जनता कफ्र्यू में आज आप भी निभाएं भागीदारी, कोरोना को हराएं

- आज देशभर में जनता कफ्र्यू में अपने स्तर पर ही जनता का शट डाउन हालातों को सुधारने में साबित हो सकता है महत्वपूर्ण कदम

By: khushal bhati

Updated: 22 Mar 2020, 06:13 AM IST

जालोर. कोरोना वायरस के संक्रमण से देशभर में विकट हालात बन रहे हैं और अब राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है। इन हालातों के बीच आज रविवार को घोषित जनता कफ्र्यू के माध्यम से आमजन कोरोना को हराने में अपनी ओर से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस पहल में हर आम और खास को भूमिका निभानी होगी। जैसा कि पूर्व में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालातों को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। इसलिए आज का दिन खास साबित होगा। चूंकि यह हर व्यक्ति का व्यक्तिगत कफ्र्यू है। ऐसे में सीधे तौर पर एक दिन का स्वैच्छिक शट डाउन कोरोना पर नकेल कसने के साथ साथ उसके संक्रमण को कम करने की कड़ी साबित होगा।
सावधानी से जीतें जंग
कोरोना से लडऩे के लिए अभी तक वैक्सीन की खोज नहीं हुई है। विश्व स्तर पर यह माना जा चुका है कि कोरोना संक्रमण से बचने का एक ही तरीका है। जितना हो अपने घर में रहें। सावधानी बरत ली जाएगी तो इस घातक महामारी से जीता जा सकता है, अन्यथा स्थिति गंभीर हो सकती है। इसी कड़ी में जनता कफ्र्यू को अंजाम दिया जा रहा है।
इसलिए आपकी भागीदारी जरुरी...
कफ्र्यू और जनता कफ्र्यू में एक बड़ा अंतर है। जनता कफ्र्यू लोगों का, लोगों के लिए, लोगों की ओर से खुद पर लगाया गया कफ्र्यूू है। ये एक तरह का अनुरोध है। लोगों को अपनी इच्छा से खुद को घरों तक सीमित रखना है और अगर वे बाहर निकलते हैं तो इस पर कोई एक्शन नहीं होगा। आम कर्फ्यू में अनुरोध की गुंजाइश नहीं होती है ये प्रशासन की तरफ से लगाया जाता है। गौरतलब यह है भारत में जनता कफ्र्यू का यह दूसरा मौका होगा। इससे पहले वर्ष 1950 में इंदुलाल याग्निक ने जनता कफ्र्यूू की शुरुआत की थी। इंदुलाल याग्निक महा गुजरात आंदोलन के बड़े नेता थे।
हमें क्या करना है
आज के इस कफ्र्यू में प्रशासन और पुलिस का प्रबंधन नहीं रहेगा, बल्कि आम आदमी की मंशा और इच्छा शक्ति का परीक्षण होगा। इसलिए इस महत्वपूर्ण देश व्यापी निर्णय में हमें अपनी ओर से सकारात्मक भूमिका का निर्वहन करना होगा। इसके लिए हमें कुछ खास करने की जरुरत नहीं है। हमें केवल इस तरह से इस कफ्र्यू को सहयोग देना है...
यह करें आज...
- हमें अपने घरों में ही रहना है, कहीं बाहर जाने की जरुरत नहीं
- बहुत आवश्यक कार्य होने पर परिवार से एक दो व्यक्ति ही घर से बाहर निकले और जल्द से जल्द घर पहुंचे
- जरुरी कार्यों की श्रेणी में अस्पताल जाना, आवश्यक सेवा के तहत काम पर जाना ही शामिल है।
- डॉक्टर और कुछ लोग कोरोना के खतरे से लड़ रहे हैं। इनके लिए घरों के दरवाजों, खिड़कियों और बालकनी में खड़े होकर मानवता की सेवा कर रहे लोगों का आभार व्यक्त करें।

khushal bhati Reporting
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