
स्कूली खेल को लेकर गंभीर नहीं शासन
जांजगीर-चांपा. जिले ही नहीं प्रदेश में खेल को लेकर शासन गंभीर नहीं है। इसकी बानगी डभरा विकासखंड के नोडल अधिकारी के इस्तीफे से देखने मिल रही है। स्कूली बच्चों के लिए विकासखंड व जिला स्तर पर खेल आयोजन के लिए राशि नहीं मिलने पर क्षुब्ध होकर नोडल अधिकारी को इस्तीफा देना पड़ा है।
जिले के डभरा विकासखंड में व्यायम शिक्षक के पद पर कार्यरत राजेश कुमार नायक को विकासखंड के लिए खेल आयोजन का नोडल अधिकारी बनाया गया था। इस सत्र में स्कूलों में खेल अभ्यास के बाद विकासखंड स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जानी थी, जिसमें चयनित बच्चे जिला स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते, लेकिन इस आयोजन के लिए शासन स्तर से ही राशि नहीं मिली। इससे क्षुब्ध होकर नोडल अधिकारी बनाए गए राजेश कुमार ने नोडल अधिकारी बने रहने को औचित्यहीन पाया और अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
जिला खेल अधिकारी, खेल एवं युवक कल्याण विभाग जांजगीर को भेजे अपने इस्तीफे में राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि वह खेल आयोजनों के लिए राशि नहीं मिलने से व्यथित है, जिसके चलते अपने पद पर नहीं बने रहना चाहता। उन्होंने अपनी पीड़ा खेल आयोजन कराने में असमर्थ होने से इस्तीफा देने की बात कहते हुए बयां की है। इस मामले से स्पष्ट हो रहा है कि जिले में खेल आयोजन औपचारिक बनकर रह गया है और कुछ अधिकारी अपनी रोटी सेंकने मशगूल हैं, चाहे जिले की खेल प्रतिभाओं के साथ कुछ भी होता रहे।
कैसे हो रहे राज्य स्तरीय आयोजन
विकासखंड खेल नोडल अधिकारी द्वारा दिए गए इस्तीफे से खेल आयोजनों के औपचारिक बनने की आशंका पर मुहर लगाई है। विकासखंड नोडल अधिकारी द्वारा स्पष्ट किया गया है कि ब्लाक व जिला स्तर के लिए राशि उपलब्ध कराई नहीं जा रही है। वहीं राज्य स्तरीय खेलों का आयोजन किया जा रहा है,
जहां गिने-चुने खिलाड़ी पहुंच रहे हैं। इसे विडंबना ही कही जाएगी कि ब्लाक स्तरीय खेलों का आयोजन हुआ ही नहीं है, तब जिला व राज्य स्तर पर पहुंचे खिलाड़ी बिना किसी प्रतिस्पर्धा के हैं। इससे उनकी काबिलियत पर भी शंका हो रही है और ग्रामीण स्तर के खेल प्रतिभाओं का दमन हो रहा है। इस मामले ने राज्य स्तरीय खेल आयोजन के औचित्य पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
आधा दर्जन खेलों के प्रतिभागी नहीं पहुंच पाए थे
जिले में विगत वर्ष किसी तरह ब्लाक व जिला स्तर पर हॉकी जैसे महत्वपूर्ण खेल के साथ आधा दर्जन खेल आयोजन किया गया था और राज्य स्तर पर खेलों का आयोजन राजनांदगांव में होना था। जिले की टीम राज्य स्तर पर खेलने जिला मुख्यालय जांजगीर पहुंच चुकी थी, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा ट्रेन आने के कुछ देर पहले खिलाडिय़ों के भत्ते व अन्य खर्च देने हाथ खड़े कर दिए, जिससे करीब २०० खिलाडिय़ों के दल को रेलवे स्टेशन से वापस लौटना पड़ा था। विभाग की किरकिरी होने के बाद भी आयोजनों को लेकर किसी तरह की गंभीरता अब भी नजर नहीं आ रही है और बिना किसी प्लानिंग के मनमर्जी पूर्वक कार्य किया जा रहा है।
दो विभागों का पेंच
खेल आयोजनों को लेकर शिक्षा व खेल व युवक कल्याण विभाग के बीच पेंच फंसा रहता है। स्कूली स्पर्धाएं शिक्षा विभाग द्वारा व खुली स्पर्धाएं खेल व युवक कल्याण विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है। खेल आयोजन को लेकर जब एक विभाग ही राशि की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है, तब इसे दो विभागों में बांटने का औचित्य लोगों की समझ से परे है। लोगों का मानना है कि सभी तरह के खेल आयोजन एक ही विभाग द्वारा किया जाना चाहिए, जिससे उपलब्ध बजट का सही उपयोग किया जा सकेगा।
कलेक्टर पहुंचे हौसला बढ़ाने
जिला मुख्यालय जांजगीर के हाईस्कूल मैदान में क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए चयनित टीम का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। खिलाडिय़ों के हौसला अफजाई करने कलेक्टर भी पहुंच रहे हैं, लेकिन खिलाडिय़ों की परेशानी दूर नहीं हो रही है। सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।
-ब्लाक व जिला स्तर के खेल आयोजनों के लिए बजट उपलब्ध नहीं होने पर पद पर बने रहना औचित्यहीन समझकर पद से इस्तीफा दिया हूं।
-राजेश कुमार नायक, व्यायाम शिक्षक, डभरा
Updated on:
03 Oct 2018 04:31 pm
Published on:
03 Oct 2018 04:30 pm
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