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स्कूल भवन विस्तार में वन विभाग तो, कहीं पुरातत्व विभाग का रोड़ा

-अभावों में चलने का मजबूर आदर्श उत्कृष्ट व आदर्श विद्यालय
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In the school building expansion, forest department, then the barrier

स्कूल भवन विस्तार में वन विभाग तो, कहीं पुरातत्व विभाग का रोड़ा

स्कूल भवन विस्तार में वन विभाग तो, कहीं पुरातत्व विभाग का रोड़ा
-अभावों में चलने का मजबूर आदर्श उत्कृष्ट व आदर्श विद्यालय
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. जिले में वन विभाग की भूमि पर बने राजकीय उत्कृष्ट उच्च प्राथमिक विद्यालय बूढ़ मंडावर व पुरातत्व विभाग के परिसर में बने राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय गागरोन क्रमोन्नत होने के बाद भी वर्षो से दूसरे विभागों की आपत्ति के कारण भवन विस्तार की परेशानी से जुझ रहे है। क्योकि वन विभाग व पुरात्तव विभाग के आधिपत्य वाले इस स्थान पर कुछ भी नया निर्माण नही किया जा सकता है। भवन की कमी से विद्यालयों में बच्चो को अध्ययन कराने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कभी पेड़ के नीचे व कभी बरामदे में कक्षाएं संचालित करनी पड़ती है। एक ही कक्ष में तीन-तीन कक्षाओं के बच्चों केा बैठाया जाता है। बारिश के दौरान तो स्थिति और बिगड़ जाती है।
-गागरोन स्कूल की स्थिति
राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय गागरोन सन् 1968 में शुरु हुआ था। उस समय प्राईमरी कक्षा के लिए इसे एक कक्ष व एक खुला बरामदा दिया गया था। पांचों कक्षाएं इसमें संचालित थी। 1975 में इसे मिडिल स्कूल में क्रमोन्नत किया गया। उस समय भी भवन की यही स्थिति रही। 2014 में इसे 10वीं तक किया गया व दो कक्षों का जीर्णोद्वार कर काम चलाना शुरु किया गया। 2015 में इसे 12वीं तक क्रमोन्नत कर उच्च माध्यमिक विद्यालय बना दिया गया। वर्तमान में यहां 386 बच्चें है, 21 का स्टाफ है और मात्र 8 कक्ष है जबकि 16 कक्ष की दरकार है। वर्तमान में यहां कम्प्यूटर लेब में 14 कम्प्यूटर आए हुए है, पुस्तकालय के लिए मात्र एक अलमारी है जिसमें 400 से ज्यादा पुस्तके भरी हुई है। पूरा विद्यालय मात्र 106 बाई 65 फिट के क्षेत्र में संचालित हो रहा है।
-हमने विभाग को अवगत करा रखा है
इस सम्बंध में राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय गागरोन, झालावाड़ की प्रधानाचार्या अनीता शर्मा का कहना है कि विद्यालय में भवन विस्तार की आवश्यकता है। इसके लिए हमने विभाग को अवगत करा रखा है।
-वैकल्पिक व्यवस्था का प्रयास करेगे
इस सम्ंबध में माध्यमिक शिक्षा, झालावाड़ के अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश चौधरी ने बताया कि गागरोन में संचालित विद्यालय भवन पुरातत्व विभाग परिसर में है। इसमें नया निर्माण करने में परेशानी आती है। इस सम्बंध में योजना बना कर व उच्चाधिकारियों से मार्ग दर्शन मांगकर वैकल्पिक व्यवस्था करने का प्रयास करेगे।
-बूढ़ मंड़ावर की स्थिति
राजकीय उत्कृष्ट उच्च प्राथमिक विद्यालय बूढ़ मंडावर सन् 1985-86 में शुरु हुआ था। उस समय प्राईमरी कक्षाओं के लिए इसे दो कक्ष दिए गए थे। पांचों कक्षाएं इसमें संचालित थी। 1994 में यहां एक और कक्ष का निर्माण हुआ। 2013 इसे मिडिल स्कूल में क्रमोन्नत किया गया। उस समय से ही भवन की यही स्थिति है। वर्तमान में यहां 80 बच्चें है, 6 का स्टाफ है और मात्र 3 कक्ष है जबकि आठ कक्ष की दरकार है। पुस्तकालय के लिए मात्र एक बक्सा है जिसमें 400 से ज्यादा पुस्तके भरी हुई है।
-हमने विभाग को अवगत करा रखा है
इस सम्बंध में राजकीय उत्कृष्ट उच्च प्राथमिक विद्यालय बूढ़ मंडावर, झालावाड़ के प्रधानाध्यापक बृजेश शर्मा का कहना है कि विद्यालय में भवन विस्तार की आवश्यकता है। इसके लिए हमने विभाग को अवगत करा रखा है।
-मार्गदर्शन मंगा जाएगा
इस सम्बंध में प्रारम्भिक शिक्षा, झालावाड़ के अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी हरीशंकर शर्मा का कहना है कि बूढ मंडावर में संचालित विद्यालय भवन वन क्षेत्र के परिसर में है। इसमें नया निर्माण करने में परेशानी आती है। प्रकरण की विस्तृत जानकाी लेकर इस सम्बंध में उच्चाधिकारियों से मार्ग दर्शन मांगकर चुनाव बाद वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश की जाएगी।
-नियमानुसार निर्माण नही किया जा सकता है
इस सम्बंध में झालावाड़ के उपवन संरक्षक एन.एल.प्रजापत का कहना है कि वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नियमानुसार वर्जित है। वन भूमि में जितनी जगह विद्यालय को दी है, वहीं रहेगी इससे ज्यादा की स्वीकृति नही दी जा सकती है। हम नियमों से परे निर्माण की स्वीकृति नही दे सकते है।
-मूल स्वरुप से छेडछाड़ नही की जा सकती है
इस सम्बंध में राजकीय संग्रहालय व पुरातत्व विभाग झालावाड़ के प्रभारी संदीप सिंह जादोन का कहना है कि गागरोन किला पुरातत्व विभाग के अधीन है। इसमें किसी भी प्रकार का नया निर्माण मूल स्वरुप को प्रभावित करता है इसलिए यहां किसी भी प्रकार का नया निर्माण कार्य नियमानुसार वर्जित है। किला परिसर में जितनी जगह पर स्कूल संचालित है वहीं रहेगी। इससे ज्यादा की स्वीकृति नही दी जा सकती है। हम नियमों से परे निर्माण की स्वीकृति नही दे सकते है।