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खानपुर श्रीकृष्णानन्द गौशाला के हालात, भूख-प्यास के चलते तडप तडप के मरता गौवंंश

खानपुर में चांदखेड़ी स्थित श्रीकृष्णानन्द गौशाला में कई दिन पुराने शव मिले, बदहाल इंतजाम
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खानपुर श्रीकृष्णानन्द गौशाला के हालात, भूख-प्यास के चलते तडप तडप के मरता गौवंंश

: Khunapur Shrikrishnan Gondhala's situation, due to hunger

खानपुर. कस्बे की चांदखेड़ी स्थित श्रीकृष्णानन्द गौशाला में क्षमता से ज्यादा ठहरा, गंदगी और बदहाल इंतजामों के चलते 5-6 दिनों में लगभग एक दर्जन से ज्यादा गायों की मौत हो गई है। कई दिनों तक समिति द्वारा शवों को नहीं उठाने से आसपास दुर्गंध फैल गई है, शवों में कीड़े पड़ गए हैं।
जानकारी मिलने पर हिन्दू जागरण मंच के जुगल सुमन, बजरंग दल प्रखंड संयोजक सुरेन्द्र सुमन व विश्व हिन्दू परिषद प्रखंड मंत्री राजेन्द्र मेहरा सहित कई लोग गौशाला पहुंचे। यहां पर गायों की दुर्दशा व मौके पर पड़े एक दर्जन से अधिक मृत गायों के शवों को देख गौशाला समिति के पदाधिकारियों को खरी-खोटी सुनाई। गौशाला पहुंचे अध्यक्ष नन्दकिशोर मेहता व सचिव देवलाल वर्मा ने बताया कि बीमार गायों का उपचार कराया जा रहा है। शवों को कोई भी उठाने को तैयार नहीं है। समिति ने विधायक नरेन्द्र नागर व उपखंड अधिकारी डॉ. भास्कर विश्नोई को भी अवगत कराया है। जानकारी मिलने पर पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रहलाद मीणा, वरिष्ठ पशुधन सहायक रामकल्याण बैरवा, बंटी सुमन सहित टीम ने गौशाला पहुंचकर बीमार गायों का उपचार किया। उपखंड अधिकारी डॉ. भास्कर विश्नोई ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी।

कीचड़ व मलबे से सडऩे गए गौवंश के खुर
गौशाला में बदहाल इंतजामों के चलते 3 वर्षों में सैकड़ों गायों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद गौशाला समिति द्वारा व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा गौशाला में कीचड़ व मलबा भरा होने से गीले में रहने से गायों के खुर सडऩे लगे हंै। गौशाला में लगभग 315 गायों पंजीकृत हंै, लेकिन सभी को एक बाड़े में बंद कर देने से कमजोर होकर घुट घुट कर मर रही हैं।
टीनशेड में ठूंस रखा
पशु चिकित्सक डॉ. प्रहलाद मीणा ने बताया कि कई बार समिति को गायों को खुले में छोडऩे की सलाह देते हंै, लेकिन गायों को टीनशेड में ठूंस ठूंस कर भर देने से आपस में लडऩे से घायल होने के बाद कमजोर होकर मर जाती हैं।
घायल-लावारिस गायों की नहीं लाने देते
समाजसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बताया कि कस्बे में घायल व लावारिस गायों को गौशाला में नहीं लाने दिया जाता है। ऐसे में लोगों को हाइवे के किनारे या अन्यत्र स्थानों पर इलाज कराकर सार संभाल करनी पड़ रही है।