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देखना, एक दिन मेरा बेटा उठेगा, मेरे बुढ़ापे की लाठी बनेगा

-फादर डे पर विशेष : सात साल से कोमा में पड़े इकलौते बेटे को संभाल रहा पिता-बिस्तर पर बीत रही जिंदगी के बीच पिता की बेबसी को टकटकी से देख रहा युवा
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See, one day my son will rise, I will be the sticks of my old age

देखना, एक दिन मेरा बेटा उठेगा, मेरे बुढ़ापे की लाठी बनेगा

देखना, एक दिन मेरा बेटा उठेगा, मेरे बुढ़ापे की लाठी बनेगा
-फादर डे पर विशेष : सात साल से कोमा में पड़े इकलौते बेटे को संभाल रहा पिता
-बिस्तर पर बीत रही जिंदगी के बीच पिता की बेबसी को टकटकी से देख रहा युवा
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. गत सात सालों से कोमा में बिस्तर पर निढाल पड़े अपने इकलौते युवा पुत्र को सम्भालते हुए अभागे पिता की आंखों से बहते आंसू थमने का नाम नही लेते है जब कोई उसके पुत्र का हाल पूछने आता है। एक हादसे ने उसके हंसते खेलते किशोर होते घर के इकलौते चिराग की जिंदगी को बिस्तर पर बेसुध निढाल कर डाल दिया। झालावाड़़ से करीब 12 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत गोरधन पुरा के गांव पिपलिया में जब पत्रिका संवाददाता जितेंद्र जैकी फादर्स डे की पूर्व संध्या पर ग्रामीण रामकिशन गुर्जर के घर पर पहुंचा तो आंगन में एक खाट पर पड़े युवा बेटे करीब 25 वर्षीय संजू गुर्जर को वह नाक में लगी नली से दूध दे रहा था। परिचय बताने पर वह कुछ नही बोला बल्कि उसकी नम होती आंखे बहते आंसू के रुप में बोलने लगी। लगा फिर से उसकी दुख पर किसी ने हाथ रख दिया हो, वह सिसकारी को अपने में दबाए थोडी देर बाद सहज हुआ। जब उसे बताया कि कल फादर्स डे है तो एक बार फिर उसके चेहरे पर दर्दभरी लकीर उभर गई। फिर उसके बाद शुरु हुआ संजू की दुखभरी दास्ता के मंजर का अहसास।
-एक हादसे ने मोड़ दी जिंदगी की दिशा
45 वर्षीय रामकिशन ने रुधे गले से बताया कि उसका 18 वर्षीय पुत्र संजू 17 दिसम्बर 2012 को अपनी बहन को लेने के लिए सारोला के निकट गांव मालोनी बाइक से रवाना हुआ था। मार्ग में बाघेर घाटी पर एक पिकअप की टक्कर से वह घायल हो गया। उसे अस्पताल में ले जाया गया लेकिन उस दुर्घटना के बाद संजू कोमा में चला गया। उसका शरीर पूरी तरह निढाल पड़ गया। उसने कई जगह इलाज करवाया लेकिन कुछ फायदा नही हुआ। उसने सात साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व उसके बाद मुख्यमंत्री बनी वसुंधरा राजे से भी गुहार लगाई लेकिन सिर्फ निशुल्क दवा के सिवा कुछ नही मिल सका। इसके बाद गत सात सालों से वह भगवान के भरोसे रहकर घर पर ही संजू की देखभाल कर उसे सम्भालने में लगा है। वर्तमान में करीब 25 साल के युवा हो चुके संजू की उम्र के पुत्र अपने पिता के लिए सहारे बनने को तैयार रहते है वहीं उसका पिता उसका सहारा बनने को मजबूर हो रहा है। हालाकि रामकिशन को विश्वास है कि एक दिन उसका बेटा ठीक हो जाएगा व उसके बुढापे की लाठी बनेगा।
-दूध से चल रही जिंदगी
संजू को सिर्फ रोज ढाई से तीन किलो दूध नाक में लगी नली के माध्यम से दिया जाता है। इसके लिए उसका पिता हर दो घंटे में करीब 200 ग्राम दूध उसके पेट में पहुंचाता है। गरीब रामकिशन के पास शुरु में जो भी जमा पूंजी थी सब बेटे के इलाज में खत्म हो गई। बाद में दूध का इंतजाम भी भारी पड़ा तो ग्रामीण मदद को आगे आए व प्रत्येक घर से एक एक दिन संजू के लिए दूध भेजा जाने लगा। बाद में ग्रामीणों की मदद से रामकिशन को एक गाय दिला दी गई। रामकिशन सुबह उठकर सबसे पहले अपने बेटे को सम्भालता है। उसे दैनिक कार्य से निवृत करवाता है। हाथ पैर धोना, मंजन करना, नहलाना, कपड़े पहनाना, फिर दूध देना बस यही काम उसकी दिनचर्या में शामिल हो चुका है।
-दवा भी खत्म हो गई
रामकिशन ने बताया कि पहले तो संजू को निशुल्क दवा उपलब्ध हो जाती थी लेकिन गत चार माह से उसकी दवा निही मिल पा रही है इसलिए उसे हर माह 18 सौ रुपए की दवा बाजार से खरीदनी पड़ रही है। समाज कल्याण विभाग की ओर से उसे प्रतिमाह 750 रुपए पेंशन मिलती है। रामकिशन दूसरों के खेत पर काम कर अपना, लाचार पडे इकलौते बेटे व पत्नी चंदाबाई का पेट पाल रहा है। बेटे के इलाज में करीब पांच लाख रुपए लग गए व कर्जा हो गया। वर्तमान में गरीबी भी अभिशॉप बन रही है।
-आर्मी में आ गया था नम्बर
संजू ने राजकीय महाविद्यालय में एनसीसी ज्वाईन की व आर्मी में भर्ती होने के लिए फार्म भर दिया था। वह सेना में जाकर देश सेना करना चाहता था। इसी बीच दुर्घटना हो गई व वह कोमा में चला गया। घटना के बाद उसके घर सूचना आई की उसका आर्मी के लिए नम्बर आ गया था।
-ब्रेन का कंट्रोल नही रहता
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नरेंद्र शर्मा का कहना है कि कभी कभी दुर्घटना के समय सिर पर चोट लगने से आदमी कोमा में चला जाता है। इस दौरान उसका ब्रेन को काम करता है लेकिन ब्रेन का बॉडी पर कंट्रोल नहीं रहता है इससे शरीर निढाल पड़ जाता है। इसमें ठीक होने के चांस बहुत कम रहते है। दवाईयों के सहारे शरीर को चलाने का प्रयास किया जाता है। कभी कभी अचानक कोई मुवमेंट होने से या ईश्वरीय कृपा से अगर कोई हलचल हो जाए तो मरीज ठीक हो सकता है। लेकिन इसमें मात्र एक या दो प्रतिशत ही चांस हो पाते है।
-मदद करने का प्रयास करेगे
जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. साजिद खान ने बताया कि कोमा में पड़े संजू को निशुल्क दवा दी जा रही है। उसे और अच्छी चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने व उसकी स्थिति को सुधारने के लिए हर सम्भव प्रयास किया जाएगा। इसकी बीमारी को लेकर देश के बडे अस्पतालों में भी सम्पर्क करने का प्रयास किया जाएगा।