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सपनों का घर बनाने में आड़े आ रही नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली

चुनिंदा लोगों को मिली स्वीकृति : कई लोगों ने कब्जे कर मना लिए आशियाने
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सपनों का घर बनाने में आड़े आ रही नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली

भवानीमंडी. नगरपालिका से मकान निर्माण स्वीकृति नहीं मिलने से लोगों को अपना स्वयं का आशियाना बनाने का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है, जबकी कई जगहों पर बेशकीमती सरकारी जमीन पर समाजकंटकों ने अतिक्रमण कर अवैध मकान निर्माण कर लिए हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नगरपालिका द्वारा करीब ५ सालों में रसुखदार और पालिका गलियारों में पहुंच रखने वाले चुनिंदा लोगों को ही मकान निर्माण स्वीकृति दी है, जबकि सैकड़ों मकान निर्माण स्वीकृति की फाइलें नगरपालिका में धूल खा रही हैं। आवेदन के बाद लोगों के कई बार नगरपालिका के चक्कर काटने के बाद भी पालिका कर्मचारियों द्वारा संतोषपूर्ण जवाब नहीं दिया जाता है। कर्मचारियों द्वारा आवेदनकर्ता को रोजाना एक कमरे से दूसरे कमरे में व दूसरे से तीसरे कमरे में भेजा जाता है। इससे परेशान होकर आवेदनकर्ता मकान निर्माण स्वीकृति की उम्मीद छोड़ देता है।
नहीं मिलते अधिकारी, कुछ का कोटा से अप-डाउन
नाम नहीं छापने की शर्त पर आवेदनकर्ता ने बताया की वह करीब १ साल से नगरपालिका के चक्कर काट रहा है। कभी नगरपालिका में ईओ नहीं मिलते तो कभी कैशियर व कनिष्ट अभियता। जब तीनों अधिकारी मिलते हैं तो उनके पास बात करने तक का समय नहीं होता है। कुछ बाबू तो कोटा से अप-डाउन करते हैं जो ११ बजे तक नगरपालिका पहुंचते हं,ै जो वापस ४ बजे जाने की जुगत में जुट जाते हैं।
सफाई कर्मचारियों को 3 माह से वेतन नहीं
नगरपालिका में कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं होने से पालिका में कार्यरत सफाई कर्मचारियों को ३ माह से तनख्वा का भुगतान तक नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों को परेशनियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ पालिका द्वारा कराए गए विकास कार्यों का काम करने वाले ठेकदारों को भी भुगतान नहीं होने विकास गति भी धीमी हो गई है।
जूंं तक नहीं रेंगती
नगरपालिका की बेश्कीमती जमीन पर लोगों द्वारा अतिक्रमण कर मकान बनाने की शिकायत कई बार नेता प्रतिपक्ष हरीश राठौर एवं कांग्रेस नेताओं द्वारा करने के बाद भी अधिकारियों ने न तो अतिक्रर्मियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की और न ही अतिक्रमण को हटाया। इससे अतिक्रमियों के हौसलें दिन-ब-दिन बुलंद होते जा रहे हैं। अतिक्रमण रूकने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है।
कनिष्ठ अभियंता के पास ही अधीशासी अधिकारी का चार्ज था, लेकिन कांग्रेस में दो गुट होने की वजह से तहसीलदार को चार्ज आया था, लेकिन तहसीलदार ने चार्ज नहीं लिया, इससे लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं।
पिंकी गर्जर, पालिका अध्यक्ष