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राजस्थान के किसानों की घटेगी लागत और बढ़ेगी आय, जानें क्या है सरकार की कस्टम हायरिंग सेंटर योजना

Rajasthan News: योजना के तहत संचालित यह पहल खेती को अधिक आसान, सस्ती और उत्पादक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को एक ही स्थान पर विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध होंगे, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

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Farmers News

File Photo: Patrika

Custom Hiring Center For Farmers: राजस्थान में खेती अब तेजी से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रही है, लेकिन महंगे कृषि यंत्र छोटे और सीमांत किसानों के लिए अब भी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकार की कस्टम हायरिंग सेंटर योजना किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत अब ग्राम पंचायत स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जहां से किसान आधुनिक कृषि उपकरण किराए पर आसानी से ले सकेंगे। इससे किसानों को महंगे यंत्र खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उनकी लागत में सीधा फायदा होगा।

सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन

योजना के तहत संचालित यह पहल खेती को अधिक आसान, सस्ती और उत्पादक बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को एक ही स्थान पर विभिन्न कृषि यंत्र उपलब्ध होंगे, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।

500 केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य

राज्य वित्तीय वर्ष 2026-27 में 500 केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत 30 लाख रुपए की परियोजना लागत पर अधिकतम 24 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा। यह सहायता क्रेडिट लिंक्ड बैंक एंड सब्सिडी मॉडल के तहत प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, ग्रामीण उद्यमियों और प्रगतिशील किसानों को 40 प्रतिशत अथवा अधिकतम 12 लाख रुपए तक की सब्सिडी का प्रावधान है, जिससे वे भी इस योजना में भाग लेकर स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगे।

यह उपकरण होंगे उपलब्ध

ट्रैक्टर व ट्रॉली, रोटावेटर, कल्टीवेटर, हैरो, सीड ड्रिल, जीरो टिल सीडर, रीपर, हार्वेस्टर, स्प्रे मशीन, मल्चर तथा ड्रिप व स्प्रिंकलर से जुड़ी मशीनरी उपलब्ध कराई जाएगी।

स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

इन केंद्रों का संचालन क्रय-विक्रय सहकारी समितियां (केवीएसएस), ग्राम सेवा सहकारी समितियां (जीएसएस), राजीविका के क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) तथा ग्रामीण उद्यमी और प्रगतिशील किसान कर सकेंगे। इससे गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर इन केंद्रों की स्थापना से न केवल कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

लागत घटेगी, उत्पादन में होगा इजाफा

राजस्थान सरकार की इस नई पहल से विशेष रूप से लघु और सीमांत किसानों को राहत मिलेगी। अब उन्हें ट्रैक्टर, थ्रेसर, रोटावेटर, रीपर, सीड-कम-फर्टिलाइजर ड्रिल जैसे महंगे यंत्र खरीदने की जरूरत नहीं होगी। इससे खेती की लागत में कमी आएगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। आधुनिक मशीनों के उपयोग से बुवाई, कटाई और थ्रेसिंग जैसे कार्य कम समय में और अधिक कुशलता से पूरे हो सकेंगे। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ कृषि कार्यों में समय की भी बचत होगी।