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इस दिन किसान हल, नांगर, कुदाल की करेंगे पूजा, लोहार घर-घर जाकर ठोकेंगे कील, क्या होगा खास, पढि़ए खबर…

- ग्रामीण अंचल में लोक पर्व का अलग ही माहौल देखने को मिलता है

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इस दिन किसान हल, नांगर, कुदाल की करेंगे पूजा, लोहार घर-घर जाकर ठोकेंगे कील, क्या होगा खास, पढि़ए खबर...

इस दिन किसान हल, नांगर, कुदाल की करेंगे पूजा, लोहार घर-घर जाकर ठोकेंगे कील, क्या होगा खास, पढि़ए खबर...

जांजगीर-चांपा. हरेली यानी हरियाली अमावस्या के पर्व से लोक पर्वों की शुरुआत होती है। छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान होने के कारण यहां पर लोग इस पर्व को उत्साह व उमंग से मनाते हैं। गांव हो या शहर, हर जगह कृषि औजारों की पूजा करते हुए आने वाले समय में अच्छी फसल की कामना करेंगे। लोक संस्कृति के रंग भी देखने को मिलेंगे। गेड़ी चढऩे के साथ ही पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद चखेंगे।

हरेली पर्व शनिवार 11 अगस्त को अंचल में धूमधाम से मनाया जाएगा। यह छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोक पर्व है। ग्रामीण अंचल में लोक पर्व का अलग ही माहौल देखने को मिलता है। किसान अपने खेतों में आषाढ़ से ही बोआई का कार्य करते हैं, जो सावन के माह तक चलता है। सावन माह के अमावस्या को हरेली का पर्व मनाया जाता है। डेढ़ से दो माह तक फसल लगाने का प्रारंभिक कार्य पूरा करने के बाद इस पर्व को मनाते हैं। इस दिन हल, नांगर, गैती, कुदाल जैसे कृषि औजारों को धोकर साफ किया जाता है। इसके बाद उसकी पूजा-अर्चना करते हुए अच्छी फसल की कामना की जाती है। इसके साथ ही कुलदेवी कुलदेव की आराधना भी की जाती है।

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चीला व चौसेला रोटी का लगेगा भोग
हरेली में हर घर में कृषि औजारों की पूजा कृषक श्रद्धा भाव से वैदिक विधियों से करेंगे। इसके साथ ही चावल के आटे से बने छत्तीसगढ़ी व्यंजन भोग में अर्पित किए जाएंगे। इसमें खास तौर पर चीलाए चौसेला, फरा, खीर, बड़ा व भजिया जैसे पारंपरिक व्यंजन शामिल हैं।

प्रत्येक घर में होगी पूजा
जिले में कृषि का कार्य ही जीविकोपार्जन का माध्यम है। इसलिए घर-घर कृषि औजारों की पूजा करते हुए किसान अच्छी फसल की कामना करेंगे। इस दिन हर कोई उत्साहित नजर आता है और त्योहार का जम कर आनंद उठाता है।

लगेगी नारियल की बाजी
हरेली में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में युवा नारियल फेंक का खेल खेलेंगे। इसमें नारियल फेंकने की प्रतियोगिता होगी और दूरी के लिए बोली लगाई जाएगी। युवा उत्साह से इस खेल का हिस्सा बनेंगे और नारियल फेंक में शामिल होंगे।

गेंड़ी चढ़ेंगे बच्चे
जिले के ग्रामीण अंचलों में इस पर्व पर बांस की बल्लियों से गेंड़ी तैयार की जाती है। गांव के सभी क्षेत्रों में गेंड़ी बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है और हरेली के दिन बच्चे गेंड़ी चढ़कर कई तरह की प्रतियोगिताएं करेंगे। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।

लोहार का होगा महत्व
हरेली का पर्व तंत्र साधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वजह से इस दिन गांव में लोहार का महत्व बढ़ जाता है। ऐसी मान्यता है कि बुरी नजर से बचाने में लोहा महत्वपूर्ण होता है और लोहार घर-घर जाकर कील ठोकेंगे।