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नागपंचमी पर दहला पहाड़ में लगेगा मेला, नागदेवता की होगी पूजा

- जहरीले जीव-जन्तु हैं उनके लिए दूध विष के समान है। यदि वे दूध ग्रहण करेंगे तो उनकी मृत्यु हो जायेगी।

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नागपंचमी पर दहला पहाड़ में लगेगा मेला, नागदेवता की होगी पूजा

नागपंचमी पर दहला पहाड़ में लगेगा मेला, नागदेवता की होगी पूजा

जांजगीर-चांपा. हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नागपंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। बुधवार को नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। नागपंचमी के दिन सर्प जैसे विषैले जीव को भी दूध पिलाकर सत्कार करने की परंपरा है। इस परंपरा के पीछे एक गहरा संदेश भी छिपा है। अगर शत्रु आपके द्वार पर हिंसा की भावना से प्रवेश करे और आप उसका स्वादिष्ट भोजन से सत्कार करें तो काफी हद तक संभावना है कि शत्रु का आपके प्रति व्यवहार नरम अवश्य हो जाएगा।

सर्प भी किसी सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते है। सारे जीव-जन्तु अपने बिल से बाहर निकलकर किसी सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते हैं। ऐसे में ये जहरीले जीव-जन्तु हमारे घर में प्रवेश करके हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। गांवों में आज भी जो पुराने मकान है, उनमें घर के मुख्यद्वार पर ऊंची देहरी बनी होती है।

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जीव-जन्तुओं के लिए बार्डर रेखा का काम करती है, जिससे आसानी से कोई जीव-जन्तु हमारे घर में प्रवेश नहीं कर पाता है। नागपंचमी के दिन देहरी पर मिट्टी की कटोरी में दूध रखा जाता है। यदि कोई जहरीला जीव-जन्तु घर में प्रवेश करने की कोशिश करेगा तो वह सबसे पहले रात्रि के अंधेरे में चमकते हुए दूध देखकर आकर्षित होगा और ग्रहण करेगा।

घर की देहरी पर क्यों रखते है दूध
जितने भी जहरीले जीव-जन्तु हैं उनके लिए दूध विष के समान है। यदि वे दूध ग्रहण करेंगे तो उनकी मृत्यु हो जायेगी। जैसे कहा जाता है कि शराब पीने के बाद दूध का सेवन न करे, क्योंकि शराब पीने के बाद दूध का सेवन करने से वह शरीर में जहर बन जाएगा। ठीक उसी प्रकार मान्यता है कि यदि सर्प के जहर के साथ दूध मिलने पर उसकी मृत्यु हो जायेगी।

कैसे करें पूजा
नागपंचमी पूजन स्नान ध्यान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। पूजन के लिए सेवई व चावल आदि ताजा भोजन बनाये। कुछ भागों में नागपंचमी से एक दिन पहले भोजन बनाकर रख लिया जाता है और उसी भोजन को नागपंचमी के दिन सेवन किया जाता है। इसके बाद दीवार पर गेरू से पोतकर पूजन का स्थान बनाया जाता है। तत्पश्चात कच्चे दूध में कोयला घिस कर गेरू पुती दीवार पर घर बनाकर अनेक नागदेवताओं की आकृति बनाते हैं। कुछ जगहों पर सोने, चांदी व लकड़ी की कलम से हल्दी व चन्दन की स्याही से मुख्य दरवाजे के दोनों साइड में पांच-पांच फनों वाले नागदेवता के चित्र बनाते हैं। सर्वप्रथम नागों की बाबी में एक कटोरी दूध चढ़ाते हैं उसके बाद दीवार पर बने नागदेवताओं की दही, दूर्वा, चावल, दूर्वा, सेमई व सुगन्धित पुष्प व चन्दन से पूजन करते है।