
Video- पहली और दूसरी कक्षा के इन बच्चों की प्रतिभा जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान, 10 नहीं, 20 नहीं, फर्राटे से बोलते हैं 40 तक का पहाड़ा
पामगढ़. आमतौर पर सरकारी स्कूल का नाम सुनते ही मन में बच्चों की कम उपस्थिति, सुविधाओं का अभाव, शिक्षकों की कमी, अनुशासन का न होना, शिक्षा गुणवत्ता में कमी जैसी कई नकारात्मक बातें मन में आ जाती हैं, लेकिन पामगढ़ ब्लॉक मुख्यालय अंतर्गत मुड़पार (चु) में संचालित शासकीय प्राथमिक स्कूल का इन सब बातों से दूर-दूर तक नाता नहीं है। यहां हैं तो मात्र दो ही टीचर पर इनकी मेहनत और आपसी तालमेल से यह इतनी बेहतर शिक्षा दे रहे हैं कि यहां के बच्चे निजी स्कूल के बच्चों को भी पढ़ाई में पीछे छोडऩेे का माद्दा रखते हैं।
यह बातें जब पालकों ने पत्रिका की टीम को बताई तो पहले उन्होंने भी इसे हल्के में लिया, लेकिन जब सच्चाई जानने स्कूल पहुंची तो बच्चों की क्वालिटी और पढ़ाई का स्तर देखकर दंग रह गई। यहां सभी बच्चे अपने क्लास के स्तर पर पूछे गए सभी सवाल के जवाब फटाफट दे देते हैं। पत्रिका की टीम ने पहली और दूसरी के बच्चों से पूछा कि उन्हें कितने तक पहाड़ा आता तो बच्चों ने 10-15 या 20 तक का नहीं बल्कि पूरे 40 तक का पहाड़ा आने का दावा किया।
पत्रिका की टीम पलटने लगी तो बच्चों ने कहा सुन लीजिए सर और फिर क्या एक-एक कर सभी बच्चों ने जो भी पहाड़ा पूछा गया चाहे वह 18 का हो 17 हो 27 का हो या फिर 39 का फटाफट सुनाने लगे। इसके बाद इन बच्चों को पत्रिका पेपर देकर न्यूज पढऩे के लिए कहा गया तो बच्चों ने बड़े ही शालीनता तेज आवाज में सभी को न्यूज पढ़ कर सुनाई। वहीं प्राईवेट स्कूलों की बात करें तो यहां पहली और दूसरे क्लास के बच्चों को ठीक से 20 तक का पहाड़ा नहीं याद होगा।
प्राइवेट स्कूल के बच्चे पहुंच रहे पढऩे
इस शासकीय स्कूल के शिक्षकों की मेहनत और बच्चों की दक्षता में बढ़ते निखार को देख क्षेत्र के अभिभावक अब अपने बच्चों का नाम प्राइवेट स्कूल से कटाकर शासकीय स्कूल में एडमिशन करा रहे हैं।
घर जाकर शिक्षक माता-पिता को कर रहे मोटिवेट
देखने में तो यह आता है कि शासकीय स्कूल के टीचर निर्धारित समय तक स्कूल में पढ़ाते ही नहीं, लेकिन इस स्कूल के टीचर जयपाल अनंत हर साल सेशन शुरू होने के पहले गांव के घरों में जाकर बच्चों और उनके अभिभावकों को मोटिवेट करते हैं और बच्चों को स्कूल तक लाते हैं। इसी तरह हर महीने पेरेंट्स टीचर मीटिंग का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें अभिभावकों से उनके बच्चों के विकास के बारे में बात की जाती है।
खेल-कूद व अन्य एक्टिविटी की व्यवस्था
स्कूल में बच्चों को सभी प्रकार की गतिविधियों में हिस्सा दिलाया जाता है। बच्चों को मैदान में तो खेल-कूद कराया ही जाता है, साथ ही कक्षा में भी बच्चे खेल की तरह पढ़ाई करते हैं। बच्चे स्कूल से दूर न भागें इसलिए उन्हें फन अंदाज में पढ़ाई कराते हैं।
Published on:
07 Aug 2018 07:00 pm
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