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झांसी का वह मंदिर जहां रानी लक्ष्मीबाई का हुआ था विवाह, आज भी घर में गणपति लाने से पहले यहां हाजिरी लगाते हैं लोग

Jhansi Fort Ganesh Temple History: झांसी किले के प्रवेश द्वार पर स्थित प्राचीन गणेश मंदिर की अनकही गाथा। यहीं मणिकर्णिका बनी थीं रानी लक्ष्मीबाई। जानें इस मंदिर का 250 साल पुराना इतिहास।

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झांसी

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Aman Pandey

Apr 25, 2026

jhansi

PC: Incredible india porta

झांसी के ऐतिहासिक शहर में जहां हर दीवार और हर पत्थर पर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी की कहानियां गूंजती हैं, वहां ठीक झांसी किले के प्रवेश द्वार पर स्थित है विघ्नहर्ता भगवान गणेश का एक अद्भुत प्राचीन मंदिर। यह मंदिर न सिर्फ अपनी अनोखी वास्तुकला और भक्ति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी उस ऐतिहासिक गाथा के लिए भी जाना जाता है।

झांसी के किले पर विराजे हैं भगवान गणेश

यह प्राचीन गणेश मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि झांसी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी अहम हिस्सा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर विघ्न विनाशक भगवान गणेश से आशीर्वाद लेते हैं।श्री गणेश के इस प्राचीन मंदिर में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई रोजाना दर्शन-पूजन करती थीं। मंदिर की बनावट में एक खास गुंबद जैसा ढांचा है, जो प्राचीन वास्तुकला की शानदार कारीगरी का नमूना है। मंदिर के अंदर भगवान गणेश की संगमरमर की सुंदर मूर्ति स्थापित है, जिसका दिव्य चेहरा दमकता है।

मणिकर्णिका से 'महारानी लक्ष्मीबाई' तक का सफर

1842 में राजा गंगाधर राव और मणिकर्णिका तांबे (जिन्हें बाद में रानी लक्ष्मीबाई नाम दिया गया) का विवाह इसी मंदिर में हुआ था। पवित्र रीतियों और अनुष्ठानों के बीच मणिकर्णिका को 'रानी लक्ष्मीबाई' का नाम मिला। किंवदंती है कि रानी लक्ष्मीबाई नियमित रूप से इस मंदिर में आकर भगवान गणेश की पूजा करती थीं और उनसे शक्ति व मन की शांति प्राप्त करती थीं।

गणेश चतुर्थी पर उमड़ता है जनसैलाब

मंदिर के निर्माण को लेकर इतिहास में थोड़ा रहस्य बना हुआ है। माना जाता है कि यह मंदिर 1760 ईस्वी के आसपास बनाया गया था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि मराठा पेशवाओं के अधीन झांसी के सूबेदार विश्वास राव लक्ष्मण ने इसका निर्माण करवाया, जबकि कुछ अन्य का कहना है कि रघुनाथ राव नेवलकर, जो नेवलकर राजवंश के संस्थापक थे, उन्होंने इसकी नींव रखी। हालांकि, एक बात निश्चित है कि यह मंदिर आज भी पुरानी पीढ़ियों की अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बना हुआ है।

गणेश मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां गणेश चतुर्थी का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। स्थानीय लोग आज भी अपने घर में गणेश प्रतिमा लाने से पहले इस मंदिर में पूजा करते हैं। रानी लक्ष्मीबाई के समय से भी पहले से यह परंपरा चली आ रही है।