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टाईगर के मुवमेंट से गांव में दहशत, विभाग ने किया अलर्ट

-मुकंदरा अभयारण्य के गागरोन क्षेत्र में हुई हलचल
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Tigers move to panic in village, department warns

टाईगर के मुवमेंट से गांव में दहशत, विभाग ने किया अलर्ट

टाईगर के मुवमेंट से गांव में दहशत, विभाग ने किया अलर्ट
-मुकंदरा अभयारण्य के गागरोन क्षेत्र में हुई हलचल
-जितेंद्र जैकी-
झालावाड़. मुकंदरा टाईगर रिजर्व राष्ट्रीय उद्यान के गागरोन क्षेत्र के गांव मशालपुरा में बुधवार रात टाइगर के मुवमेंट की सूचना पर वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को सचेत किया गया वहीं गुरुवार को विभाग की पूरी टीम क्षेत्र में गश्त करती रही व ग्रामीणों के क्षेत्र में आवागमन के बारे में सुरक्षा के तहत सावधानी बरतने को कहा गया। विभाग की ओर से क्षेत्र में चौकसी भी कड़ी कर दी गई है। मशालपुरा तक बाहर के लोगों का प्रवेश बंद कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि रणथम्भौर अभ्यारण्य से टाईगर स्वच्छंद विचरण करते हुए मुकंदरा टाईगर रिजर्व राष्ट्रीय उद्यान के क्षेत्र में आ गया था। वैसे तो उसका मुवमेंट दरा के निकट क्लोजर के आसपास ही रहा लेकिन इन दिनों गागरोन क्षेत्र में उसकी दखल बढ़ गई इससे क्षेत्र में स्थित गांव मशालपुरा, लक्ष्मीपुरा, हरिपुरा, प्रेमपुरा आदि में ग्रामीण दहशत में हो गए।
-ग्रामीणों की जुबानी
गुरुवार को पत्रिका संवाददाता जितेंद्र जैकी ने भी गागरोन से 16 किलोमीटर दूर वन क्षेत्र में स्थित मशालपुरा गांव तक दौरा किया व ग्रामीणों से जानकारी ली। गांव में पेड़ के नीचे खाट पर बैठे कन्हीराम गुर्जर, विनोद, मांगीबाई, केदार बाई, बादाम बाई व भेरुलाल भील ने बताया कि बुधवार रात से ही क्षेत्र में वन विभाग की टीम की हलचल भी बढ़ गई गाडिय़ा भी दौड़ रही है व विभाग की ओर से गांव वालों को गंाव के बाहर खेतों की ओर व पहाड़ी की ओर जाने से मना कर दिया गया है। विभाग वालों ने भी गंाव में स्थित वन नाके पर ही डेरा डाल रखा है। गांव वालों ने कहा कि गंाव में व घरों में तो सुरक्षा है लेकिन खेतों में भी तो जाना जरुरी है। और वन्यजीवों से खतरा भी गांव के बाहर, खेत व पहाड़ी की ओर ही है। इसलिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
-विस्थापित नही होने से परेशानी
गागरोन वन क्षेत्र में स्थित गांव मशालपुरा, लक्ष्मीपुरा, नौलाव आदि के ग्रामीणों को विस्थापित नही किया जा सका है। इस कारण ग्रामीण गांव नही छोड़ रहे है। उनका कहना है कि वैसे तो गांव में करीब 65 परिवार है। इसमें से 90 प्रतिशत ग्रामीणों के पास जमीन है व खेती करते है वह बिना उचित मुआवजा व विस्थापन के उचित स्थान के बिना कही जाना नही चाहते है। वहीं 10 प्रतिशत ग्रामीण जो बेरोजगार है वह सरकार की हर शर्त पर गांव छोडऩे का तैयार है।
-विभाग की टीम ने डाला डेरा
पत्रिका टीम को विभाग के मुकंदरा हिल्स टाईगर रिजर्व वनपाल नाका मशालपुरा रेंज गागरोन पर वन विभाग की टीम मिली। टीम के सदस्यों ने कहा कि क्षेत्र में वन्य जीवों का मुवमेंट तो होता रहता है। हमने ग्रामीणों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी है। अनहोनी न हो इसके लिए चौकसी की जा रही है।
-अभयारण्य में वन्यजीवों की हलचल
गागरोन क्षेत्र में पेंथर, जंगली सुअर, नील गाय, जरख, सहेली, हिरण, लोमड़ी सहित कई प्रकार के वन्यजीव विचरण करते रहते है। ग्रामीणों को रात्री मे क्षेत्र में जाने की मनाई है। कई बार तो ग्रामीण बाहर से देर रात आने पर एहतियात के तौर पर वन विभाग के नाके पर ही रात गुजारते है।
-ग्रामीणों को सचेत किया है
इस सम्बंध में गागरोन वन क्षेत्र झालावाड़ के वन रक्षक सुरेंद्र कुमार ने नोलाव में स्थित वन नाके पर बताया कि क्षेत्र में अधिकतर कई खतरनाक वन्य जीव भी विचरण करते रहते है। कभी कभी एमटी-3 का मुवमेंट भी हो जाता है, इसलिए गांव वालों को सचेत किया। चौकसी भी कड़ी कर दी गई है। क्षेत्र में टाइगर स्वच्छंद विचरण कर रहा है इसलिए सावधानी जरुरी है।
-टाईगर के लिए लाई गई साथिन
झालावाड़. मुकन्दरा हिल्स टाईगर रिजर्व में बाघों के रि-इन्ट्रोडक्शन के लिए राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा दी गई स्वीकृति की पालना में 12 अप्रेल को रणथम्भौर टाईगर रिजर्व बाघिन टी-83 को मुकन्दरा हिल्स टाईगर रिजर्व में लाकर एनटीसीए द्वारा जारी टाईगर रि-इन्ट्रोडक्शन के प्रोटोकॉल के अनुसार साफ्ट एनक्लोजर में छोड़ा गया एवं इसे एमटी-4 नाम दिया गया है। मुकन्दरा राष्ट्रीय उद्यान कोटा के उप वन संरक्षक (वन्यजीव) टी. मोहनराज ने बताया कि सॉफ्ट एनक्लोजर में उक्त बाघिन को गहन देखरेख एवं निगरानी में रखा गया है। बाघिन एमटी-4 के यहां के वातावरण के अनुकूल हो जाने के उपरान्त हाल ही में इसकी हार्ड रिलीज की गई एवं फ्री-रेंजिंग बाघ एमटी-3 के क्षेत्र में छोड़ा गया है। वर्तमान में यह बाघिन एमटी-4 वनखण्ड मशालपुरा में विचरण कर रही है एवं निगरानी दल द्वारा इसकी चौबिसों घण्टे निगरानी की जा रही है।