
SI बनकर सफर शुरू करने वाला बना आतंक का DSP, परिवार और संपत्ति के बारे में जानकर होंगे हैरान
(जम्मू,योगेश): जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी देविंदर सिंह को दो हिजबुल आतकिंयों के साथ गत शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद आतंक की जड़ों की गहाराई की पड़ताल में जांच एजेंसियां जुट गई। देविंदर सिंह पर गाज गिरी और उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। फिलहाल मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई है जिसमें कई खुलासे होने बाकी है। लेकिन यदि देविंदर सिंह के अतीत पर नजर डाली जाए तो पता चलेगा कि शुरू से ही वह कई मामलों में पकड़े गए है। वहीं उनके परिवार और संपत्ति की जानकारी भी सामने आई है।
SI बनकर पुलिस से जुड़ा...
देविंदर सिंह 1990 में बतौर सब-इंस्पेक्टर जम्मू—कश्मीर पुलिस में शामिल हुए थे। दो साल के बाद ही वह और एक अन्य अधिकारी दक्षिण कश्मीर के बिजबेहरा में मादक पदार्थों के सौदे में कथित रूप से संलिप्त पाए गए। हालांकि उन्हें निलंबित कर दिया गया था लेकिन घाटी में चरम उग्रवाद के बीच सिंह को फिर से बरकरार रखा गया। पहले उन्हें मुख्य पोस्टिंग से दूर रखा गया, लेकिन 1998 में जम्मू और कश्मीर पुलिस के एक नए आतंकवाद-रोधी विंग के विशेष ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) में उन्हें इंस्पेक्टर के रूप शामिल किया। यहां उन पर जबरन वसूली और अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे।
अफजल गुरु से जुड़ा नाम...
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2000 में सिंह को एक स्रोत के माध्यम से अफजल गुरु के बारे में पता चला, वह अपने सहयोगी के साथ मिलकर सोपोर निवासी गुरु को अपने शिविर में लाया। अफ़ज़ल को बिना किसी एफआईआर या किसी अन्य रिपोर्ट के रखा गया और उसे थर्ड डिग्री टॉर्चर किया गया। जब पूछताछ में कुछ सामने नहीं आया तो उसे ठीक होने के बाद उसे मुक्त कर दिया गया। लेकिन 2004 में तिहाड़ जेल से अपने वकील के नाम लिखे पत्र में अफजल ने कहा कि सिंह लगातार उनके और उनके परिवार के संपर्क में था। पत्र के अनुसार अफजल ने कहा कि सिंह ने उन्हें महमूद भाई और एक अन्य पाकिस्तानी को दिल्ली ले जाने के लिए मजबूर किया और दिल्ली में एक कार सहित उनके आवास की व्यवस्था करने को कहा।
आरोपों के बाद एसओजी से बाहर...
सिंह को गंभीर जबरन वसूली के आरोपों के बाद 2003 में एसओजी से बाहर कर दिया गया था, लेकिन तब तक उन्हें डीएसपी रैंक पर पदोन्नत कर दिया गया था। वह सशस्त्र पुलिस विंग में एक सजा के रूप में तैनात थे और 2007 में एक प्रमुख व्यवसायी से जबरन वसूली के आरोप में एक बार फिर निलंबित कर दिए गए। 2008 से 2013 में अफ़ज़ल की फांसी तक वे कश्मीर के यातायात विभाग में तैनात रहे। उन्होंने तुरंत सनत नगर में अपना घर बेच दिया और श्रीनगर में आर्मी बेस मुख्यालय बीबी कैंटोनमेंट के पास इंदिरा नगर में जमीन खरीदी, जहां उनका वर्तमान में एक विशाल निर्माणाधीन घर है। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपनी सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की, एसओजी श्रीनगर में डीएसपी के रूप में कार्यकारी पुलिस में अपनी पोस्टिंग वापस हासिल की।
आतंक रोधी अभियान के लिए मिला वीरता पुरस्कार...
2015 में सिंह को पुलवामा में पुलिस लाइंस में डीएसपी के रूप में तैनात किया गया था, जहां 2017 में जैश-ए-मोहम्मद का हमला हुआ था। अगले साल उन्हें राज्य वीरता पुरस्कार दिया गया था और बाद में उनके नवीनतम हवाई अड्डे पर स्थानांतरित कर दिया गया था।
दोनों बेटियां डॉक्टर...
सिंह पुलवामा में त्राल के मूल निवासी हैं, हिजबुल मुजाहिद्दीन आतंकी बुरहान वानी और जाकिर मूसा भी यहीं के रहने वाले थे। सिंह जम्मू में एक घर के अलावा यहां पैतृक संपत्ति का मालिक है। डीएसपी देविंदर सिंह के तीन बच्चे हैं। उसकी दोनों बेटियों ने बांग्लादेश से एमबीबीएस किया है। एक बेटी अब भी बांग्लादेश में है, जबकि एक दिल्ली में है। उसका बेटा सातवीं कक्षा का छात्र है, जो कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले राममुंशीबाग, श्रीनगर इलाके में स्थित एक मिशनरी स्कूल का छात्र है। वहीं, देविंदर सिंह की पत्नी स्कूल शिक्षा विभाग में बतौर अध्यापिका कार्यरत है और इन दिनों श्रीनगर में ही तैनात है।
बन रहे हैं दो मकान
देविंदर सिंह श्रीनगर के इंदिरा नगर और सन्नतनगर में अपने लिए दो मकान बनवा रहा था। फिलहाल, वह शिवपोरा में अपने एक करीबी रिश्तेदार के मकान में ही बीते पांच साल से रह रहा था। यह मकान गत शनिवार से बंद है और उसके परिजन श्रीनगर में ही अपने किसी एक रिश्तेदार के पास चले गए हैं।
Published on:
18 Jan 2020 09:51 pm
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