नायब भवानी नाट्यशाला फिर बिखेरेगी आभा...

-पांच करोड़ से निखर रही हमारी धरोहर

By: jitendra jakiy

Updated: 03 Mar 2019, 10:46 AM IST

नायब भवानी नाट्यशाला फिर बिखेरेगी आभा...
-पांच करोड़ से निखर रही हमारी धरोहर
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. गढ़ भवन परिसर में स्थित एशिया में प्रसिद्व पारसी आपेरा शैली की भव्य भवानी नाट्यशाला का भवन अब जीर्णोद्वार व सौंदर्यकरण के बाद पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदू बनेगा। रियासत काल में इसके निर्माण के बाद कालान्तर में यह भव्य इमारत उपेक्षित होकर जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी थी। इन दिनो पुरातत्व एंव संग्रहालय विभाग की ओर से इस भव्य धरोहर के सरंक्षण व जीर्णोद्वार का कार्य मुख्यमंत्री बजट घोषणा वित्तीय वर्ष 2018-19 के तहत 4 करोड़ 21 लाख की लागत से चल रहा है। अभी तक करीब 1 करोड़ 9 लाख की लागत से करीब 45 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके लिए 44 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। भवानी नाट्यशाला के जीर्णोद्वार का यह कार्य 21 अगस्त 2018 से शुरु हुआ व कार्य पूर्ण की तिथि 31 अगस्त 2021 रखी गई है। कार्य के तहत भवानी नाट्यशाला के जीर्णोद्वार, दीवारों पर प्लास्टर, फर्श व दरवाजे खिड़कियों की मरम्मत कार्य और कलात्मक स्तम्भ व कलाकृतियों का रासायनिक उपचार कर सौंदर्यकरण का काम किया जा रहा है।
-मिलेगी नई सुविधाएं
भवानी नाट्यशाला में हॉल में दर्शकों के लिए स्थाई बेंच व कुर्सियां आदि लगाई जाएगी। ताकि समारोह के दौरान कुर्सिया आदि की व्यवस्था अलग से नही करना पड़े। परिसर में उद्यान विकसित किया जाएगा। नई जन सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। पूरी भवानी नाट्यशाला को रंग रोगन कर सजाया व संवारा जाएगा।
-यह है गौरवशाली इतिहास
इतिहासकार ललित शर्मा ने बताया कि पारसी औपेरा शैली में वास्तुकला की भव्यता लिए अनेक देशी व विदेशी नाटकों के लिए प्रसिद्ध भवानी नाटय शाला समस्त उत्तर भारत मेें अपने ढ़ंग का एक मात्र प्रेक्षागृह है। विश्व रंगमंच की इस विस्मयकारी धरोहर मेंं जहा एक ओर पारम्परिक नाटकों की सुंदर प्रस्तुति रही है, वहीं पश्चिमी नाटकों की बयार भी यहां जीवंत रुप में प्रसारित हुई है। इस नाट्यशाला के कल्पनाकार थे झालावाड़ राज्य के तत्कालीन होम एवं मिलिस्ट्री मेम्बर ठाकुर उमराव सिंह, जिन्होने यूरोप यात्रा के दौरान अपने अर्जित ज्ञान से कोयले द्वारा पाषाण पट्टिका पर इस नाट्यशाला का नक्शा बनाया और इसी से प्रभावित होकर इस नाट्यशाला को मूर्त रुप दिया यहां के कलाप्रिय शासक महाराजराणा भवानी सिंह ने। इसका निर्माण 1920 में शुरु हुआ व उद्घाटन के अवसर पर 16 जुलाई 1921 को पहला नाटक महाकवि कालीदास द्वारा विरचित अभिज्ञान शाकुंतलम खेला गया जो मूल संस्कृत का हिंदी अनुवाद था। इसके बाद यहां रियासतकाल में व आजादी के बाद भी कई नाटकों का मंचन हुआ।
-मूल स्वरुप में निखारने का प्रयास
इस सम्बंध में पुरातत्व एवं संग्रहालय झालावाड़ के प्रभारी संदीप सिंह जादौन ने बताया कि भव्य धरोहर भवानी नाट्यशाला को विभाग की ओर से मूल स्वरुप में निखारने का प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल इसका 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

jitendra jakiy Photographer
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