
गिरते जलस्तर पर कब देंगे ध्यान
झालावाड़. जिले में प्रति वर्ष जल स्तर नीचे जाता जा रहा है। एमजेएस के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हालांकि जल संरचनाए बनाई जा रही हैं, लेकिन शहरों में भी वर्षाजल को सहने की जरूरत है। सरकार ने भले ही वर्षा जल को सहजने के लिए उद्योगों, सरकारी भवनों व घरों पर वाटर हार्वेस्टिंग बनवाना अनिवार्य कर रखा हो, लेकिन जिम्मेदारों का ध्यान नहीं होने से जिले का जलस्तर नीचे जा रहा है। इसबार प्री मानसून सर्वे में जिले का जलस्तर ११.०९ मीटर नीचे आया है, और आधा मानूसन निकलने के बाद भी बारिश आधी भी नहीं हुई है।
जिले में जल स्तर ऊंचा लाने के लिए पांच वर्ष पहले वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की शुरूआत की थी, लेकिन इसके प्रति उद्योग और ना ही बड़े घर के मालिकों को परवाह है। उद्योगपति और मकान मालिक दोनों की पेनल्टी भरने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लेकर गंभीर नहीं है। हालात यह है कि शहर से सटे झालावाड़ कोटा स्टोन औद्योगिक क्षेत्र व चन्द्रावती ग्रोथ सेंटर स्थित औद्यौगिक क्षेत्र में करीब आठ सौ से अधिक इकाइयां है। लेकिन दो चार को छोड़कर किसी ने भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगा रखा है। इन औद्योगिक इकाइयों से प्रतिवर्ष लाखों लीटर पानी की जमीन में जाने की बजाए नालियों में बह रहा है। ऐसे हालात में जिले में इस वर्ष कम हो रही बारिश में पानी को बचाना जरूरी है।
लगाने होंगे सिस्टम
रीको क्षेत्रीय प्रबन्धक विक्रमादित्य मोड़ ने बताया कि अब औद्योगिक इकाइयों को किसी प्रकार की एनओसी देते समय वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना अनिवार्य कर दिया है। कुछ लोगों ने लगाए है। लेकिन अभी भी कुछ लोगों ने नहीं लगा रखे हैं। ऐसे लोगों पर पैनल्टी लगा रहे हैं। सब को समझाएंगे ताकि जलस्तर ऊंचा उठे।
हर साल हो रही कमी
जिले में वर्ष २०१७-१८ में प्री मानसून सर्वे में जिले में १०.५३ मीटर तथा पोस्ट मानसून में ७.८२ मीटर पानी जमीन में नीचे चला गया है। वहीं इस वर्ष प्री मानसून में ११.०९ मीटर नीचे आया है। जिले में खानपुर डार्क जोन में आ चुका है। तो जिले में कई स्थानों पर पानी ३०० से ५०० मीटर तक नीचे चला गया है। जिले में भूजल स्तर ऐसे ही नीचे जाता रहा तो आने वाले समय में भयंकर परेशानी हो सकती है। वहीं इस बार मानसून साथ नहीं दे रहा है। ट्यूबवैल व कुओं से पानी का दोहन ज्यादा हो रहा है।यही हालात रहे तो आने वाले समय में जल संकट गहरा जाएगा।
परिषद का नहीं ध्यान
बारिश का पानी बचाने के लिए कम ही लोगों को परवाह है। नगर परिषद की ओर से ३०० वर्गमीटर या इससे अधिक के साइज के मकान में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाना आवश्यक है। ऐसे में परिषद प्लांट की एनओसी देते समय अमानत शुल्क तो ले रहा है। लेकिन मॉनिटरिंग कोई नहीं कर रहा है। नगर परिषद द्वारा आज तक किसी को इसके लिए मौके पर जाकर बनवाने के लिए नहीं कहा है। इतना ही नहीं कई सरकारी स्कूलों व भवनों में भी यह सिस्टम नहीं लगे हैं। और कहीं लगे भी है तो वह बदहाल हो रहे हैं। नए बन रहे भवनों में भी यह सिस्टम लगाने पर जिम्मेदार महकमे पीडब्ल्यूडी का ध्यान नहीं है।
ये हो सकते हंै उपाय
घरों व उद्योगों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाए जाएं, बारिश का पानी अधिक से अधिक संचित हो, सिंचाई बंूद-बूंद व स्प्रिंकल आदि आधुनिक सिस्टम से की जाएं। पानी का दुरूपयोग रोका जाएं। अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं।
जिन लोगों ने भी ३०० वर्ग मीटर से अधिक के मकान बनाए है ओर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाए है तो उन्हें पाबंद करेंगे। नगर परिषद को कार्रवाई के लिए कहेंगे। सरकारी भवनों में नहीं लगे हुए है तो कल दिखवाएंगे।
रामचरण शर्मा, अतिरिक्त जिला कलक्टर, झालावाड़।
Published on:
06 Aug 2018 04:13 pm
