
बच्चे का शव ले जाता पिता
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर सब-डिविजनल हॉस्पिटल से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पिता को अपने मासूम बच्चे की बॉडी को इज्जत से ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली। आखिर में, बेबस पिता ने हॉस्पिटल कैंपस में पड़े एक पुराने कार्डबोर्ड बॉक्स को उठाया, उसमें अपने मरे हुए बच्चे की बॉडी रखी और उसे राशन के थैले में रखकर ई-रिक्शा से 12 किलोमीटर दूर अपने गांव लौट आया। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बंघरासाई गांव के रहने वाले रामकृष्ण हेम्ब्रम ने अपनी प्रेग्नेंट पत्नी रीता तिरिया को 5 मार्च को हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। शनिवार को जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे की धड़कन बंद हो गई है। इसके बाद महिला को अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा गया। लेकिन, जांच पूरी होने से पहले ही उसे लेबर पेन शुरू हो गया और उसने एक मरा हुआ बच्चा पैदा किया।
रामकृष्ण हेम्ब्रम का आरोप है कि बच्चे के जन्म के बाद, उसने हॉस्पिटल प्रशासन से एम्बुलेंस मांगी ताकि वह नवजात की बॉडी को अपने घर ले जा सके, जो करीब 12 किलोमीटर दूर है। हालांकि, उसके मुताबिक, हॉस्पिटल अधिकारियों ने उसकी रिक्वेस्ट मानने से मना कर दिया। इसके अलावा, वार्ड बॉय और दूसरे स्टाफ ने कथित तौर पर उस पर बॉडी को तुरंत हटाने का दबाव डाला।
रामकृष्ण के पास प्राइवेट गाड़ी किराए पर लेने के पैसे नहीं थे, और सरकारी सिस्टम ने भी हाथ खड़े कर दिए थे। हताशा में, उसने हॉस्पिटल के कचरे से एक खाली कार्डबोर्ड बॉक्स उठाया। उसने अपने मरे हुए बच्चे की बॉडी को बॉक्स के अंदर रखा और लोगों के सवालों से बचने के लिए उसे एक झोले में छिपा दिया। इसी हालत में, वह एक ई-रिक्शा में सवार होकर अपने घर के लिए निकल गया। किसी ने इस घटना का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जब मामला बढ़ा, तो हॉस्पिटल के इंचार्ज डॉ. अंशुमान शर्मा ने अपना बचाव करते हुए कहा कि परिवार ने एम्बुलेंस नहीं मांगी थी। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल के पास ममता वाहन मौजूद था। अगर उन्होंने मांगी होती, तो उन्हें वो उपलब्ध करा दी जाती। महिला अभी भी हॉस्पिटल में भर्ती है, परिवार को सिर्फ बच्चे के अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया था।
इस घटना ने राज्य सरकार की साख पर बट्टा लगा दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ किया है कि इस मामले में यदि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पिछले दिसंबर में झारखंड के चाईबासा से ऐसी ही एक घटना सामने आई थी, जब एक पिता को अपने 4 महीने के बेटे की बॉडी को प्लास्टिक बैग में बस से ले जाना पड़ा था। सवाल यह उठता है कि करोड़ों का हेल्थ बजट और ममता वाहन जैसी योजनाएं जमीन पर गरीबों के आंसू पोंछने में नाकाम क्यों साबित हो रही हैं?
Updated on:
9 Mar 2026, 9:41 AM IST
Published on:
9 Mar 2026, 9:41 AM IST
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