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सावन महीने का आखिरी सोमवार कल, मंदिरों में भगवान शिव को प्रसन्न करने श्रद्धालुओं का लगेगा तांता

- सावन के अंतिम सोमवार 20 अगस्त को होने के कारण जलाभिषेक करने सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रहेगी

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सावन महीने का आखिरी सोमवार कल, मंदिरों में भगवान शिव को प्रसन्न करने श्रद्धालुओं का लगेगा तांता

जांजगीर-चांपा. हरहर महादेव व बोलबम के जय घोष के साथ शुरू हुए सावन के पावन महीने का समापन 26 अगस्त को होगा। सावन के अंतिम सोमवार 20 अगस्त को होने के कारण जलाभिषेक करने सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रहेगी, जिसको लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई है।

हिन्दू धर्म में सावन महीना को शिव आराधना के लिए पावन व महत्वपूर्ण माना जाता है। सावनी व्रत करने वाले महीने भर मिट्टी का शिवलिंग बनाकर रोज सुबह उसकी पूजा करते हैं और उसे विसर्जित कर देते हैं। वहीं इस माह के सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है।

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जिले के पीथमपुर के कलेश्वर महादेव, खरौद के लक्ष्मणेश्वर महादेव, तुर्रीधाम, जांजगीर के सेंधवार महादेव, नहर किनारे स्थित शिव मंदिरए नैला स्थित शिव मंदिर, नवागढ़ के लिंगेश्वर महादेव, परसाही स्थित शिवलिंग में जल चढ़ाने कांवरियों के साथ श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग रही है। इस दौरान रात से हो रही बारिश के बाद भी दर्शन के लिए श्रद्धालु डटे रहे। देवरघटा स्थित संगम से जल भरकर लोग लक्ष्मणेश्वर महादेव खरौद में जल चढ़ाने पहुंच रहे हैं। सावन के पहले सोमवार के लिए मंदिरों में विशेष तौर पर तैयारियां की गई थी, उसी तर्ज पर अंतिम सोमवार की भीड़ को देखते हुए तैयारियां की गई है।

अभिषेक का है महत्व
सावन में शिव अभिषेक का विशेष महत्व माना गया है। शिवलिंग व पार्थिव शिवलिंग के पूजन से शिवजी का आशीर्वाद मिलता है। पंडितों ने बताया कि समुद्र मंथन में निकले विष का पान करने के बाद उसकी जलन को शांत करने शिवजी का जलाभिषेक किया गया था। इसी के तहत यह विधि अपनाई जाती है। इसके साथ ही आंक व विल्व पत्र चढ़ाने से अनिष्ट ग्रह की दशा भी शांत होती है। दूध में काले तिल से अभिषेक करने से चंद्र संबंधित कष्ट दूर होते हैं।