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मितानिनों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य विभाग के ये पांच सूत्रीय कार्यक्रम पूरी तरह से बेपटरी

टीकाकारण प्रसव योजना सहित अन्य स्वागत कार्य पखवाड़े भर से ठप

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टीकाकारण प्रसव योजना सहित अन्य स्वागत कार्य पखवाड़े भर से ठप

टीकाकारण प्रसव योजना सहित अन्य स्वागत कार्य पखवाड़े भर से ठप

जांजगीर-चांपा. मितानिनों की हड़ताल से जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। गर्भवती महिलाओं को एक ओर उनका खुराक नहीं मिल पा रहा है वहीं शिशुओं को नियमित टीकाकरण नहीं लग पा रहा।

वहीं टीवी, कुष्ठ रोग सहित अन्य रोगों के मरीजों को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं सरकार इनकी मांगों पर विचार नहीं कर रही। जिसके चलते इनकी हड़ताल और चरम स्थिति में पहुंचते जा रही है।


पिछले पखवाड़े भर से अधिक समय से जिले के तकरीबन दो हजार मितानिनें जांजगीर के कचहरी चौंक में पंडाल लगाकर हड़ताल कर रहीं हैं। उनकी मांगें है कि सरकार केंद्र सरकार से मिलने वाले मानदेय के अलावा राज्य सरकार से भी 100 प्रतिशत राज्यांस मानदेय प्रदान करे। इसके लिए राज्य सरकार ने जुलाई 2013 में घोषणा भी की थी। घोषणा करने के बाद भी सरकार उनका मानदेय नहीं बढ़ा रही है।

इतना ही नहीं राज्य सरकार उनके मानदेय में हर साल 15 प्रतिशत बढ़ोतरी की बात भी की थी। वह घोषणा भी दफ्तरों में धूल फांक रही है। जिसके चलते उनके बाल बच्चों को भूखों मरने की नौबत आ रही है। इन मांगों को लेकर प्रदेश भर की मितानिन पिछले पखवाड़े भर से हड़ताल पर हैं।

वे अपनी मांगों को लेकर लगातार हड़ताल कर रहीं हैं, लेकिन सराकर के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। मितानिन संघ के जैजैपुर के पदाधिकारी प्रेम बाई बंजारे ने बताया कि सरकार हमसे 12 घंटे काम ले रही है, लेकिन उन्हें तीन से चार हजार रुपए ही दिया जा रहा है जो न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।

इस काम के लिए उन्हें माह के 30 में 30 दिन तक अपने रिश्तेदारी में भी जाने को नहीं मिलता। जिसके चलते उन्हें इस काम से मोह भंग हो रहा है।


तीन तरह के कार्यकर्ता हैं हड़ताल पर
मितानिनों के संघ में तीन तरह के कार्यकर्ता शामिल हैं। जिसमें ब्लॉक कोआर्डिनेटर, स्वास्थ्य पंचायत समन्वय एवं हेल्पडेस्क कार्यकर्ता। इन तीनों ग्रुप के कर्मचारियों को मितानिन कहा जाता है। बीसी को जहां तकरीबन 10 हजार रुपए मानदेय दिया जाता है। स्वास्थ्य पंचायत को तकरीबन पांच हजार रुपए मानदेय मिलता है। वहीं हेल्पडेस्क कार्यकर्ता को तीन हजार रुपए के करीब मानदेय मिलता है। इनकी मांगे यदि मान ली जाती है तो उनका जीवन स्तर बढ़ सकता है। परिवार के सदस्य न्यूनतम जीवन स्तर जीवन जीने के लायक हो सकतीं हैं।


10 साल तक फ्री में काम कर चुके हैं मितानिन
मितानिन संघ के जिला अध्यक्ष संतोष लहरे ने बताया कि सरकार हमसे बीते 10 साल तक फ्री में काम करा चुकी है। वे हर काम को करने के लिए सक्षम हो चुके हैं। यहां तक कि स्वास्थ्य विभाग का पूरा काम उनके कंधों पर टिकी हुई है। स्वास्थ्य विभाग का मैदानी स्तर का पूरा काम उनके बूते होता है। इसके बाद भी सरकार उनके मानदेय में बढ़ोतरी के लिए ध्यान नहीं दे रही है। जिसके चलते वे हड़ताल पर अडिग़ हैं। उनका कहना है कि सरकार जब तक उनकी मांगें नहीं मानती तब तक वे हड़ताल पर डटी रहेंगी।

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ये काम प्रभावित
-गर्भवती महिलाओं का प्रसव योजना प्रभावित
-परिवार भ्रमण कार्य प्रभावित
-टीवी कुष्ठ रोगों की जांच कार्य प्रभावित
-टीकाकरण योजना ठप
-स्मार्ट कार्ड योजना ठप
-पंचायत का कार्य प्रभावित
-गर्भवति महिलाओं का पोषण कार्य ठप

मैदानी स्तर का कार्य पूरा
स्वास्थ्य विभाग का मैदानी स्तर का कार्य पूरा काम मितानिनों से लिया जाता है। उनकी हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग का काम प्रभावित हो रहा है। खासकर गर्भवती महिलाओं व शिशुओं का टीकाकरण योजना ठप है।
-डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ