
झालरापाटन . दशहरा मैदान में एक शतादी से अधिक समय से स्थापित रावण के परिवार के पुतले। फोटो पत्रिका
Dussehra Today : राजस्थान सहित पूरे देश में दशहरे का त्योहार मनाया जा रहा है। झालावाड़ शहर से सटे झालरापाटन के दशहरा मैदान में करीब 185 साल से रावण और उसका कुनबा डटा हुआ है। मिट्टी और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बना रावण का परिवार बारह मास लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। नगरपालिका हर दशहरे पर यहां रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन करती है। सन 1840 के आस-पास झालावाड़ रियासत के पहले नरेश मदनसिंह झाला ने मिट्टी और गोबर से मूर्तियों के रूप में रावण परिवार का निर्माण करवाया था। उसके बाद 1920 में तत्कालीन नरेश भवानी सिंह ने प्लास्टर ऑफ पेरिस मिलाकर इनका पका निर्माण करवा दिया।
आमतौर कुंभकर्ण का पुतला खड़ा ही बनाया जाता है, लेकिन यहां उसे सोते हुए दिखाया गया है। रावण के पुतले की लम्बाई 25 फीट, मंदोदरी, मेघनाद, विभीषण और मारीच के पुतलों की लम्बाई साढ़े चौबीस फीट है। कुंभकर्ण के पुतले की लम्बाई करीब तीस फीट है।
दशहरे पर मंदोदरी के पुतले को वस्त्र पहनाए जाते हैं। शाम को लोग इन वस्त्रों को फाड़कर उसके टुकड़े प्रसाद के रूप में घर ले जाते है। मान्यता है कि मंदोदरी के वस्त्र के टुकड़े घर में रखने से समृद्धि आती है।
नगरपालिका हर साल दशहरे पर इन स्थायी पुतलों पर रंग रोगन और आकर्षक शृंगार करवाती है। इनके मुकुट, आंख, नाक, मुख, हाथ और शरीर पर राजसी वस्त्र चित्रित किए जाते हैं।
Updated on:
02 Oct 2025 10:08 am
Published on:
02 Oct 2025 08:25 am
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