
गोमती सागर के तट से जल संरक्षण का संदेश
झालरापाटन. गोमती सागर के तट स्थित वॉकिंग ट्रैक से गुजरात बड़ोदा पीठ के षष्ठपीठाधीश्वर द्वारकेशलाल महाराज ने जल और पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।
भक्ति जागृति महोत्सव के तहत द्वारिकाधीश पुष्टि भक्ति सत्संग समिति व नगरपालिका के तत्वावधान में शनिवार सुबह षष्ठपीठाधीश्वर ने मौजूद लोगों से सवाल किया कि वह जल व पर्यावरण बचाने के लिए कितने जागरूक हंै, इस पर कुछ लोगों को छोड़कर अधिकांश लोग मौन रहे, इस पर उन्होंने कहा कि इतने गंभीर विषय पर हमारा मौन क्या संदेश देता है।
जल, पर्यावरण, प्रकृति, भोजन, आरोग्य, शिक्षण जीवन के अभिन्न अंग है। भौतिक जीवन व आंतरिक प्रसन्नता के लिए इनकी जरूरत होती है आध्यात्म रूप से जल को देखने से मन की निर्मलता होती है। चलने से शरीर को लाभ मिलता है चलते चलते प्रभू का स्मरण करने से मन, बुद्धि व चित्त को प्रसन्नता मिलती है। इन सभी की यहां के लोगों को वॉकिंग टै्रक के भ्रमण करने पर अनुभूति होगी। संत चलते हुए अच्छे लगते हैं, बैठे हुए लोग वृक्ष के समान हैं, लेकिन दोनों के जीवन का लक्ष्य एक ही है, जल है तो कल है। जल संरक्षण कर हम किसी पर उपकार नहीं कर रहे है बल्कि स्वयं पर उपकार कर रहे हंै।
अतिवृष्टि अनावृष्टि प्रकृति के बदलते रूप हंै जो कि बिगड़ते पर्यावरण के कारण आ रहे है। उन्होंने कहा कि कॉलमैन ने अपने विचार में बताया कि 21 वीं सदी में मानव समुदाय इतने प्रकार के तनाव में जिएगा, कि उसे बचाने वाला प्रकृति के अलावा कोई नहीं होगा, इसलिए मन व शरीर दोनों का स्वस्थ होना जरूरी है। कार्यक्रम में पूर्व विधायक निर्मल कुमार सकलेचा व अनिल जैन, नगरपालिका अध्यक्ष अनिल पोरवाल, उपाध्यक्ष चंद्रप्रकाश लाला राठौर, पूर्व अध्यक्ष मुबारिक मंसूरी, कांग्रेस नेता सुरेश गुर्जर, डॉ. डीके जैन भी मौजूद थे। संचालन मुरली मनोहर प्रजापति ने किया। षष्ठपीठाधीश्वर ने समाज सेवा से जुड़े लोगों को ओपरणा भेंट किया। बाद में षष्ठपीठाधीश्वर, उनके पुत्र शरणम लाल सहित मौजूद लोगों ने पौधरोपण किया।
--ठाकुरजी संग होली का रंग
कार्यक्रम के तहत राजभोग में फागोत्सव मनाया, जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने ठाकुरजी के संग होली खेली, होली की इस रगंत में श्रद्धालु भक्ति के रंगों में भिगते नजर आए। षष्ठपीठाधीश्वर के गुलाल व फूलो की पंखुडिय़ों को श्रद्धालुओं पर डालने से भक्ति का रस और बढ़ गया।
--काहे रोकत डगर, हमारे नंदलाल...
भक्ति जागृति महोत्सव के तहत रात को आयोजित कार्यक्रम में षष्ठपीठाधीश्वर ने भक्ति व सत्संग की आवश्यकता क्यों है, इस पर वचनामृत देते हुए कहा कि हम किसी भी योनी में रहे, लेकिन कृष्ण के निकट रहें, कृष्ण को पाना जितना सरल है उतना ही कठिन भी है। अंतरराष्ट्रीय नृत्यांगना गरिमा भार्गव के साथ इतिशा आचार्य, गुंजन असवानी, अनंता जैन, प्राप्ति जैन ने शुभघड़ी प्रथम गणेश मनाओ गणपति वंदना के साथ नृत्य की प्रस्तुतियां दी, इसमें रूद्राष्टकम नृत्य में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया। निरतंतढंग में विभिन्न भाव भंगिमाओं के साथ कृष्ण गोपी नृत्य दर्शाया। नाचत सुंदघ में राधा के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन किया। तराना तीन ताल 16 मात्रा में पेश किए। ठुमरी तथा होरी नृत्य के माध्यम से दर्शकों का मन मोह लिया। स्पीक मैके जिला संयोजक सुरेन्द्र जैन ने बताया कि गरिमा जयपुर राजघराने की कत्थक नृत्यांगना हंै, इनके गुरू पंडित राजेन्द्र गंगानी हैं, ये भारत के अलावा कई देशों में प्रस्तुतियां देकर सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं। इस मौके पर समिति के पदाधिकारियों ने षष्ठपीठाधीश्वर व उनके पुत्र का सम्मान किया।
--मनोरथ दर्शन में उमड़े श्रद्धालु
कार्यक्रम के तहत शनिवार शाम द्वारिकाधीश मंदिर के कंवरा चौक में भगवान द्वारिकाधीश व बालस्वरूप नवनीत प्रियाजी की प्रतिमाओं का चमक-दमक के साथ जरदोजी घटा मनोरथ की झांकी सजाई। इसके दर्शन के लिए रात तक श्रद्धालु उमड़ते रहे।
--आज के कार्यक्रम
रविवार सुबह मंगलादर्शन के बाद सुबह 7:30 बजे द्वारिकाधीश मंदिर की 52 वीं परिक्रमा होगी, इसमें बैंड-बाजों, भजन मंडलियों के साथ षष्ठपीठाधीश्वर के सानिध्य में भगवान द्वारिकाधीश के चित्र की झांकी के साथ श्रद्धालु रंग गुलाल व फूलों की पंखुडिय़ों के साथ होली खेलते हुए चलेंगे। परिक्रमा विभिन्न मार्गों से होती हुई वापस द्वारिकाधीश मंदिर पहुंचेगी, जहां महाआरती के साथ समापन होगा।
Published on:
16 Mar 2019 08:05 pm
