
मौसमी बीमारियों से निपटने मितानिनों को किया जाएगा हाइटेक, दवा पेटी में इतने बीमारियों से निपटने होंगी दवा
जांजगीर-चांपा. ग्रामीण अंचल में मौसमी बीमारी से निपटने मितानिनों को पिछले साल की भांति इस साल भी हाईटेक किया जाएगा। बारिश के सीजन में महामारी से निपटने उनकी दवा पेटी में 14 बीमारियों से निपटने दवा उपलब्ध कराई जाएगी। गांव में यदि महामारी आता है तो उनका इलाज मितानिन कर सकेंगी। इसके अलावा यदि ग्रामीण अंचल में उल्टी दस्त मलेरिया जैसे महामारी की शिकायत सीधे अधिकारी तक पहुंची तो एएनएम व एमपीडब्ल्यू पर कार्रवाई की गाज गिराई जाएगी।
बारिश के मौसम से निपटने स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारी पुख्ता करने अभी कमर कस ली है। मैदानी स्तर में डॉक्टरों को चौकन्ना करने की बजाए शासन सीधे घर -घर तक पहुंच रखने वाली मितानिनों को हर क्षेत्र में मजबूत करने जा रहा है। उनकी दवा पेटी में १४ प्रकार की दवा डाली जाएगी। ताकि बारिश के दिनों में मौसमी बुखार, सर्दी खांसी, उल्टी दस्त, मलेरिया जैसे बीमारियों से निपटने पहल कर सकें। मितानिनों के पास दवा पेटी में पर्याप्त दवा होंगी। वह बारिश के मौसम में घर -घर जाकर लोगों का हाल -चाल जानेंगी। लोगों के स्वास्थ्य का जाएजा लेंगी। सर्दी -बुखार से लेकर १४ तरह की बीमारी की शिकायत मिलने पर उन्हें दवा प्रदान करेगी।
स्थिति नियंत्रित नहीं होने पर वे मामले की सूचना एएनएम, एमपीडब्ल्यू व बीएमाओ को देंगी। शासन द्वारा गठित कांबेक्ट टीम गांव में शिविर लगाएगी और स्वास्थ्य कैंप में मरीजों का इलाज करेगी। ज्ञात हो कि शासन ने प्रत्येक ग्राम पंचायतों में मितानिन नियुक्त किया है। हालांकि इन्हें शासन की ओर से निर्धारित मानदेय नहीं दी जाती, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के प्रत्येक राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए सहयोग राशि दी जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने सूचना तंत्र को मजबूत करने पूरी ताकत झोंक दी है। मितानिनों को मोबाइल दी गई है। इसके माध्यम से मितानिन अपने एएनएम, एमपीडब्ल्यू को गांव में महामारी की सूचना देंगी। यदि उनका फोन नहीं लगा तो बीएम को सूचना देंगी। यदि अधिकारियों तक मीडिया, ग्रामीण या दीगर माध्यम से महामारी की सूचना मिली तो मैदानी स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है। मितानिनों पर मैदानी स्तर के कर्मचारियों को साफ चेतावनी दे दी गई है कि वे सूचना तंत्र को मजबूत रखें।
मलेरिया का रहता है अधिक खतरा
जिले में हर साल डायरिया व मलेरिया से आधा दर्जन जान जाती है। लोग दूषित पानी पीकर बीमार पड़ते हैं, तो वहीं घरों के आसपास की गंदगी के कारण मलेरिया की चपेट में आते हैं। उन्हें बीमारी का पता तब चलता है जब वे गंभीर अवस्था में बिस्तर में पड़ते हैं। पहले वे गांव के झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराते हैं। जब उनका मर्ज बढ़ते जाता है तब शहर के बड़े डॉक्टरों का सहारा लेते हैं। गांवों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है तब शासन के कान खड़े होते हैं और गांव में शिविर लगाकर ऐसे मरीजों का उपचार किया जाता है। गांवों में ऐसी स्थिति से निपटने हर साल लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ाया जाता है, लेकिन हर बार किसी न किसी गांवों में डायरिया व मलेरिया से जान जाना तय है।
-बारिश के दिनों में मौसमी बीमारी से निपटने मितानिनों को डें्रड किया जाएगा। क्यों कि मितानिन ही मैदानी स्तर पर काफी जानकारी रखतीं हैं। उनके दवा पेटी में १४ तरह की बीमारी से निपटने दवा प्रदान की जाएगी। ताकि ग्रामीणों का मितानिन प्राथमिक उपचार कर सके- डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ
Published on:
18 Jun 2018 01:42 pm
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