार में मांग कमजोर होने से तैयार माल का स्टॉक बढ़ रहा है। इससे कारोबारियों की चिंता और बढ़ गई है।

200 से अधिक कंटेनर गल्फ कंट्री तक पहुंचते हैं

जालोर और किशनगढ़ गल्फ कंट्री तक ग्रेनाइट व्यापार के मुख्य पाइंट हैं। जालोर एशिया की सबसे बड़ी ग्रेनाइट मंडी है। जालोर जिले की बात करें तो 10 से अधिक बड़े एक्सपोर्टर गल्फ कंट्री तक ग्रेनाइट भेजने का काम करते हैं। प्रति कंटेनर 4 से साढ़े 4 हजार स्क्वायर फीट ग्रेनाइट भेजा जाता है। बेहतर हालात में हर माह जालोर से 30 से 40 कंटेनर यानी 1.50 से 2 लाख स्क्वायर फीट ग्रेनाइट गल्फ कंट्री तक भेजा जाता था, लेकिन तनातनी के हालात में व्यापार में काफी ज्यादा गिरावट आई है।

यहां तक होता है व्यापार

दुबई, दोहा, कतर, आबूधाबी, यूएई और ओमान ग्रेनाइट के प्रमुख डिमांड क्षेत्र हैं, लेकिन वर्तमान में इन सभी देशों से व्यापार प्रभावित है।

फैक्ट फाइल

  • 1500 ग्रेनाइट इकाइयां जालोर में।
  • 50 हजार से अधिक श्रमिक उद्योग से जुड़े हैं।
  • 100 ट्रक रोजाना देश के विभिन्न हिस्सों तक तैयार ग्रेनाइट की लोडिंग कर रहे थे।
  • अब केवल 50 से 60 ट्रकों की ही लोडिंग हो रही है।

इन्होंने कहा

अमरीका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने के बाद से ग्रेनाइट एक्सपोर्ट पर 30 से 40 फीसदी तक असर पड़ा है। समुद्री रास्ते बंद होने से गल्फ कंट्री से कारोबार प्रभावित हुआ है और डिमांड घटी है।

  • रितेश खत्री, एक्सपोर्टर

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़े हालात से ग्रेनाइट उद्योग को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है। पहले भी एक्सपोर्ट कंटेनर समुद्री मार्ग में अटक गए थे, जिनकी वापसी हुई थी। वर्तमान में 40 फीसदी एक्सपोर्ट प्रभावित है।

  • राजेंद्र भूतड़ा, एक्सपोर्टर

एसोसिएशन की ओर से जालोर के ग्रेनाइट पर जीएसटी दर घटाने की मांग की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से ग्रेनाइट उद्योग 40 फीसदी प्रभावित हुआ है। आयातित ग्रेनाइट और अन्य टाइल्स पर दर बढ़ाने की मांग भी की गई है।

  • अरविंद चौधरी, सचिव, ग्रेनाइट एसोसिएशन