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आजादी के पर्व पर मंडरा रहे संकट के बादल, पानी और कीचड़ से भरे मैदान में आखिर कैसे होगी परेड

बारिश हुई तो कार्यक्रम में खलल

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बारिश हुई तो कार्यक्रम में खलल

आजादी के पर्व पर संकट के बादल

जांजगीर-चांपा. जिला मुख्यालय के एक मात्र खेल मैदान में बारिश का पानी भरा हुआ है। इसके कारण इस खेल मैदान में होने वाले आजादी के पर्व पर संकट के बादल मंराड रहे हैं। हालांकि इस आयोजन के लिए अभी पांच दिन बाकी है, यदि बारिश नहीं हुई तो मैदान सूख जाएगा, लेकिन यदि बारिश हुई तो कार्यक्रम में खलल पडऩा तय है।


वर्तमान स्थिति की बात की जाए तो मैदान के आधे भाग में पानी भरा हुआ है। इससे मैदान में रिहर्सल करने छात्र व पुलिसकर्मियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, जाज्वल्य देव महोत्सव जैसे जिले में होने वाले सभी बड़े कार्यक्रम इसी हाईस्कूल मैदान में आयोजित होते हैं। इस बार लगातार हो रही बारिश ने प्रशासन को परेशान कर दिया है। भले ही पर्व के लिए पांच दिन शेष हों, लेकिन मुख्य परेशानी रिहर्सल को लेकर हो रही है।


गौरबतलब है कि आजादी से आज तक एक मात्र हाईस्कूल मैदान में ही हर तरह के राष्ट्रीय कार्यक्रम के अलावा मेला, प्रदर्शनी सहित सारे आयोजन होते आ रहे हैं। अन्य मौसम में कार्यक्रम बेहतर ढंग से संचालित हो जाता है, लेकिन इस बार की बारिश ने जिला प्रशासन को सांसत में डाल दिया है। दरअसल इन दिनों लगातार बारिश हो रही है।

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बारिश का पानी मैदान में जमा हो गया है। हालांकि आधे मैदान पानी भरा है। आधा मैदान सूखा है। यदि आने वाले दिनों में बारिश हो जाए तो मैदान में पानी भर जाएगा और पानी के बीच किसी भी सूरत में रिहर्सल नहीं किया जा सकता। हालांकि हर साल यहीं रिहर्सल व आयोजन होता है, लेकिन इस बार मैदान में पानी अधिक नजर आ रहा है। समस्या को लेकर अधिकारी चिंतित हैं मैदान को सूखा करने कोई जतन करना पड़ेगा, या फिर बजरी या डस्ट पाटकर उसे सुखाना पड़ेगा। ताकि बच्चे व पुलिस जवान रिहर्सल कर सके।


वृहद स्तर पर होता है रिहर्सल
हाईस्कूल मैदान में पुलिस के द्वारा परेड की तैयारी की जाती है। इसके अलावा स्कूली छात्रों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम व अन्य आयोजनों की तैयारी की जाती है। पंद्रह अगस्त की तैयारी के लिए लगभग एक अगस्त से ही तैयारी शुरू कर दी जाती है, लेकिन इस बार आधे मैदान में बारिश का पानी भर गया है। इससे आधे मैदान में ही काम चल रहा है। आधे मैदान में टेंट के कर्मचारी भरे पानी के बीच टेंट लगाने मजबूर हैं। मैदान में पानी को लेकर आयोजकों की चिंता बढ़ गई है।