
पालूदेवी की गोद में नन्हा हिरण। फोटो- पत्रिका
वेड़िया। खीचड़ों की ढाणी डूंगरी क्षेत्र में इंसानियत और पर्यावरण प्रेम की मिसाल देखने को मिली। शिकारी कुत्तों के हमले में चिंकारा हिरन की मां की दर्दनाक मौत के बाद उसका शावक अनाथ हो गया। घायल अवस्था में हिरण का बच्चा अरंडी की फसल में तड़पता मिला। घटना के बाद क्षेत्र की गृहिणी पालूदेवी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल चिंकारा शावक को अपने घर सुरक्षित रखा।
पांच दिन तक स्वयं धात्री होने के कारण पालूदेवी ने शावक को अपने बच्चे की तरह खुद का दूध पिलाकर जीवनदान दिया। यह दृश्य मानव और वन्यजीवों के बीच करुणा का अनोखा उदाहरण बन गया। बाद में पालूदेवी ने इस पूरे घटनाक्रम की सूचना पर्यावरण एवं जीवरक्षा संस्था जालोर की सक्रिय सदस्य डॉ. इन्द्रा विश्नोई को दी।
सूचना मिलते ही डॉ. इन्द्रा विश्नोई ने तत्परता दिखाते हुए अपनी निजी गाड़ी से लगभग 65 किलोमीटर दूर अमृता देवी उद्यान धमाणा रेस्क्यू सेंटर में शावक को सुरक्षित भिजवाया, जहां उसका उपचार और संरक्षण किया जा रहा है। इस मानवीय अभियान में संस्था के कई कार्यकर्ता मौके पर मौजूद रहे, जिनमें पालूदेवी, मोहनलाल आरवा, डॉ. गणपत सिंह, ओमप्रकाश खींचड़, भागीरथराम खींचड़, नरेश कुमार, दिनेश खींचड़, राजूराम जाणी, मोहनलाल बेनिवाल सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी शामिल थे।
सांचौर क्षेत्र में धमाणा का गोलिया हिरण संरक्षण का मुख्य केंद्र है। इस केंद्र में पिछले कई सालों से हिरणों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य चल रहा है। सुरक्षित माहौल में यहां हिरण कुलांचे मारते नजर आते हैं। वर्तमान में इस केंद्र में 350 से अधिक हिरण, मोर, बंदर समेत अन्य वन्यजीव संरक्षित हैं।
Updated on:
19 Feb 2026, 7:14 PM IST
Published on:
19 Feb 2026, 3:57 PM IST
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