दूध का कर्ज दो करोड़ से ज्यादा

दूध का कर्ज दो करोड़ से ज्यादा
दूध का कर्ज दो करोड़ से ज्यादा

Hari Singh Gujar | Publish: May, 03 2019 06:20:04 PM (IST) | Updated: May, 03 2019 06:20:06 PM (IST) Jhalawar, Jhalawar, Rajasthan, India

-अन्नपूर्णा दूध योजना : डेयरी संचालक कर रहे तकाजा, पोषाहार के भी तीन करोड़ बकाया

 

हरि सिंह गुर्जर@/झालावाड़. जिले के स्कूल शिक्षा विभाग की अन्नपूर्णा दूध योजना के कर्ज में डूबे हुए हैं। दो करोड़ से अधिक के बकाया को लेकर शिक्षा विभाग परेशान है। आलम यह है कि दूध विक्रेता रोज स्कूल के शिक्षकों से तकाजा कर रहे हैं। वहीं मिड-डे-मील आयुक्तालय द्वारा तकनीकी खामी के चलते दूध व पोषाहार का भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में शिक्षकों को अपनी जेब से भुगतान देना पड़ रहा है। कई शिक्षक उधारी में ही दूध ला रहे हैं। जब भुगतान होगा उस समय डेयरी संचालकों को भुगतान करने का तकाजा कर रहे हैं। ऐसे में दूध का कर्ज बढ़कर 2 करोड़ 31 लाख रूपए हो गया है। हालांकि बच्चों को दूध व पोषाहार मिल रहा है लेकिन शिक्षकों को उधारी में दूध का प्रबंध करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग लगातार सूचना मांगकर अपडेट कर रहे हैं। तीन उपखंड से अभी तक सूचना नहीं दी गई है। ऐसे में फरवरी 2019 से भुगतान नहीं हो पाया है।

1739 स्कूलों में दिया जा रहा दूध-
जिले में 1739 विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को दूध पिलाया जा रहा है। जिले में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक तथा मदरसे सहित 1739 विद्यालयों के 156512 छात्रों को दूध का वितरण किया जाता है। जिले में सरकार के निर्देशानुसार सरस दूध डेयरी व महिला स्वयं सहायता सूमह व अन्य डेयरी से दूध लिया जा रहा है।

इतने दूध का होता है वितरण-
जिले में दूध का औसत वितरण प्रतिदिन करीब 26145 लीटर होता है। इसमें प्राथमिक स्तर के छात्रों को 150 एमएल, व उच्च प्राथमिक के विद्यार्थियों को 200 एमएल दूध दिया जाता है।

इतनी राशि है बकाया-
जिले में 1 लाख 56 हजार विद्यार्थियों को दिए जा रहे दूध के करीब 2 करोड़ 31 लाख रूपए व पोषाहार का 3 करोड़ 50 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं। हालांकि सभी ब्लॉक से सूचनाएं आ चुकी है, लेकिन झालरापाटन, अकलेरा, सुनेल से अभी तक सूचना नहीं भेजने से भी भुगतान में देरी हो रही है।

अब आरबीआई से होगा भुगतान-
पहले दूध व मिड-डे-मील का भुगतान ट्रेजरी के माध्यम से बैंकों द्वारा स्कूल के खाते में जमा करा दिया जाता था, लेकिन अब ई-कुबेर के जरिये सीधे आरबीआई द्वारा स्कूलों के खातों में भुगतान किया जाएगा। इसके लिए स्कूलों के खाता संख्या व आदि जानकारियां अपडेट की जाएगी। उसके बाद ही भुगतान होगा।


ऐसे शुरू हुई थी योजना-
विद्यार्थियों को सप्ताह में तीन दिन दूध देने की योजना सरकार ने दो जुलाई 2018 को शुरू की थी। जिले में संचालित सरकारी विद्यालयों के 1 लाख 56 हजार विद्यार्थियों को अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत सप्ताह में तीन दिन दूध पिलाया जा रहा था, लेकिन इसे बाद में प्रतिदिन कर दिया गया है।

खाता नंबर ले रहे हैं-
जिले में दूध योजना का दो माह का करीब ढाई करोड़ का भुगतान बकाया चल रहा है। सभी स्कूलों के संस्था प्रधानों से ई-कुबेर के लिए खाता सं?या, आईएफएससी नंबर आदि लिए जा रहे हैं। सभी जानकारी आने के बाद खातों में भुगतान कर दिया जाएगा।
पुरुषोत्तम माहेश्वरी, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारंभिक, झालावाड़

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