
मुखिया के घर के कॉलेज बिन मुखिया
झालावाड़./हरिसिंह गुर्जर सरकार ने द्वितीय व तृतीय श्रेणी शिक्षकों की भर्ती कर भले ही जिले के सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षक लगा दिए हों लेकिन सरकार का ध्यान उच्च की ओर नहीं है। ऐसे में सरकार की मुखिया के घर में जिले के सातों कॉलेज बिना मुखिया के ही चल रहे हैं।
जिले के सात महाविद्यालयों में एक में भी स्थायी प्राचार्य नहीं है। ऐसे में स्थायी प्राचार्य नहीं होने से महाविद्यालयों में होने वाली विकास समिति की बैठकें भी नहीं हो पायी है। तो आहरण-वितरण से जुड़े कामों में भी महाविद्यालय कर्मचारियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तो कई महाविद्यालयों में व्या?याताओं को तीन-तीन माह में वेतन मिल रहा है। तो महाविद्यालयों में मुखिया (प्राचार्य) नहीं होने से आधा जुलाई माह निकल चुका है,लेकिन कहीं भी अभी पढ़ाई का माहौल नहीं बन पाया है। जिले के सभी महाविद्यालयों में ७० फीसदी व्या?याताओं की भी कमी चल रही है। रही कसर हाल में जिले के महाविद्यालयों से करीब १८ व्या?याताओं का ट्रांसफर अन्य महाविद्यालयों में कर दिया गया है। जबकि यहां लगाया किसी को नहीं गया है। ऐसे में शिक्षाविदें का कहना है कि जिले में बिलकुल उल्टे हालात है, यह सीएम क्षेत्र होने के बाद तो यहां सभी महाविद्यालयों में पूरा स्टाफ होना चाहिए था जबकि यहां महाविद्यालयों में किसी में भी प्राचार्य ही नहीं, तो व्या?याताओं सहित अन्य कर्मचारियों की भी खासी कमी चल रही है। बाबूओं की कमी के चलते उनका काम भी चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों से करवाना पड़ रहा है।
होगी परेशानी-
कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य नहीं होने से कार्यवाहक प्राचार्य निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। जिले में चार साल से जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। उच्च शिक्षा का पूरा सिस्टम बदहाल नजर आ रहा है। महाविद्यालयों में कोई नवाचार नहीं हो रहे हैं। तो गत वर्ष भी स्थायी प्राचार्य नहीं होने से छात्रसंघ चुनाव में खासी परेशानी हुई थी। बिना प्राचार्य के व्या?याता एक दूसरे से पूछते रहे। रात साढ़े नौ बजे तक भी महाविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ चुनाव को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पाया था। ऐसी स्थिति में रात को परिणाम जारी किया गया था। ऐसी स्थिति में महाविद्यालय के युवा नेताओं में झड़प भी हुई थी। ऐसे में समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो कहीं फिर से इस बार होने वाले चुनाव में ऐसे ही हालात नहीं बन जाएं। तो सरकार को जिले के सभी महाविद्यालयों में समय रहते प्राचार्यों की नियुक्ति करनी चाहिए।
महाविद्यालय खोल दिए, एक भी कर्मचारी नहीं भेजे-
जिले में सरकार ने चार नए महाविद्यालय खोले है। लेकिन एक में भी कॉलेज आयुक्तालय से स्थाई कर्मचारी नहीं भेजा हैं। ऐसे में सभी महाविद्यालयों में इधर-उधर से जुगाड़ कर प्रतिनियुक्ति पर ही व्या?याता लगा रखे हैं। तो प्राचार्य भी नहीं होने से किसी प्रतिनियुक्ति पर लगे व्या?याता को ही कार्यभार दे रखा है। ऐसे में वह भी नियमों का जानकार नहीं होने व आहरण-वितरण का अधिकार नहीं होने से अच्छे से काम नहीं कर पाता है। ऐसे में महाविद्यालयों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। ऐसे हालात में रूसा व यूजीसी भेले ही कॉलेजों को अनुदान दे रही हो, लेकिन उसका सही जगह उपयोग नहीं हो पा रहा है। तो कई महाविद्यालयों में स्थायी प्राचार्य सहित अन्य संसाधनों की कमी से बजट भी नहीं मिल पा रहा है। प्रतिनियुक्ति पर लगाए जाने वाले प्राचार्य अपना समय निकालने के हिसाब से ही काम करते हैं। वह कोई रिस्क नहीं लेते हैं, इसके चलते वह महाविद्यालय में कोई नया काम नहीं करते हैं।
सीएम की विधानसभा में भी नहीं कोई मुखिया-
प्रदेश की मु?िाया वसुन्धरा राजे की विधानसभा झालरापाटन में तीन महाविद्यालय आते हैं लेकिन तीनों में भी प्राचार्य नहीं है। जबकि जनप्रनिधियों का प्रयास रहता हैकि अपने क्षेत्र के सभी संस्थानों में पूरा स्टाफ हो। लेकिन इस ओर मुखिया का शायद ध्यान नहीं गया है, जिले के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सीएम को अवगत नहीं कराया है। इसलिए ही ऐसे हालात बने हुए है। नहीं तो सीएम के गृह जिले में तो पूरा स्टाफ होना चाहिए। या ऐसा लगता है कि कॉलेज आयुक्तालय के अधिकारियों काभी इस ओर कोई ध्यान नहीं है। इसी के चलते सीएम के गृह जिले में ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं।
आठ हजार से अधिक छात्रों का भविष्य दांव पर-
जिले के सातो महाविद्यालयों में करीब ८ हजार छात्र नियमित अध्ययन करते हैं। लेकिन सभी में मुखिया सहित व्या?याताओं की खासी कमी चल रही है। जुलाई माह आधा निकलने के बादभी एक भी महाविद्यालय में अभी तक अध्ययन शुरू नहीं हो पाया है। स्टाफ की कमी के चलते जो व्याख्याता है वह अभी प्रवेश प्रक्रिया में ही उलझे हुए है। वहीं जिले के सबसे बड़े पीजी महाविद्यालय से व्याख्याताओं को जिले के अन्य महाविद्यालयों में लगाने से हाड़ौती का सबसे बड़ा महाविद्यालय पूरा खाली हो गया है।
महाविद्यालय कब से स्थायी प्राचार्य नहीं
१. पीजी कॉलेज झालावाड़ डॉ.सुनील भागर्व के बाद २०१५ से कोई नहीं
२.गल्र्स कॉलेज झालावाड़ प्रो. पीएन शर्मा के बाद २०१६ से कोई नहीं
३. भवानीमंडी डॉ.अनीता गुप्ता के बाद से कोई नहीं
४. मनोहरथाना गिर्राज गोयल के बाद २०१७ से कोई नहीं
५.पिड़ावा खुलने के बाद से कोई प्राचार्य नहीं मिला
६.चौमहला खुलने से बाद से कोई प्राचार्य नहीं मिला
७.खानपुर यहां ?ाी कार्यवाहक प्राचार्य का ही भरोसा
यह कहना है जिम्मेदारों को-
झालावाड़ में जिन महाविद्यालयों में प्राचार्यों की पोस्ट वैकेंट है, अभी डीपीसी होनी है। इससे सभी में प्राचार्य लगा दिए जाएंगे। छात्रों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
आरपी शर्मा, अतिरिक्त कालेज आयुक्त, आयुक्तालय, जयपुर।
अभी एडमिशन प्रोसेस चल रहा है। फिर भी अध्ययन तो शुरू हो गया होगा। झालावाड़ में नहीं हुआ है तो पता करवाती हूं।
ज्योत्सना भारद्वाज, संयुक्त निदेशक, एकेडमिक, कॉलेज आयुक्तालय, जयपुर
Published on:
19 Jul 2018 12:29 pm
