सीएमओ मंशाराम निगवाल के कार्यालय में नहीं होने के कारण कुछ देर इंतजार करने के बाद सीएमओ रहवासियों से मिलने कार्यालय पहुंचे। रहवासियों ने बतायाकि जबसे कॉलोनी बनी तबसे पानी की समस्या है। नगरपालिका अधिकारियों और हाउसिंग बोर्ड अधिकारियों के समक्ष पहले किए प्रदर्शन के बाद पहले सप्ताह में एक दिन पानी दिया जाता था। कॉलोनी में डाली गई पाइप लाइन कई जगह से फूटी होने से जलप्रदाय के दौरान प्रेशर कम आता है। जल प्रदाय का समय भी 15 मिनट से ज्यादा नहीं रहता। पानी पर्याप्त नहीं मिलने से परेशानी हो रही है। अब तो कॉलोनी में 2 महीने से जल प्रदाय बंद है। कॉलोनी की भौगोलिक स्थिति के अनुसार भूमिगत जल स्तर भी सामान्य से नीचे है। इससे बोरिंग करने के बाद भी गर्मी शुरू होने से पहले ही यहां के बोरिंग सूख चुके है। गर्मियों में नए बोरिंग करने की इजाजत नहीं दी जा रही है। इससे गर्मियों में गुजरा करना असंभव है। कॉलोनी वासियों ने अपने साथ किए जा रहे इस भेदभाव का कारण भी पूछा जिसका सीएमओ ने गोलमाल जवाब दिया। परिसर में माहौल देखकर आसपास भीड़ जमा हो गई। आधे घंटे तक रहवासियों और सीएमओ के बीच गरमागरम बहस के बाद कॉलोनी के रहवासी राघवेंद्र सिसौदिया, नीतिराज सिंह, भूपेश सिंगोड़, अरविंद दातला, मुकेश बुंदेला, समय , भारत बामनिया ने बताया कि पानी मूलभूत सुविधा है और जीवन के लिए सबसे उपयोगी कॉलोनी में व्याप्त अन्य समस्या के बीच रहवासी गुजर बसर कर रहे हैं। अधिकारियों की कार्यशैली समझते हुए कभी शिकायत नहीं की। पानी भी दो महीने से मोल खरीदकर पी रहे हैं। इसके बाद सब्र का बांध टूट गया है। पुरानी हाउसिंग बोर्ड में बसने वाले हजारों लोगों के लिए नियमित जलप्रदाय शुरू करने की मांग न मानने पर उग्र आंदोलन करने की चेतावनी देकर रहवासी लौट गए।