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पीएम आवास योजना का हाल बेहाल, हितग्राही परेशान, नौ माह में बदल गए इतने इजीनियर

-जिला मुख्यालय के नगर पालिका ने साल भर में मात्र 42 मकान ही बनवा पाए

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पीएम आवास योजना का हाल बेहाल, हितग्राही परेशान, नौ माह में बदल गए इतने इजीनियर

पीएम आवास योजना हाल बेहाल, हितग्राही परेशान, नौ माह में बदल गए इतने इजीनियर

जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय में प्रधानमंत्री आवास योजना का बेहद बुरा हाल है। जिला मुख्यालय के नगर पालिका ने साल भर में मात्र 42 मकान ही पूरा बनवा पाए हैं। जबकि पालिका को हर हाल में कम से कम 50 फीसदी यानी 156 मकान पूरा बनवाना था। इसके पीछे वजह सीएमओ की कार्यकुशलता का अभाव बताया जा रहा है। इतना ही पालिका के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों की कार्यकुशलता का अभाव भी माना जा रहा है। हितग्राही समय पर मकान बनाना चाह रहे हैं, लेकिन कर्मचारी ही उन्हें हीला हवाला कर योजना के तहत मिलने वाली राशि समय पर जारी नहीं कर रहे हैं। इसके चलते लक्ष्य के अनुरूप योजना के तहत मकान नहीं बन पा रहा है।

नगरपालिका जांजगीर नैला में प्रधान मंत्री आवास योजना की स्थिति बेहद खराब है। साल भर पहले शुरु हुई योजना के तहत नगरपालिका जांजगीर को 312 मकान बनाने का लक्ष्य मिला है। जिसमें अब तक केवल 42 मकान ही पूरा बन पाया है। किसी को पैसा नहीं मिलने की वजह से योजना के तहत काम अटका है। वहीं जिसका मकान बन भी गया है उसे पूरी राशि नहीं मिल पाई है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने पर विभागीय अधिकारी पलीता लगाने कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

हितग्राही योजना के तहत समय पर मकान बनाना चाह रहे हैं, लेकिन शासन की ओर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। बीच में शहर में पानी की किल्लत की वजह से मकान निर्माण का कार्य अटका पड़ा था, तो कहीं-कहीं पर मकान के डिजाइन को लेकर इंजीनियरों द्वारा रोड़ा अटकाया जा रहा था। कई स्थानों में हितग्राहियों के द्वारा भी घोर लापरवाही बरती गई थी। क्योंकि उन्हें पैसा मिलने के बाद दीगर काम में खर्च कर दिया जा रहा था। इसके चलते मकान निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
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9 माह में बदले चार इंजीनियर
नगरपालिका जांजगीर नैला में बीते 9 माह में चार इंजीनियर बदले जा चुके हैं। पहले इस काम की जिम्मेदारी इंजी. साहू के जिम्मे थी। उनका स्थानांतरण होने के बाद इंजीनियर सोनी ने तीन माह काम काज को देखा। इसके बाद इंजी. श्रीवास ने तीन माह तक फाइल का निपटारा किया। उनका स्थानांतरण सारागांव हो गया। इसके बाद पिछले तीन माह से इंजीनियर नारायण आदित्य के पास फाइल है। इनका काम भी मंथर गति से चल रहा है। इसके चलते योजना का काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।

ऑडिटर की वजह से लटक जाती है फाइल
नगरपालिका के अधिकारियों का कहना है कि योजना के तहत फाइनल टच ऑडिटर द्वारा किया जाता है। ऑडिटर फाइल की जांच करने के बाद उसमें मोहर लगाता है। इसके बाद हितग्राहियों को राशि जारी होती है। दिलचस्प बात यह है कि ऑडिटर बिलासपुर से सप्ताह भर आता है। इस वजह से फाइल अटकी पड़ी होती है। वर्तमान में इस माह नगरपालिका जांजगीर नैला में अब तक ऑडिटर जांजगीर नहीं आया है। इसके कारण दर्जनों फाइल अटकी पड़ी है। हितग्राही नगरपालिका का चक्कर काटने मजबूर हैं, पर उन्हें योजना की राशि नहीं मिल पा रही है।

-आवास योजना के तहत मकान निर्माण का कार्य चल रहा है। मकान निर्माण का कार्य अभी डेढ़ दो साल तक पूरा करना है। योजना में काफी हद तक हितग्राहियों की लाचारी सामने आ रही है। हमारी ओर से किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा रही है- सुशील शर्मा, सीएमओ, नपा जांजगीर नैला