
अफीम की खेती ( Photo - Patrika )
Opium cultivation in CG: जांजगीर-चांपा जिले में अफीम और गांजा की अवैध खेती की आशंकाओं के बीच प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस व प्रशासन की संयुक्त टीमें गांव-गांव जाकर खेतों की सघन जांच कर रही हैं। इस अभियान में तहसीलदार, पटवारी और ग्राम सचिव भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, ताकि किसी भी स्तर पर अवैध नशे का कारोबार पनप न सके। अभी तक सघन जांच में जिले में अफीम की खेती नहीं मिल पाई है।
प्रदेश के अन्य जिलों में अफीम की अवैध खेती के चौकाने वाले मामलों के बाद अब जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। शासन से मिले निर्देश के बाद कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले के किसी भी कोने में नशे का यह काला कारोबार पनपना नहीं चाहिए। इसके लिए सभी तहसीलदारों, कृषि विभाग के अधिकारियों को गिरदावरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिले के सभी खेतों व बाड़ी में सघन जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसलिए जिले में तहसीलदार से लेकर सभी अधिकारी कर्मचारी खेतों की खाक छान रहे हैं।
दुर्ग, बलरामपुर व रायगढ़ में हुई कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि शातिर अपराधी खेतों के बीचों-बीच अफीम की खेती कर रहे हैं। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के सभी कलेक्टरों को मामले में जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। शासन से निर्देश मिलते ही कलेक्टर ने राजस्व और पुलिस विभाग को हाई अलर्ट पर रखा है। अब केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा न कर जमीन पर जाकर वेरिफिकेशन किया जाएगा। तहसीलदार और उनकी टीम को विशेष रूप से उन इलाकों में भेजा जा रहा है, जहां बाहरी लोग खेती कर रहे हैं या जो इलाके अंतिम व जंगली क्षेत्र से सटे हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह जांच केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। यदि किसी भी गांव में अफीम या गांजा की खेती पाई जाती है तो उसके लिए वहां के मैदानी अमले पटवारी और सचिव को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। छुट्टी के दिन भी तहसीलदार जांजगीर द्वारा प्रतिबंधित फसलों की संघन जांच की गई। इसके लिए खेतों के अंदर भी पहुंचे, ताकी नजदीक से पता चले। साथ ही प्याज सहित अन्य सब्जी की जांच भी की जा रही है।
अभियान के दौरान फॉर्म हाउसों पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है, क्योंकि इनका उपयोग अक्सर अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि कहीं भी प्रतिबंधित खेती पाई गई तो संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों पटवारी और ग्राम सचिव की जवाबदेही तय की जाएगी। लापरवाही या जानकारी छिपाने पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
अब तक जिले के करीब 60 से 70 फीसदी संवेदनशील इलाकों की जांच पूरी की जा चुकी है। टीमें केवल खेतों के बाहर से निरीक्षण नहीं कर रहीं, बल्कि सीधे फसलों के बीच जाकर बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। खासतौर पर सब्जी, बाड़ी और अन्य घने पौधों के बीच छिपाकर की जाने वाली खेती पर विशेष नजर रखी जा रही है।
तहसीलदार और सचिवों को गांव-गांव जाकर जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुलिस भी निगरानी कर रही है। यदि कहीं भी नशे की अवैध खेती का मामला सामने आता है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी। अभी तक अफीम सहित अन्य नशे की खेती का मामला सामने नहीं आया है। - जन्मेजय महोबे, कलेक्टर
Updated on:
22 Mar 2026 01:18 pm
Published on:
22 Mar 2026 01:17 pm
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