
अभिषेक ओझा @झालावाड़। Mandi News: राजस्थान के नागपुर के नाम से प्रसिद्ध भवानीमंडी में संतरा न सिर्फ लोगों के जुबां पर चढ़ा हुआ है बल्कि 200 करोड़ के इस कारोबार से हजारों लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। यहां के संतरों का स्वाद पूरे देश में पहचान बनाये हुए है। इसके चलते भवानीमंडी में रोजगार के साधन भी बढ़ रहे हैं। यहां दो तरह के संतरे की क्वालिटी है। सर्दी में आने वाला अम्बिया और गर्मी में यह मृग कहलाता है। पूरे साल में करीब पांच हजार टन संतरा मण्डी में पहुंचता है। मंडी सूत्रों के अनुसार मण्डी में उत्पादन का दस प्रतिशत माल ही आता है। शेष सीधे ही व्यापारी बगीचों से ले जाते हैं।
ऐसे मिल रहा रोजगार:
भवानीमंडी की संतरा मंडी देश में दूसरे स्थान पर है। यह राजस्थान में एकमात्र संतरा मंडी है। मंडी में एक हजार से अधिक श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। साथ ही ट्रांसपोर्ट, कैंटीन, ढाबे का व्यवसाय भी यहां खूब फल-फूल रहा है। संतरों की पैकिंग के लिए पहले कैरेट्स बाहर से मंगवाने पड़ते थे। अब मांग को देखते हुए यहां कैरेट्स की दो फैक्ट्रियां शुरू हो गई हैं। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध हुआ है। पैंकिंग के समय चावल की घास का उपयोग होता है। इससे चावल उत्पादकों को भी फायदा मिल रहा है।
एक्सप्रेस-वे से जल्द पहुंचेगा माल:
वर्तमान में संतरों को बाहर भेजने के लिए काफी लम्बा मार्ग तय करना पड़ता है। हाल ही में एक्सप्रेस वे का भवानीमंडी के पास रतनपुरा नीमथूर से लेदी चौराहा होते हुए 21 किलोमीटर का मार्ग भवानीमंडी से जोड़कर बनाया जाएगा। इससे व्यापारियों को आसानी होगी। कुछ दूरी पर ही एक्सप्रेस- वे से संतरे जल्दी ही बाहर एक्सपोर्ट हो सकेंगे।
तीन तरह के संतरों की छंटनी:
मंडी में आने वाले संतरों की छंटनी तीन तरह की वैरायटी के आधार पर की जाती है। इसमें बड़ा, मध्यम और छोटा संतरा अलग निकाला जाता है। बड़े संतरे को बाहर भेजा जाता है। मध्यम संतरा शहरों में और छोटे संतरे को आसपास के गांवों और कस्बों में बेचा जाता है।
Published on:
30 Mar 2023 03:34 pm
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